Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Veerendra Jain

मैं मणिपुर हूं | main Manipur hun kavita

मैं मणिपुर हूं सुन सको तो सुनो, दिल को मजबूत कर, दास्तां अपने ग़म की बताता हूं मैं,मैं मणिपुर हूं, …


मैं मणिपुर हूं

मैं मणिपुर हूं | main Manipur hun kavita

सुन सको तो सुनो, दिल को मजबूत कर, दास्तां अपने ग़म की बताता हूं मैं,
मैं मणिपुर हूं, इन दिनों में मुझपे क्या बीती हरेक गाथा सुनाता हूं मैं!!

दौर था एक जब मैं खुशहाल था, इन पहाड़ों पर सब्ज़ बागान थे,
भारी मन से खड़े हैं स्तब्ध से, वो पहाड़ अब वहां बेजान से,
दर्द इनसे भी ऊंचा सहता हूं और आंसू हजारों बहाता हूं मैं,
मैं मणिपुर हूं, इन दिनों में मुझपे क्या बीती हरेक गाथा सुनाता हूं मैं!!

देश महावीर गांधी की अहिंसा का ये, आज देखो भला कितना है गिर गया,
मैं अकेला जला ना मेरे साथ में देश का स्वर्णिम इतिहास भी जल गया,
लपटें नफरत की उठती धरा से मेरी, रो रोकर आंसुओं से बुझाता हूं मैं,
मैं मणिपुर हूं, इन दिनों में मुझपे क्या बीती हरेक गाथा सुनाता हूं मैं!!

भाई बनकर जो रहते थे कल तलक, ज़हर उनके दिलों में है घोला गया,
स्वार्थ और सत्ता की खातिर इन्हें ज़्यादा कम के तराजू में तोला गया,
अपनी धरती पे बहता लहू देखकर मन ही मन छटपटाता हूं मैं,
मैं मणिपुर हूं, इन दिनों में मुझपे क्या बीती हरेक गाथा सुनाता हूं मैं!!

सड़कों और चौराहों पे निर्वस्त्र कर, मेरी अस्मत को लूटा घुमाया गया,
वादा जिनको पढ़ाने बढ़ाने का था, जिस्म उनका भीड़ से नुचाया गया,
देखता बस रहा मौन होकर खड़ा, कितना बेबस अपने को पाता हूं मैं,
मैं मणिपुर हूं, इन दिनों में मुझपे क्या बीती हरेक गाथा सुनाता हूं मैं!!

तुमपे विश्वास कर खुद को सौंपा तुम्हें सोचा था मेरे संकट मिटाओगे तुम,
आहें भरकर पुकारूंगा जब कभी, मुझ तलक दौड़े दौड़े चले आओगे तुम,
सत्ताधीशों को भारत के धिक्कार है, तुम्हारी खामोशी का बोझ उठाता हूं मैं,
मैं मणिपुर हूं, इन दिनों में मुझपे क्या बीती हरेक गाथा सुनाता हूं मैं!!

देख मुझको सुलगता क्या शर्मिंदगी एक पल को भी महसूस होती नहीं,
औरतों पे हुए अत्याचारों से भी आंखें दो आंसू संवेदना के रोती नहीं,
महाभारत की तरह अहंकार की, सत्ता ढह जाएगी अभिशाप दोहराता हूं मैं,
मैं मणिपुर हूं, इन दिनों में मुझपे क्या बीती हरेक गाथा सुनाता हूं मैं!!

About author 

Veerendra Jain, Nagpur
Veerendra Jain, Nagpur 
Veerendra Jain, Nagpur
Instagram id : v_jain13

Related Posts

ऐ नदी ऐ नदी- चन्दा नीता रावत

December 15, 2021

ऐ नदी ऐ नदी ऐ नदी ऐ नदीकल कल करती बहती है किनारो पर तुम्हारे जिन्दगी बसा करती हैविशाल रूप

प्रकृति की गोदी- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 15, 2021

प्रकृति की गोदी ध्यान साधना वरदान प्रकृति की,हम शोध खोज न कर पाते हैं ,पूर्ण प्रकृति हमारी ध्यान मग्न है

एक समय था – अनीता शर्मा

December 15, 2021

एक समय था एक समय था–जब साथ सभी रहते थे। चाचा चाचाजी और बच्चे–ताऊ ताई और बच्चे। कितना बड़ा परिवार

अगले जनम मोहे नारी ही कीजो – डॉ. माध्वी बोरसे

December 13, 2021

अगले जनम मोहे नारी ही कीजो! अगले जनम मोहे नारी ही कीजो,दोबारा मेरे माता-पिता को, प्यारी सी बिटिया ही दीजो,फिर

ना होता मासिक धर्म, ना होता तेरा जनम- डॉ. माध्वी बोरसे

December 13, 2021

ना होता मासिक धर्म, ना होता तेरा जनम! कुदरत से दी गई चीजें, कभी खराब नहीं होती, अगर मासिक धर्म

श्रद्धांजलि-नंदिनी लहेजा

December 10, 2021

श्रद्धांजलि नम हैं हिंदुस्तान आज , जो खोया वीर सपूत।जीवन साथी संग उनके,जाबांज़ वीर भी, क्षति हुई अभूत।इक ज़लज़ला आया

Leave a Comment