Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

यही कुछ फर्क है!- डॉ. माध्वी बोरसे!

यही कुछ फर्क है! जब नहीं था हमारे पास अलार्म, स्वयं से याद रखते थे सारे काम,ना था मोबाइल फोन …


यही कुछ फर्क है!

यही कुछ फर्क है!- डॉ. माध्वी बोरसे!
जब नहीं था हमारे पास अलार्म,

स्वयं से याद रखते थे सारे काम,
ना था मोबाइल फोन और व्हाट्सएप,
मिलते थे अपनों से, सुबह, शाम!

अनजानो से हालचाल पूछते हैं फेसबुक पर,
नहीं पता क्या हो रहा है, स्वयं के घर,
अपनों के लिए बिल्कुल समय नहीं,
नई पीढ़ी में आया कैसा असर!

बारिश की बूंदे और ठंडी हवा को छोड़,
ना सूरज की किरणें ना ही भागदौड़,
प्रकृति को महसूस करने की क्षमता हो गई कम,
यह जीवन का हे कौन सा मोड़!

गर्मी में ए.सी, ठंड में हीटर,
गर्मी में फ्रिज तो ठंड में गीजर,
शारीरिक शक्ति हो गई कम,
ना चल पाए हम दो-चार किलोमीटर!

देखें पूरी दुनिया को यूट्यूब मैं,
पढ़ाई करें मोबाइल के ई बुक में,
आंखों मैं कमजोरपन, सर्वाइकल और डिप्रेशन,
शरीर से नहीं ताकतवर पर दिमाग खूब है!

मानसिक रूप से लेते जाए ज्ञान,
पर भूले ना शरीर का रखना ध्यान,
जीवन में लेकर आए संतुलन ,
ना होते जाए सत्य से अनजान!!

डॉ. माध्वी बोरसे!
( स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

कविता – न मिला

September 1, 2022

कविता – न मिला एक उम्र खरच कर कुछ न मिलातुमको क्या पता सचमुच न मिलाक्या हुआ है कोई धरती

कविता – बे-परवाह जमाना

September 1, 2022

कविता – बे-परवाह जमाना ये मन अक्सर बुनता रहता है ,ख्वाबों का ताना बाना ।दिल भी अक्सर छेड़े रहता है

कविता – नयन

September 1, 2022

कविता – नयन दोनों नयन सावन बनकररिमझिम – रिमझिम बरसात करेंसमझ तनिक आता ही नहींके कितने हैं जज़्बात भरे मौन

कविता -शहर चलाता है

September 1, 2022

रिक्शा, ऑटोरिक्शा, इलेट्रिक रिक्शा चलाने वाले भाईयों को समर्पित रचना कविता -शहर चलाता है जो बिना थके सारा शहर चलाता

कविता – शिव और सावन

September 1, 2022

कविता – शिव और सावन सावन शिव हुए अवतरित धरती परसावन में निज ससुराल गएहुआ अर्घ्य और जलाभिषेक से स्वागत

सावन की बौछार

September 1, 2022

 सावन की बौछार सावन की बौछार यारतन – मन को भिगाती हैमस्त फुहारें इस सावन कीयाद किसी की दिलाती है

PreviousNext

Leave a Comment