Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Veena_advani

मेरे घर कि चौखट आज भी खुली

 मेरे घर कि चौखट आज भी खुली कभी तो तुम्हें भी मेरी याद आती ही होगी कभी तो मेरी याद …


 मेरे घर कि चौखट आज भी खुली

मेरे घर कि चौखट आज भी खुली

कभी तो तुम्हें भी मेरी याद आती ही होगी

कभी तो मेरी याद में आंसू बहाती ही होगी।

जब कभी तुम  कहीं अकेले बैठती  होगी

याद  कर मेरी यादें उन्हें सजाती ही होगी।।

गैर नहीं था मैं तो कोई  , सुन मेरी जिंदगानी 

अपनी जिंदगी में ,  मेरी कमी कभी रुलाती ही होगी।।

चाहत मेरी तो रूह से थी सुन मेरे हमनवां

कभी मेरी चाहत कि यादें भी तुम्हें  तड़पाती ही होगी।।

मेरी सांसों से तेरी सांसों के बंधन मिले थे इसकदर

आज भी मेरी सांसों कि महक तुझे आती ही होगी।।

तोड़के तुम गयी थी हर एक बंधन मुझसे दिलरुबा

कभी तो तुम दिलरुबा बंधन तोड़ पछताती ही होगी।।

कच्चे नहीं थे मेरे बंधन के धागे , रुह से बंधें हैं ये

मेरे घर कि चौखट आज भी खुली 

 यही तुम्हें मेरी यादें समझाती ही होगी।।

वीना आडवाणी तन्वी

नागपुर, महाराष्ट्र


Related Posts

पधारो म्हारो राजस्थान-डॉ. माध्वी बोरसे!

January 7, 2022

पधारो म्हारो राजस्थान! जीवंत संस्कृति, रेतीली मरुस्थलीय भूमि,  ऊंट पर बैठकर सवारी,  जब ये यादे मानस पटल पर आती,रखता है

मसूरी-जन्नत सा शहर-डॉ. माध्वी बोरसे!

January 7, 2022

मसूरी-जन्नत सा शहर! मसूरी भारत देश के उत्तराखंड राज्य का एक पर्वतीय नगर, बहुत सुहावने मौसम का अनुभव देती है

चाह-तेज देवांगन

January 7, 2022

शीर्षक – चाह हम जीत की चाह लिए,गिरते, उठते पनाह लिए,निकल पड़े है, जीत की राह में,चाहे कंटक, सूल, खार

हे नववर्ष!-आशीष तिवारी निर्मल

January 6, 2022

हे नववर्ष! तुम भी दगा न करना आओ हे नववर्ष!तुम हमसे कोई दग़ा न करना बीते जैसे साल पुराने वैसी

लाऊं तो कैसे और कहां से-जयश्री बिरमी

January 6, 2022

लाऊं तो कैसे और कहां से कहां से लाऊ वो उत्साह जो हर साल आता थाकहां से लाऊं वह जोश

बहरूपिया-जयश्री बिरमी

January 6, 2022

बहरूपिया जब हम छोटे थे तो याद आता हैं कि एक व्यक्ति आता था जो रोज ही नया रूप बना

Leave a Comment