Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel
Mera gaon kavita

poem, Ramdheraj

मेरा गाँव कविता| mera gaon kavita written by ramdheraj

यह मेरा गाँव कविता गांव के जीवन को बहुत अच्छी से दिखाती है । तथा गांव में बिताए गए पलों को याद दिलाती है । आज हम शहरो की तरफ भाग आए है लेकिन हमारा बचपन अभी भी उन गांवो में ही कैद है ।


मेरा गाँव–कविता |hindi poem on village

यह मेरा गाँव कविता गांव के जीवन को बहुत अच्छी से दिखाती है । तथा गांव में बिताए गए पलों को याद दिलाती है । आज हम शहरो की तरफ भाग आए है लेकिन हमारा बचपन अभी भी उन गांवो में ही कैद है ।

kavita- Mera gaon |मेरा गाँव कविता|mera gaon by ramdheraj
मेरा गाँव कविता| mera gaon kavita written by ramdheraj

जामुन वो महुआ वो पीपल पुराना।
गजब याद आता है गुजरा जमाना।
लड़ना-झगड़ना घड़ी दो घड़ी थी।
अपना-पराया है किसको पड़ी थी।
हँसने में जीना था रोने में गाना।
मेरे गाँव का था यही बस तराना।।

कभी सियरपैंती कभी हाॅकी डंडा।
कभी कंचा-गोली कभी गुल्ली- डंडा।
खाने की सुध थी न पानी की चर्चा।
वही कंचा-गोली वही एक चर्चा।
हार जीत का था भला क्या ठिकाना।
कभी हार जाना कभी जीत जाना।

बारिश की पानी में नदिया में जाना।
किनारे से होकर छलांगे लगाना।
बाहर से भीतर में डुबकी लगाना
कभी हाथ के बल कभी पेट के बल।
कभी हाथ सीपी कभी हाथ घोंघा।
कभी हाथ आना कभी हाथ जाना।

घर पर पहुँचकर के पट्टी पढाना।
कहीं न गया था यहीं था ठिकाना।
छिपाने पर छिपती कहाँ थी सचाई।
दोबारा न जाने में ही थी भलाई।
रोजमर्रा का जीवन यही था रे प्यारे।
बचपन का संगम यही था रे प्यारे।।

About author

रामधीरज जी काशी हिन्दू विश्वविद्यालय

रामधीरज जी काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में एम ए हिन्दी के छात्र है ।
Search tag :hindi poem on village,village poem in hindi, mera gaon poem in hindi,
mera gaon poem in hindi, मेरा गाँव कविता, mera gaon kavita written by ramdheraj.

Related Posts

सुनियोजित अभियान- जितेंद्र कबीर

November 23, 2021

 सुनियोजित अभियान एक आठवीं फेल नौजवान  इतिहास के एक अध्यापक से बहस के दौरान देकर पूरे इतिहास को झूठा और

बड़े चालाक हो मेरे प्रभु – सिद्धार्थ गोरखपुरी

November 23, 2021

 बड़े चालाक हो मेरे प्रभु  बड़े चालाक हो मेरे प्रभु हर गुत्थी सुलझाए रखते हो। बस हमे ही जीवन मृत्यु

मिलन – अनीता शर्मा

November 23, 2021

 मिलन हो रहा है मधुर मिलनसुदूर गगन धरा का यूँगोधूली की क्षितिज बेला में। गवाह चाँद सितारे हैंगगन ने झुक

कविता- माई से- सिद्धार्थ गोरखपुरी

November 23, 2021

 कविता- माई से हम कितने क़ाबिल है ये कमाई तय करती है। हम हमेशा से क़ाबिल हैं ये बस माई

सफर – अनीता शर्मा

November 23, 2021

 सफर जिंदगी में चुनौतियां बहुत है मगर….. डगर मुश्किल भरी है। सफर तो चुनौतियों भरा है मगर…… बढ़ते जाना बाधाओं

प्रेम हमेशा रहेगा- जितेन्द्र ‘कबीर’

November 23, 2021

 प्रेम हमेशा रहेगा मजबूरियां सांसारिक हैं हमारीख़त्म हो जाएंगी देह के साथ ही,लेकिन प्रेम अमर है आत्मा की तरहरहेगा तब

Leave a Comment