Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

रघुवीर सहाय पर कविता- सुधीर श्रीवास्तव

 जन्मदिन विशेषरघुवीर सहाय नौ दिसंबर उन्नीस सौ उनतीस लखनऊ में जन्में थे रघुवीर सहाय, उन्नीस सौ इक्यावन में लखनऊ विश्वविद्यालय से …


 जन्मदिन विशेष
रघुवीर सहाय

रघुवीर सहाय पर कविता- सुधीर श्रीवास्तव
नौ दिसंबर उन्नीस सौ उनतीस
लखनऊ में जन्में थे रघुवीर सहाय,
उन्नीस सौ इक्यावन में
लखनऊ विश्वविद्यालय से
अंग्रेज़ी में एम.ए. पास किया।
करने लगे फिर पत्रकारिता
प्रतीक, वाक, कल्पना पत्रिकाओं के
सम्पादक मंडल में जगह मिले,
आकाशवाणी के आल इंडिया रेडियो में
हिंदी समाचार विभाग से संबद्ध रहे।

उन्नीस सौ इकहत्तर से
उन्नीस सौ बयासी तक
ग्यारह वर्ष रघुवीर सहाय जी
दिनमान के संपादक भी रहे,
“दूसरा रुप” से कवि रुप मे
ख्याति पथ पर चमक गये।
अपनी लेखनी से सहाय जी
दृढ़ता से आईना दिखाते थे
भ्रष्टाचार हो या समाज का चित्रण
बखूबी कलम चलाते थे।
मध्यमवर्ग के जीवन चित्रण पर
अद्भुत वो लेखनी चलाते थे,
व्यंग्यात्मक शैली से अपने
आईना भी खूब दिखाते थे।
सांस्कृतिक, राजनीतिक चेतना
कलम से अपने जगाते थे,
समकालीन समाज को वे
शब्दों से जागृतिबोध कराते थे।
सीधी साधी भाषा में वे
मुहावरों का प्रयोग भी करते थे,
भावपूर्ण और व्यंग्यात्मक सृजन
सबको ही खूब लुभाते थे।
साहित्य अकादमी सम्मान से
रघुवीर सहाय जी का सम्मान हुआ,
तीस दिसंबर उन्नीस सौ नब्बे में
इस प्रखर कलम पुरोधा का
गोलोकधाम को गमन हुआ।
हम सबको ऐसा लगता है
जैसे एक युग का अंत हुआ,
पर रघुवीर सहाय जी का नाम
ध्रुव तारे सा अमर हुआ।

👉सुधीर श्रीवास्तव

गोण्डा, उ.प्र.

8115285921

©मौलिक, स्वरचित


Related Posts

कविता– उस दिन ” दशरथ केदारी ” भी मरा था !

September 22, 2022

कविता- उस दिन ” दशरथ केदारी ” भी मरा था !  उस दिन बहुत गहमागहमी थी  जब एक हास्य कलाकार

सोच को संकुचित होने से बचाएं।

September 21, 2022

सोच को संकुचित होने से बचाएं। अपनी सोच को संकुचित ना होने दें,इस अपार समझ को कभी ना खोने दें,असीम

मेरी दर्द ए कहानी

September 19, 2022

मेरी दर्द ए कहानी ना हो कभी किसी की भी मेरी तरह जिंदगानीना हो कभी किसी कीमेरी तरह आंखों में

कविता-सहज़ता में संस्कार उगते हैं

September 17, 2022

कविता-सहज़ता में संस्कार उगते हैं अपने आपको सहज़ता से जोड़ो सहज़ता में संस्कार उगते हैं सौद्राहता प्रेम वात्सल्य पनपता है

कविता-भ्रष्टाचार करके परिवार को पढ़ाया

September 17, 2022

कविता-भ्रष्टाचार करके परिवार को पढ़ाया भ्रष्टाचार करके परिवार को पढ़ाया टेबल के नीचे पैसे लेकर परिवार बढ़ाया कितना भी समेट

कविता-भारतीय संस्कृति में नारी

September 17, 2022

कविता-भारतीय संस्कृति में नारी भारतीय संस्कृति में नारी लक्ष्मी सरस्वती पार्वती की रूप होती हैसमय आने पर मां रणचंडी दुर्गा,

PreviousNext

Leave a Comment