Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr-indu-kumari, poem

मेघा रे

 मेघा रे डॉ. इन्दु कुमारी  मेघा रे कहां तक तुझे जाना रे  मेरे संदेश को ले जाना रे   जिन राहों …


 मेघा रे

डॉ. इन्दु कुमारी
डॉ. इन्दु कुमारी

 मेघा रे कहां तक तुझे जाना रे

 मेरे संदेश को ले जाना रे 

 जिन राहों से गुजरो गे

 वही पिया का डेरा रे 

गरज गरज उन्हें ना बुलाना 

प्यार से संदेशा पहुंचाना रे 

मेघा रे कहां तक तुझे जाना रे।

 हिम पर्वत के नीचे 

जंगलों के बीचो बीच

होकर जब जाओगे 

वही है हुनकर ठिकाना रे 

पाती प्रेम की पहुंचाना रे

 प्यार से फुहार बरसाना रे 

मेघा रे कहां तक तुझे जाना रे।

 मेघा रे अपनी जलवा 

ना दिखाना रे 

हमारी संदेशा पहुंचाना रे 

अपने नगाड़े की आवाज से 

ना डराना रे धमकाना रे 

वह तो बड़े कोमल है 

बांसुरी बन जाना रे 

मेरी संदेशा को पहुंचाना रे 

मेघा रे कहां तक तुझे जाना रे।

डॉ. इन्दु कुमारी 

             मधेपुरा बिहार


Related Posts

कविता-प्रशासनिक स्तरों पर जवाबदेही ज़रूरी

April 30, 2022

कविता-प्रशासनिक स्तरों पर जवाबदेही ज़रूरी हर प्रशासकीय पद की ज़वाबदेही व्यवहारिक रूप से ज़रूरी है कागजों में दर्ज ज़वाबदेही को

प्रेम की महक आ गई-कविता

April 30, 2022

नन्हीं कड़ी में…. आज की बात प्रेम की महक आ गई महफिलों की चाहत थी,तन्हाई वो निभा गई, साथ था

जीवन तथ्य!

April 27, 2022

जीवन तथ्य! बिखरने के बाद भीनिखरना एक अदा है,बिछड़ने के बाद भी,हम स्वयं के सदा हैं! खुशी हो या गम,जीना

वाह क्या किस्मत पाई है!

April 27, 2022

 वाह क्या किस्मत पाई है! रात रात भर जाग के, की उसने मेहनत ,  जीते बहुत से पुरस्कार और परिश्रम

कविता आज़ाद

April 27, 2022

 आजाद! आजाद विचार, आजाद ख्याल, आजादी से जी ले हर एक साल, आजाद सी दुनिया, आजाद सी ढाल, आजाद हो

पीछे छूटा! -कविता

April 27, 2022

पीछे छूटा! -कविता मुड़ कर ना देखो, जो पीछे छूट गया,आगे बढ़कर लिखो,अपना भविष्य नया! कुछ छुटने का क्या पछतावा,सब

PreviousNext

Leave a Comment