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poem, Veena_advani

ये ना समझो पाठकों

अरे ! लोग कहते जख़्मी दिल जिसकावही तो दर्द-ए शायर/शायरा होता है।।ज़ख़्मी दिल रोए उसका ज़ार-ज़ार जबतब कलम का हर …


अरे ! लोग कहते जख़्मी दिल जिसका
वही तो दर्द-ए शायर/शायरा होता है।।
ज़ख़्मी दिल रोए उसका ज़ार-ज़ार जब
तब कलम का हर शब्द धारदार होता है।।

पढ़े जो पाठक उसके हर एक शब्द जब
शब्द महसूस कर दर्द पाठक को होता है
पाठक सोचे शायर/शायरा को दर्द इतना
ना जाने वो ये दर्द कैसे , क्यों सहता है।।

अरे सुनों ! जरूरी नहीं दर्द लिखे जो
वो दिन/रात दर्द में रह कर बहता है।।
लिख दर्द लूटी वाहवाही कभी शायर ने
पाठकों के दिये नाम दर्द-ए शायर को संजोता है।।

जज़्बात में डूबे रूह से जो शायर/शायरा
हर विषय में गोते लगा वो खुश होता है
ये ना समझो लिखे जो जिस विद्या में
वो सिर्फ उसी में पारंगत शायर/शायरा होता है।।

याद रखना शायर/शायरा
श्रृंगार , वीर , दर्द , औजस्व , हास्य रस
हर रस के विषय पर कलम चला खोता है।।
दिन रात शब्दों , जज़्बातों , ख्याली पुलावों में जो खोए
समझो वही तो शायर होता है।।२।।

About author 

Veena advani

वीना आडवाणी तन्वी
नागपुर , महाराष्ट्र



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