Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

ये शायर तो….. नहीं

ये शायर तो….. नहीं हम जब भी कोई शायर के बारे में सोचते हैं तो एक कोमल हृदय का नाजुक …


ये शायर तो….. नहीं

ये शायर तो..... नहीं
हम जब भी कोई शायर के बारे में सोचते हैं तो एक कोमल हृदय का नाजुक से तेवर वाला या वाली तस्वीर सामने आती हैं।एक नर्म दिल आदमी जिसके दिल में एक प्यार की शमां जलती हैं जो खुद तो रोशन होती हैं लेकिन औरो को भी रोशन करने का काम करती हैं।वे एक नाजुक मिजाज ,दिलसे साफ, जबां से नम्र होते हैं लेकिन आज क्या देख रहे ये?

क्यों डर लगता हैं जहां वे जन्मे पले हो और जिस जगह ने उनको इतना मान सम्मान दिया हैं।जो इसी राज्य में रहते हुए क्यों तालिबानियों के साथ हमदर्दी दिखाते हैं,और अपने देश के बारे में बदगोई करते हो? क्यों शायराना अंदाज सियासती हो जाते हैं? ऐसे तो बहुत सवाल हैं जिसका जवाब सभी चाहेंगे।जैसे ही चुनाव आया तो सभी गैंग एक्टिव हो गए है क्या?मोमबत्ती गैंग भी कार्यरत हो जाते हैं।कहां कहां सियासत नहीं हो रही? जज्बातों में भी, खयालों में भी,रवायतों में भी,और कहां कहां नहीं हैं।
साहित्य अकादमी से पुरस्कृत होना कोई मायने नहीं हैं? कहां मिला था ये पुरस्कार?इतने सालों से जिस देश में रहने वाले कैसे ऐसा बोल सकता हैं।क्या ये सब बुद्धिमान लोग ही कह सकते हैं?वो लोग जिन्हें दो समय भर पेट खाना नहीं मिलता,समय पर डाक्टर से सारवार नहीं मिलती, जोंपडीयों में रहते हैं उन्हे क्यों ये पाक खयाल नहीं आता कि वे लोग यह सुरक्षित नहीं हैं।ये शगूफे कौन छोड़ रहा हैं।क्या ऐसी राजनीति में अपने देश हित को हानि नहीं पहुंचती हैं,दुनियां में बदनामी के अलावा क्या दे रहे हैं हम।अपनी बेटियों की सियासती राहों को चमकाने के लिए ये हथकंडे आजमां के अशांति का माहौल बना वैमनस्य फैलाने वालों को क्यों हमारे कानून रोक नहीं पा रहे हैं?
ये पहली बार नहीं कई नामी गरामी लोग जिन्हें इस देश में असुरक्षित होने का एहसास हो चुका हैं,यहां तक की संविधानिक स्थान पर रह चुके लोगों को भी देश में सुरक्षा का एहसास नहीं होने की बातें भी सामने आ चुकी हैं।
ये बोलने वाले के बेटे उपर नकली गोलीबार का होना और अपने ही भाई को फंसाना उसकी जायदाद हड़पने के बदईरदों से सभी वाकिफ हैं।एक न्यायप्रिय नेता के होने से un इरादों पर पानी फिर गया ये और बात हैं।और भी कई मामले ऐसे हैं जिसमे असुरक्षा की समस्या नहीं आई सामने लेकिन अब जब चुनाव सामने आएं हैं तो सारे नाटक नौटंकी कर अपने आप को प्रसध्ध करने के ये तरीके लोकतांत्रिक नहीं हैं।अगर अपने जाति बंधुओं का साथ और प्यार पाना हैं तो उन्हें मदद करो,चाहे वह आर्थिक ही क्यों न हो!उनका दुःख दर्द बांटों ,लेकिन नहीं यहां तो घड़ियाली आंसू बहा के उन्हे मिसगाइड करने के अलावा क्यों कोई सोच नहीं आती?
अपने ही घर में असुरक्षित महसूस करना क्या मानसिक दिवालियापन की निशानी नहीं हैं?
उनके अपने ही लिखे के विरुद्ध उनका अपना वर्तन हैं, लिखा हैं–
सियासतें नफरतों के जख्म भरने नहीं देती
जहां भरने पे आता हैं तो मक्खी बैठ जाती।
अजीब खेल हैं दुनियां तेरी सियासत का
मैं पैदलों से पीटा हूं वजीर होते हुए।
क्या ये कथनी और करनी का फर्क हैं? कब समझेंगे ऐसे लोग देशप्रेम की भाषा ,जिस जमीं ने दिया हैं सब कुछ कब उसे कोसना छोड़ेंगे और देश और समाज को स्वस्थ बनाने की और अग्रसर होंगे।

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

वंदे मातरम – देश अपने अगले 25 वर्ष की नई यात्रा शुरू कर रहा है

August 10, 2022

भारतस्वतन्त्रतादिनम् ‘अगस्त’-मासस्य पञ्चदशे (१५/८) दिनाङ्के राष्ट्रियोत्सवत्वेन आभारते आचर्यते  वंदे मातरम – देश अपने अगले 25 वर्ष की नई यात्रा शुरू

हरियाणा का जर्रा-जर्रा आज़ादी के लिए खून से भीगा है

August 10, 2022

 हरियाणा का जर्रा-जर्रा आज़ादी के लिए खून से भीगा है स्वतंत्रता आंदोलन की आग में पूरा हरियाणा जल उठा था।

जीवन की सच्चाई /jeevan ki sacchai

August 10, 2022

 जीवन की सच्चाई  ’ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या’ शास्त्रों ने तो यही बताया हैं कि जगत यानि कि जीवन मिथ्या हैं।जीवन

अमृत महोत्सव के जश्न में, कहाँ खड़े हैं आज हम?

August 10, 2022

 अमृत महोत्सव के जश्न में, कहाँ खड़े हैं आज हम? (विश्व की उदीयमान प्रबल शक्ति के बावजूद भारत अक्सर वैचारिक

जानवरों में तेजी से फैल रही लम्पी स्किन घातक बीमारी

August 8, 2022

 जानवरों में तेजी से फैल रही लम्पी स्किन घातक बीमारी ढेलेदार त्वचा रोग एक वायरल बीमारी है जो मवेशियों और

स्तनपान से हटता ध्यान, हो कैसे अमृत का पान ?

August 8, 2022

स्तनपान से हटता ध्यान, हो कैसे अमृत का पान ? बदलते दौर में नई और आधुनिक माताओं में स्तनपान की

Leave a Comment