Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

राजनीति में महिलाओं की डमीं नहीं वास्तविक भागीदारी की ज़रूरत

राजनीति में महिलाओं की डमीं नहीं वास्तविक भागीदारी की ज़रूरत चुनाव जीतकर आई महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों पर उनके परिजनों …


राजनीति में महिलाओं की डमीं नहीं वास्तविक भागीदारी की ज़रूरत

राजनीति में महिलाओं की डमीं नहीं वास्तविक भागीदारी की ज़रूरत

चुनाव जीतकर आई महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों पर उनके परिजनों का असंवैधानिक कब्जा तोड़ना ज़रूरी

सुनिए जी ! चुनाव जीतकर आई महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों का दुरुपयोग बंद कर दीजिएगा ! वरना जनता जनार्दन वोटो से ज़वाब देना जानती है

महिला आरक्षण 33 प्रतिशत फिक्स हुआ – चुनकर आई महिलाओं के पति पुत्र परिवार वालों द्वारा उनके संवैधानिक अधिकारों के दुरुपयोग को रोकना ज़रूरी – एडवोकेट किशन भावनानीं गोंदिया

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत नारी की पुज्यनीय भूमि है यहां आदि-अनादि काल से नारी का सम्मान किया जाता है जो मां लक्ष्मी सरस्वती दुर्गा काली माता सीता इत्यादि जहां अनेक ऐतिहासिक किस्से दर्ज हैं, वहीं देश की राष्ट्रपति लोकसभा अध्यक्ष प्रधानमंत्री सहित अनेक महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर भारतीय नारी आसीन होकर सफ़लताओं के झंडे गाढ़ चुकी है। नारी शक्ति के सम्मान को आगे बढ़ाते हुए 21 सितंबर 2023 का वह ऐतिहासिक पल इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से शामिल हो गया है, जब संसद के उच्च सदन राज्यसभा में देर रात्रि 214 वोटो से संविधान के 128 वें संविधान संशोधन विधेयक को पारित कर नारी शक्ति वंदन विधायक 2023 पर मोहर लगाते हुए महिलाओं का विधानसभा लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण पर मोहर लगा दी। बता दें लोकसभा ने 20 सितंबर 2023 को ही 454/2 बहुमत से इस प्रस्ताव को पारित कर दिया था। बता दें स्थानीय स्तरपर भी पंचायत समितियों निकायों स्तर पर पहले भी 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू है परंतु इन स्तरोंपर महिलाआरक्षण का एक कटु सत्य अनुभव अक्सर प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सुनाई देते रहता है किचुनकर आई महिलाओं के पति पुत्रों देवर या परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा महिला के संवैधानिक अधिकारों का हनन कर खुद असंवैधानिक रूप से बैठकों, नीति निर्धारण, आदेशों निर्देशों, ठेकेदारी दबंगई सहित अनेक प्रत्यय किए जाते हैं यहां तक कि अपनी पत्नी मां या रिश्तेदार के संवैधानिक अधिकार के सील ठपे भी अपने पास रखते हैं और समय, धन, मांग को देखकर उसका उपयोग करते हैं। यह सब नजारे मैनें खुद ने भी हमारे स्थानीय प्रशासन में महिला पार्षद के पति या पुत्रों को करते हुए स्वयं देखा है। होता यह है कि महिला को चुनाव में भी उनके परिजनों द्वारा धूमधाम से उतारा जाता है और जिताया भी जाता है।फिर महिलाका स्थान घर हो जाता है और बाहर का खेला उनके पति या पुत्रों द्वारा किया जाता है। यानें संवैधानिक कार्य को असवैधानिक व्यक्ति विशेष द्वारा किया जाता है जिसे अत्यंत कढ़ाई से ध्यान देने को रेखांकित करना ज़रूरी है। माननीय पीएम से इस आर्टिकल के माध्यम से मेरा विशेष निवेदन है कि इस कुत्य को रोकने के लिए पार्टी और शासकीय स्तरपर नीति निर्धारण करना समय की मांग है, ताकि महिलाओं को दिखावटीभागीदारी नहीं बल्कि वास्तविक भागीदारी दिलाई जा सके। चूंकि 33 परसेंट आरक्षण पारित हो चुका है इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, महिला आरक्षण 33 प्रतिशत फिक्स हुआ अब चुनकर आई महिलाओं के पति पुत्र परिवार वालों द्वारा उनके संवैधानिक अधिकारों के दुरुपयोग को रोकना ज़रूरी है।
साथियों बात अगर हम महिलाओं के रिश्तेदारों द्वारा असंवैधानिक दखलंदाजी की करें तो, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार ने ग्राम पंचायत से लेकर संसद तक आरक्षण कर रखा है। लेकिन नगरीय निकाय में आज भी चुनकर आई महिला पार्षदों के स्थान पर उनके पति, पुत्र, भाई, अन्य रिश्तेदार महत्वपूर्ण भूमिका अदा की जाती रही हैं। निगम में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण किया गया है। जिसके तहत पार्षद महिलाएं चुनकर आती हैं। महिला पार्षद हैं, लेकिन आधे से ज्यादा पार्षदों का कामकाज उनके पति, पुत्र, भाई, देवर या अन्य रिश्तेदार संभाल रहे हैं। इसे देखते हुए राज्य सरकारों के वर्षों पुराने आदेश को निगम आयुक्त बार बार जारी किया करते है, कि नगरीय निकायों के कामकाज संचालन के दौरान बैठक समेत अन्य कार्यों में महिला पदाधिकारी के कोई भी सगे संबंधी/रिश्तेदार भाग नहीं लेंगे और न ही कोई हस्तक्षेप या दखलंदाजी करेंगे। निर्देश का पालन नहीं होता है तो नगर पालिक निगम अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई बिना भेदभाव के और बहुत ही गंभीरता से की जाए। पंचायतों में भी महिला जनप्रतिनिधियों के पति या परिवार के अन्य सदस्य उनका कामकाज संभालते है। महिलाएं केवल मुहर बनकर रह गई है। अनेक स्थानीय निकायों में ऐसा होता है कि चुनाव से पहले पार्षद पद के लिए महिला उम्मीदवारों ने पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं, रिश्तेदारों के साथ जोर-शोर से प्रचार-प्रसार किया करते है। लेकिन चुनाव के बाद कई मतदाताओं ने महिला पार्षदों की शक्ल नहीं देखी हैमतदाताओं का कहना है कि समस्याओं के निराकरण के लिए मोबाइल फोन लगाने पर महिला पार्षद के पति, पुत्र से ही बात होती है। वे समस्याएं सुनकर निराकरण करा देते हैं। महिला पार्षद के पति-पुत्र ही वार्ड विकास की रणनीति बनाते देखे जाते हैं। शहर गांव के लोगों ने जिन महिलाओं को पार्षद चुना, वे कुछ महीने बाद ही घर बैठ जाती है, जबकि उनके रिश्तेदार पार्षदी कर रहे हैं। हर 5 सालों के अंदर जनता के वोटों से शहर गांव के महिला पार्षद चुनी जाती है। लोगों ने अपने वार्ड की जिम्मेदारी सौंपी लेकिन चुनी हुई महिलाओं के रिश्तेदारों ने उनके अधिकारों पर कब्जा कर लिया। मतदान का परिणाम अाने तक ही महिला प्रत्याशी जनप्रतिनिधि के रूप में नजर आती हैं। जीत के बाद मोहल्लों में जुलूस भी निकाला। इसके बाद पुरुष प्रधान समाज ने महिला जनप्रतिनिधि के पार्षद पद पर कब्जा कर लेते हैं। किसी का बेटा तो किसी का भाई, भतीजा, देवर, पति और ससुर स्वयंभू पार्षद बन गए। पार्षदों के ये रिश्तेदार समय-समय पर निगम की विभागीय समितियों की बैठकों में शामिल भी होते रहे हैं।
साथियों बात अगर हम इसके नियमों की करें तो नियमानुसार चुने हुए जनप्रतिनिधि ही निगम की बैठकों में शामिल हो सकते हैं। अन्य व्यक्ति को संवैधानिक रूप से विभागीय बैठकों में बैठने का अधिकार नहीं है। निगम की व्यवस्था विधानसभा अौर लोक सभा की तर्ज पर ही चलती है। योजना समिति की बैठक में पार्षद के भतीजेनिगम सभागृह में, योजना समिति की बैठक में, पार्षद के रिश्तेदार शामिल होते रहे हैं। बैठक में विचार-विमर्श भी करते रहें है। बात को अनसुनी करने या कुछ कहने पर दबंगई करने से भी परहेज नहीं की जा रही है ऐसा करीब करीब अनेक नगरों में होता है।
साथियों बात अगर हम 21 सितंबर 2023 को पारित नारी शक्ति वंदन विधेयक 2023 की करें त, आखिरकार राज्यसभा से भी महिला आरक्षण बिल सर्वसम्मति से पास हो गया. बिल के समर्थन में 214 वोट डाले गए, जबकि विरोध में एक भी वोट नहीं पड़ा। इससे पहले लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास हो गया था। अब बिल को राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद महिला आरक्षण बिल, कानून बन जाएगा हालांकि, पहले जनगणना और सीटों के परिसीमन का काम होगा. उच्च सदन में विधेयक पारित के बाद दोनों सदनों को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया है। जानकारों का कहना है कि महिला आरक्षण बिल को अभी भी लंबा सफर तय करना है। जनगणना और परमीसन के बाद महिला आरक्षण विधेयक साल 2029 केलोकसभा चुनाव तक ही लागू हो सकेगा। 128वें संविधान संशोधन विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को अब अधिकांश राज्य विधानसभाओं की मंजूरी की आवश्यकता होगी। इसे जनगणना के आधार पर संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों को फिर से तैयार करने के लिए परिसीमन के बाद लागू किया जाएगा. सरकार ने कहा है कि इस प्रक्रिया को अगले साल शुरू किया जाएगा
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि चुनाव जीतकर आई महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों पर उनके परिजनों का असंवैधानिक कब्जा तोड़ना ज़रूरी।सुनिए जी ! चुनाव जीतकर आई महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों का दुरुपयोग बंद कर दीजिएगा ! वरना जनता जनार्दन वोटो से ज़वाब देना जानती है।महिला आरक्षण 33 प्रतिशत फिक्स हुआ – चुनकर आई महिलाओं के पति पुत्र परिवार वालों द्वारा उनके संवैधानिक अधिकारों के दुरुपयोग को रोकना ज़रूरी है।

About author

kishan bhavnani

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट 

किशन सनमुख़दास भावनानी 

Related Posts

महिला सशक्तिकरण -डॉ. माध्वी बोरसे!

December 27, 2021

महिला सशक्तिकरण महिला सशक्तिकरण तब है जब महिलाओं को अपने निर्णय लेने की स्वतंत्रता हो। उनके लिए क्या सही है

अलविदा 2021-जयश्री बिरमी

December 27, 2021

अलविदा 2021 एक बुरे स्वप्न की समाप्ति सा लग रहा हैं इस वर्ष का समाप्त होना।और मन थोड़ा आहत भी

कौवों की जमात- जयश्री बिरमी

December 27, 2021

 कौवों की जमात  एक वीडियो देखा था,एक ताकतवर मुर्गा एक कौए पर  चढ़ बैठा था और उसको अपनी चोंच से 

हमारे पवित्र सोलह संस्कार- जयश्री बिरमी

December 27, 2021

हमारे पवित्र सोलह संस्कार हिंदू धर्म कोई व्यक्ति विशेष द्वारा स्थापित धर्म नहीं हैं,ये प्राचीन काल से आस्थाएं और ऋषि

विश्वविख्यात विलियम शेक्सपियर-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 23, 2021

विश्वविख्यात साहित्यकार विलियम शेक्सपियर विलियम शेक्सपियर यकीनन सभी समय के सबसे प्रसिद्ध लेखकों में से एक है। उन्होंने 38 नाटकों,

रिश्तों की कद्र- अनीता शर्मा

December 22, 2021

 एक चिन्तन!!   * रिश्तों की कद्र* मैंने पिछले दिनों फेसबुक पर एक फोटो देखी जिसमें पिछले साल किसी कार्यक्रम में

Leave a Comment