Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

मृत्यु कविता-नंदिनी लहेजा

मृत्यु क्यों भागता हैं इंसान तू मुझसे इक अटल सत्य हूँ मैंजीवन का सफर जहाँ ख़त्म है होतावह मंजिल मृत्यु …


मृत्यु

मृत्यु कविता-नंदिनी लहेजा
क्यों भागता हैं इंसान तू मुझसे

इक अटल सत्य हूँ मैं
जीवन का सफर जहाँ ख़त्म है होता
वह मंजिल मृत्यु हूँ मैं
मेरी इक गुजारिश है तुमसे,
केवल डर से मेरे,जीवन जीना मत छोड़ना
जीवन तो देन है, ईश्वर की आनंद से तुझे इसे है जीना
कर्म करना धर्म है तेरे जीवन का बन्दे
बस उनको रखना है नेक सदा तुझको
क्योंकि इक दिन जो होगी मुलाक़ात तुझसे मेरी,
कोई डर या घबराहट न सताएगी तुमको

नंदिनी लहेजा
रायपुर(छत्तीसगढ़


Related Posts

क्यों एक ही दिन मां के लिए

May 8, 2022

क्यों एक ही दिन मां के लिए मोहताज नहीं मां तुम एक खास दिन कीतुम इतनी खास हो कि शायद

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास

May 8, 2022

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास  मां शब्द का विश्लेषण शायद कोई कभी नहीं कर पाऐगा, यह दो

मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं

May 7, 2022

“मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं” जिस कोख में नौ महीने रेंगते मैं शून्य

माँ तेरे इस प्यार को

May 7, 2022

माँ तेरे इस प्यार को तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास ।सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो

बीते किस्से

May 7, 2022

बीते किस्से अपनी जिंदगी के कुछ नायाब किस्से मैं सुनाती हूंलोग कहते मुझे पागल , मैं तो कलम कि दीवानी

कविता-दर्द ने दस्तक दी

May 6, 2022

दर्द ने दस्तक दी आज फिर दर्द ने मेरे दिल पर दस्तक दे दी हमें यू ना रुलाओ… 2मैं इस

PreviousNext

Leave a Comment