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युद्ध के साए में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च 2022

युद्ध के साए में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च 2022 भारत नारी शक्ति को सशक्त करने के लिए पूरी तरह …


युद्ध के साए में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च 2022

युद्ध के साए में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च 2022
भारत नारी शक्ति को सशक्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध तथा संकल्पित है

वर्ष 2022 की थीम – एक स्थाई कल के लिए आज लैंगिक समानता जरूरी – महिलाओं को आर्थिक, राजनैतिक और सामाजिक स्तरपर तात्कालिक सशक्त करना समय की मांग – एड किशन भावनानी

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर आज यूक्रेन-रूस महायुद्ध और तीसरे विश्वयुद्ध, परमाणु महायुद्ध की सब्सुबहट और अंदेशों के बीच युद्ध के साए में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है जो विश्व की महिलाओं के लिए ख़ास है। यह दिवस महिलाओं के लिए प्रति एक श्रद्धा भाव को ही नहीं जगाता बल्कि उस देश के विकास में उनके योगदान को भी बताता है। आज अगर हम महिलाओं की उपलब्धियों और जिस तरह वैश्विक स्तरपर हर देश के हर क्षेत्र में महिलाओं की सक्रियता से भविष्यकालीन आउटपुट का अंदेशा लगाएंगे तो भविष्य महिलाओं के नेतृत्व का है!!! जिसमें भविष्य में महिलाएं ही आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, आध्यात्मिक रक्षा, स्वास्थ्य सहित अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण नेतृत्व और विशाल स्तर पर भागीदारी करेंगी ऐसा मेरा मानना है!!!
साथियों बात अगर हम अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं के लिए सकारात्मक बात करें तो, इस दिवस को महिलाओं की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियों का विश्वव्यापी उत्सव माना जाता है!! आज हमें महिलाओं को पूरी स्वतंत्रता देने की आवश्यकता है, ये उनका जन्मसिद्ध अधिकार है। महिलाओं को भी अपनी पूर्वधारणाओं को बदलने की ज़रुरत है कि वो कमजोर हैं!!! और कोई भी उन्हें धोखा दे सकता है या उनका प्रयोग कर सकता है। इसके बजाय उन्हें ये सोचने की आवश्यकता है कि उनमें पुरुषों से अधिक शक्ति है और वो पुरुषों से बेहतर कर सकती हैं।
साथियों बात अगर हम आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2022 की करें तो इस वर्ष की थीम, एक स्थाई कल के लिए आज लैंगिक समानता जरूरी यह है, इसके लिए हमें महिलाओं को आर्थिक, राजनैतिक, सामाजिक, शैक्षणिक प्रौद्योगिक, वाणिज्यिक स्तरपर महिलाओं को सशक्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध वह संकल्पित होना पड़ेगा खासकर के वर्तमान युद्ध के साए में मना रहे अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर तो महिलाओंकी सुरक्षा का विशेष संकल्प करना जरूरी है!!!
साथियों बात अगर हम भारतीय परिपेक्ष में भारतीय महिलाओं की करें तो आदि अनादि काल से ही भारतीय संस्कृति, सभ्यता में नारी का सम्मान सर्वोपरि है, जो आध्यात्मिकता व कथाओं में हमने नारीशक्ति को मां काली दुर्गा भवानी सरस्वती मां के स्वरूप में उनकी गाथाएं सुननी है।
आज के परिपेक्ष में भारतीय मूल की नारियों की गाथा की करें तो आज उन गौरवशाली, ऐतिहासिक स्थान प्राप्त महिलाओं की करें तो वह नायिकाएं बनकर समाज में बदलाव लेकर आई और आने वाली कई पीढ़ियों के लिए कई रास्ते निकाले हैं!!! उनके बारे में आज इस शुभ,सशक्त, महत्वपूर्ण दिवस पर महिलाओं को ही नहीं पुरुषों को भी रेखांकित करना जरूरी है!!! खासकर महिलाओं को उनके व्यक्तित्व से प्रेरणा लेनी है वे भारत की शान ये हैं मीडिया के अनुसार (1) पठानमथिट्टा (केरल) की रहने वाली फातिमा बीवी 1989 में भारत में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने वाली पहली महिला बनीं थी। वो वर्ष भारतीय अधिकार क्षेत्र की महिलाओं के लिए बेहद सुनेहरा था। वे कानून की पढ़ाई की मदद से देश में पुरुष-प्रधान समाज को तोडना चाहती थी। फातिमा का जन्म 1927 में त्रावणकोर (अब केरल) के तत्कालीन राज्य पथानामथिट्टा में हुआ था, (2) कंगथेई (मणिपुर) – जहां मैरी कॉम का हुआ था जन्म मैंगते चुंगनेइजंग मैरी कॉम, जिन्हें मैरी कॉम के नाम से भी जाना जाता है, दुनिया भर की महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बनी हुई हैं। मैरी कॉम आठ विश्व चैम्पियनशिप पदक जीतने वाले एकमात्र महिला हैं। (3) करनाल (हरियाणा) – कल्पना चावला का जन्मस्थान, अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला कल्पना चावला अपनी मृत्यु के इतने सालों के बाद भी आज भी कई भारतीयों के लिए एक गौरव हैं। (4) नकुरी (उत्तराखंड) – जहां जन्मीं माउंट एवरेस्ट पर पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बछेंद्री पाल -1984 में बछेंद्री पाल माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं थीं। (5) कुमता (कर्नाटक) – जहां भारत की काली मिर्च की रानी चेन्नाभैरदेवी ने यहां 54 वर्षों तक शासन किया था, जो कि किसी भी भारतीय महिला शासक द्वारा सबसे लंबा शासन था। अघनाशिनी नदी के तट पर स्थित मिरजन किला, अपनी खूबसूरत स्थापत्य के लिए जाना जाता है, जो 16वीं और 17वीं शताब्दी में लड़ी गई कई लड़ाइयों का स्थान रहा था। रानी चेन्नाभैरदेवी का राज्य काली मिर्च के लिए जाना जाता था, और पुर्तगालियों ने उन्हें रानी, द पेपर क्वीन की उपाधि भी दी थी। (6) देहरादून (उत्तराखंड) – चंद्रमुखी बसु का जन्मस्थान, भारत की पहली महिला ग्रेजुएट 1860 में जन्मी, चंद्रमुखी बसु देहरादून की रहने वाली वो पहली महिला थी जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के दौरान गेजुएट किया था। उन्होंने 1880 में देहरादून नेटिव क्रिश्चियन स्कूल से आर्ट परीक्षा पास की और और 1884 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ आर्ट्स पास करने वाली पहली महिला भी बनीं।
साथियों बात अगर हम महिलाओं के नेतृत्व की करें तो भारत में महिलाओं ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, जैसे बड़े संवैधानिक पदों पर नेतृत्व की क्षमता का लोहा भारत सहित विश्व को महिला शक्ति और अपने नेतृत्व क्षमता को दिखाया है!!! तो चपरासी, पटवारी से लेकर उच्च प्रशासनिक अधिकारी पदों पर भी आज महिलाओं का कुछल प्रशासन और पकड़ है उसी तरह खेल, स्वास्थ्य, शिक्षा क्षेत्र में भी आज महिलाओं का अच्छा खासा कुछल नेतृत्व और उपलब्धियों का अंबार हैं। राजनीतिक सहित हर क्षेत्र में महिलाओं का आरक्षण हो चुका है बस!!! अब , ज़रूरत है महिलाओं को कुशलता, बौद्धिक प्रज्योक्ता, क्षमता, सफलता और पुरुषों से आगे बढ़ती उपलब्धियों को देखते हुए हर क्षेत्र, बौद्धिक प्रज्योकता तथा सफलता और पुरुषों से आगे बढ़ती उपलब्धियों को देखते हुए हर क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त कर 50 फ़ीसदी से अधिक स्थिति में उनको हर क्षेत्र में स्थापित किया जाए ताकि उनकी उपलब्धियों का लाभ भारत को मिल सके और हमारे विज़न 2047, विज़न 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था, नया भारत सहित भारत से नवभारत बनने की गाथा!!!को अतिशीघ्र पूरा किया जा सके।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि युद्ध के साए में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च 2022 मनाया जा रहा है!!! भारत नारी शक्ति को सशक्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध तथा संकल्पित है तथा इस वर्ष की थींम एक स्थाई कल के लिए आज लैंगिक समानता जरूरी है यह हैं एवं महिलाओं को आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक स्तरपर तात्कालिक सशक्त करने की ज़रूरत है।

-संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


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