Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

राजनीति की जीत-जितेंद्र कबीर

 राजनीति की जीत राजनीति की जीत है यह लोकतंत्र की जीत का मत दो इसे नाम, पहले-पहल जब उठी थी …


 राजनीति की जीत

राजनीति की जीत-जितेंद्र कबीर

राजनीति की जीत है यह

लोकतंत्र की जीत का

मत दो इसे नाम,

पहले-पहल जब उठी थी

इन कृषि कानूनों के 

विरोध में आवाज,

तब ही कर लिया जाता

सभी संबंधित पक्षों की मांगों पर 

सहानुभूतिपूर्वक विचार,

तो यह लोकतंत्र की जीत 

कहलाती,

अब जो आने वाले चुनावों में

राजनीतिक नुकसान के

भय से लिया गया है यह निर्णय

तो लोकतंत्र की जीत का

मत दो इसे नाम,

एक कृषि प्रधान देश में

किसानों को अपनी ही जमीन पर

अपनी ही मेहनत से उगाई 

फसल के निस्तारण पर 

अधिकार के लिए गंवानी पड़ें अगर

सैंकड़ों की संख्या में जानें,

चौदह महीनों तक सड़कों पर

आंदोलनरत रह सहने पड़े

कई सारे उत्पीड़न एवं अत्याचार,

खालिस्तानी, आतंकवादी, देशद्रोही

जैसे विशेषणों का मिले उन्हें

सरकार समर्थित बयान वीरों से इनाम,

तो लोकतंत्र की जीत का

मत दो इसे नाम।

किसानों को हुई तकलीफों पर 

खेद जताना तो दूर की बात है

उल्टा उनकी नासमझी पर ही

फोड़ा गया है ठीकरा

इन कानूनों की वापसी का,

इससे ही साफ हो जाता है 

कि कितने बेमन से

आया है यह परिणाम,

तो लोकतंत्र की जीत का

मत दो इसे नाम।

   जितेन्द्र ‘कबीर’
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति – अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

चल चला चल राही तू-डॉ माध्वी बोरसे!

December 4, 2021

चल चला चल राही तू! चल चला चल राही तू, मुसाफिर तू कभी रुकना ना,रुकना ना, कभी झुकना ना,तेरेते रह

ऐ उम्मीद -सिद्धार्थ गोरखपुरी

December 3, 2021

ऐ उम्मीद ऐ उम्मीद! मैं तुमसे छुटकारा चाहता हूँ। क्योंकि मैं खुश रहना ढेर सारा चाहता हूँ।तुम न होती तो

बेमानी- जयश्री बिरमी

December 3, 2021

बेमानी उम्रभर देखी हैं ये दुनियां की रस्मेंन ही रवायतें हैं निभाने की कसमेंजब भूले गए थे वादे और तोड़ी

“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल”-हेमलता दाहिया.

December 3, 2021

“टुकड़े- टुकड़े में बिखरी मेरी धरा अनमोल” बात बात में शामिल हैं,जाति धर्म के बोल.खोखले वादे खोल रहे हैं,हैं विकास

ना लीजिए उधार-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

ना लीजिए उधार! ना लीजिए उधार, बन जाओ खुद्दार,लाए अपनी दिनचर्या में, थोड़ा सा सुधार, अपने कार्य के प्रति, हो

स्वयं प्रेम कविता -डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

स्वयं प्रेम! स्वयं प्रेम की परिभाषा,बस खुद से करें हम आशा,स्वयं का रखें पूरा ख्याल,खुद से पूछे खुद का हाल!

Leave a Comment