Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Veena_advani

रक्तदान करो | Donate blood

रक्तदान करो Donate blood  लाल रंग कि लाल कणिकाएं तरसेजरूरत मंद के जिस्म में समाने को।।रक्त बूंदे जीवनदायिनी कहलाए  यही …


रक्तदान करो

रक्तदान करो | Donate blood
Donate blood 

लाल रंग कि लाल कणिकाएं तरसे
जरूरत मंद के जिस्म में समाने को।।
रक्त बूंदे जीवनदायिनी कहलाए 

यही समझाएं हम जमाने को।।

तरस रहे कितने मरीज़ों के अपने
अपनों को ही बचाने को
लाल रंग की एक-एक बूंद अपने
मरीजों के लिए पाने को।।

कभी रिश्तेदारों से , तो कभी गैरों
से गुहार कर रहे देखो
अब लगे मुशकिलों में रिश्तों , दोस्तों
को ही आज़माने को।।

मदद् करे कोई मुश्किल मे , कोई नहीं
अपने परायों की परख हुई जमाने को
ना मिले मदद् यदि तो चल पड़ता
एनजीओ को मनाने को।।

प्रकट होते तब कुछ देवदूत धरा पर
रक्तदान को देखो।।
इंसानियत , अपनापन , सेवा , देश
प्रेम का पाठ पढ़ाने को।।

रक्तदान संग सीख भी , देते ये दूजे
व मरीज़ के परिजनों को
गौर से सुनो रक्तदान करो सभी
तुम्हारी जरूरत जमाने को।।

इंसानियत का पाठ पढ़ाने निकले
कुछ जांबाज देश सजाने को।।२।।

About author 

Veena advani

वीना आडवाणी तन्वी
नागपुर , महाराष्ट्र



Related Posts

धन के सँग सम्मान बँटेगा| Dhan ke sang samman batega

November 19, 2022

आजकल परिवार में हो रहे विवाद और आपसी बंटवारें के संदर्भ में सीख देती हुई  मौलिक कविता  धन के सँग

घायल परिंदे| Ghayal Parinde

November 19, 2022

घायल परिंदे मत उड़ इतना मासूम परिंदेसब जगह रह देखें हैं दरिंदेमाना आसमां बड़ा बड़ा हैंलेकिन वहां भी छैक बड़ा

कहानी-अधूरी जिंदगानी (भाग-5)|story Adhuri-kahani

November 19, 2022

कहानी-अधूरी जिंदगानी (भाग-5) आज रीना के घर के पास से गुज़र रही थी , जरूरी काम से जो जाना था

सबके पास उजाले हो| sabke pas ujale ho

November 19, 2022

सबके पास उजाले हो मानवता का संदेश फैलाते,मस्जिद और शिवाले हो ।नीर प्रेम का भरा हो सब में,ऐसे सब के

हास्य कविता-ज़मीन के रिकॉर्ड में घालमेल करवाता हूं

November 19, 2022

हास्य कविता-ज़मीन के रिकॉर्ड में घालमेल करवाता हूं जमीन से शासन को चुना लगाने माहिर हूं शासन या रेल्वे में

व्यंग्य कविता-मेरी ऊपर तक पहुंच है| meri upar tak pahunch hai

November 19, 2022

व्यंग्य कविता-मेरी ऊपर तक पहुंच है अच्छों अच्छों को अपने झांसे में लाता हूं जो सियानें बनते हैं उनको ठगियाता

PreviousNext

Leave a Comment