मुबारक हो नया साल
ज़िंदगी ये खस्ताहाल मुबारक हो।
फ़िर वही जी जंजाल मुबारक हो।
दिनोरात अच्छे खयाल मुबारक हो।
मुफलिसी और मलाल मुबारक हो।
कमाई हराम और हलाल मुबारक हो ।
ज्म्हुरियत के लिए सवाल मुबारक हो।
दोस्तों कुदरत का कमाल मुबारक हो।
मुबारक हो नया साल लो फ़िर से नया साल मुबारक हो ज़िंदगी ये खस्ताहाल मुबारक हो। बस चंद रोज की …
ज़िंदगी ये खस्ताहाल मुबारक हो।
July 23, 2021
जितेंद्र कबीर की कविताएँ इंसान को इंसान से तो मिलाया होशो-हवास में अक्सर दूसरे धर्म के लोगों के खिलाफ नफरत
July 23, 2021
मेरी अभिलाषा मेरे मन की यह अभिलाषा पूरी हो जन जन की आषा, मिटे गरीबी और निराशा संस्कार बन जाये
July 23, 2021
यादों का सहारा अपराधी मैं तेरा हूं , सजा चाहे जो भी दो, नहीं शिकवा नहीं गिला, आंशू तो हमारे
July 23, 2021
तुम मेरे हो कहाँ खो गये गिरधारी। मोर मुकुट,बंसीवाले। ग्वाले ,गोपियाँ सब रीझे, पर….तुम मेरे हो गिरधारी। कब से बाँट
July 23, 2021
गंगा तू कितनी निर्मल है,तू कितनी पावन है। अमृत की धारा है,कि पुण्य फल दाता है। कितनो के माँ पाप
July 23, 2021
बेशुमार प्यार तुम को हम बतलाये कैसे, बेशुमार प्यार हम करते हैं। तुम बिन जीवन जीने का, स्वप्न में