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मेंढक बाहर निकल रहे है

“मेंढक बाहर निकल रहे है” जिस तरह छह महीने मिट्टी में दबे रहने वाले मेंढक बारिश के आते ही, बरसात …


“मेंढक बाहर निकल रहे है”

मेंढक बाहर निकल रहे है

जिस तरह छह महीने मिट्टी में दबे रहने वाले मेंढक बारिश के आते ही, बरसात का मजा लेने बाहर निकलते है। वैसे ही चुनाव नज़दीक आते ही विपक्षी नेताएँ भी अपने बील से बाहर निकल रहे है। जैसे अरविंद केजरीवाल, “आजकल गुजरात की बैठक हासिल करने के ख़्वाब आँखों में भरकर आजकल दिल्ली में कम गुजरात में ज़्यादा दिखाई दे रहे है। अपने दिमाग को झकझोर कर, झूठ का पिटारा खोलकर मौजूदा सरकार को जितना हो सके नीचा दिखाकर अपनी धूमिल छवि को साफ़ करने के हर दाव पैच आज़मा रहे है। दो गुजरातियों का सामना करते थके नहीं, की गुजरातियों से भिड़ने की ठानी है।

दिल्ली और पंजाब में कौनसे झंडे गाड़ लिए है जो अब गुजरात की किस्मत सँवारने निकले है। गुजरात भाजपा का गढ़ माना जाता है, मोदी जी की कर्मभूमि मानी जाती है। वहाँ केजरीवाल आम इंसानों से लेकर किसानों और बिज़नेसमेनों को मुफ़्त की लाॅलीपोप पकड़ाकर गुजरातियों को अपनी तरफ़ करने की भरसक कोशिश कर रहे है। पर वो ये नहीं जानते गुजरात की प्रजा कर्मवीर है, मुफ़्त की खाना खून में नहीं। गुजरात में दान देने की महिमा है, लेने की नहीं। भाजपा सरकार ने गुजरात को पावरफूल बनाया है। विकास गुजरात में अग्रसर रहा है। शायद ही कोई ओर राज्यों ने इतनी तरक्की की हो। अपने प्रचार, प्रसार के लिए सरकारी कर्मचारियों को भरमाने की हरकत पर केजरीवाल के ख़िलाफ़ कुछ सरकारी कर्मचारियों ने चुनाव आयोग को खत लिखा था की, आम आदमी पार्टी की सदस्यता रद्द कर दी जाए। चिट्ठी में लिखा गया है कि 3 सितंबर को राजकोट में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अरविंद केजरीवाल ने लगातार ज़ोर देकर कहा था कि गुजरात के सरकारी कर्मचारी ‘आप‘ की जीत के लिए काम करें। उनकी ओर से ऑटो वाले, आंगनवाड़ी कर्मचारी से लेकर पोलिंग बूथ अफसरों तक की मदद मांगी गई थी। अपने स्वार्थ के लिए और कुर्सी बचाने के चक्कर में नेताएँ इतने गिर जाते है की, साफ़ नज़र आता है इनके बहलाने वाले भाषणों के बीच छुपा झूठ। जो चीज़ें नामुमकिन है, और देश को बर्बाद करने वाली है उसकी लालच देते वक्त चुनाव प्रचार करने वाले नेताओं के कान के उपर जू तक नहीं रेंगती।
उसी तरह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी आजकल भारत जोड़ो पदयात्रा का दिखावा करते, “अपनी पार्टी बचाने के चक्कर में घूम रहे है” अगर भारत को जोड़ने की नीयत होती तो एक खास कोम के तलवे चाटकर वोट-बैंक की राजनीति न खेलते। आज हिन्दु मुसलमान के दिमाग में जो एक दूसरे के प्रति वैमनस्य फैला है, वो कांग्रेस की ही देन है। कांग्रेस ने हंमेशा मुसलमानों का सहारा लेते आतंकवाद को पोषा। न कश्मीर समस्या उकेलने की कोशिश की, न पाकिस्तान को काबू में किया। हिन्दुत्व नाम का तत्व ही उड़ा दिया। अब जब पार्टी डूबने की कगार पर पड़ी है तब जनता से जुड़ने निकले है।
विपक्ष की एक भी पार्टी में एक भी नेता इतना काबिल नहीं, सक्षम नहीं जिसके हाथों में देश की बागडोर सौंपकर जनता निश्चिंत हो सकती है। न केजरीवाल में दम है न राहुल गांधी में जो 135 करोड़ की आबादी वाले देश को बखूबी संभाल सकें। मोदी सरकार ने देश-विदेश में भारत को सम्मानित किया है। पहले विश्व के नक्शे में भारत औंधे मुँह पड़ा था कोई नोटिस तक नहीं करता था। आज अमेरिका और रशिया जैसे देशों की नज़र में भारत उपर उठ चुका है। तो क्यूँ न मौजूद मजबूत सरकार को एक ओर मौका देकर देश की नींव को हर पहलू से मजबूत किया जाए।

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bhawna thaker

(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु

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