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मिशन वात्सल्य /mission vatsalya

 मिशन वात्सल्य /mission vatsalya  भारत के हर बच्चे के लिए हमें स्वस्थ खुशहाल बचपन सुनिश्चित करना, संवेदनशील समर्थनकारी और समकालीन …


 मिशन वात्सल्य /mission vatsalya 

मिशन वात्सल्य /mission vatsalya

भारत के हर बच्चे के लिए हमें स्वस्थ खुशहाल बचपन सुनिश्चित करना, संवेदनशील समर्थनकारी और समकालीन इको व्यवस्था स्थापित करना होगा 

बच्चे ईश्वर अल्लाह का रूप है – बच्चों संबंधी कानूनों, नीतियों, संस्थागत गैरसंस्थागत सेवाओं में योजनाबद्ध तरीके से समन्वय स्थापित करना समय की मांग – एड किशन भावनानी

गोंदिया – वर्ष 1968 में रिलीज हुई दो कलियां फिल्म में साहिर लुधियानवी द्वारा लिखा गीत, बच्चे मन के सच्चे,सारे जग के आंख के तारे, ये वो नन्हे फूल है जो भगवान को लगते प्यारे!! सभी को, खासकर युवाओं को सुनकर रेखांकित करना जरूरी है कि बच्चों को वात्सल्य, प्यार देखभाल सहित भारत के हर बच्चे के लिए हमें स्वस्थ खुशहाल बचपन सुनिश्चित करना संवेदनशील समर्थनकारी और समकालीन की कोशिश व्यवस्था स्थापित करना होगा क्योंकि बच्चे ईश्वर अल्लाह का रूप ही नहीं हमारे देश का भविष्य भी हैं इसलिए ही केंद्रीय वित्तमंत्री ने बजट 2022 में मिशन वात्सल्य को आगे बढ़ाने की बात की थी तथा अभी 5 जुलाई 2022 को महिला बाल कल्याण मंत्रालय द्वारा अपने 78 पृष्ठों का मिशन वात्सल्य का दिशानिर्देश जारी किए हैं जो एक अप्रैल 2022 से लागू रहेंगे इसलिए आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से बच्चों उनके संबंधित कानूनोंअंतरराष्ट्रीय संधियों और मिशन वात्सल्य पर चर्चा करेंगे। 

साथियों बात अगर हम मिशन वात्सल्य कीकरें तो पीआईबी के अनुसार, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बच्चों के कल्याण एवं पुनर्वास के लिए 2009-10 से एक केन्द्र प्रायोजित योजना मिशन वात्सल्य यानें बाल संरक्षण सेवा योजना शुरू की है। मिशन वात्सल्य का लक्ष्य भारत के हर बच्चे के लिए एक स्वस्थ एवं खुशहाल बचपन सुनिश्चित करना, उन्हें अपनी पूर्ण क्षमता का पता लगाने के लिए अवसर प्रदान करना, हर क्षेत्र में विकास के लिए सहायता प्रदान करना, उनके लिए ऐसी संवेदनशील, समर्थनकारी और समकालिक इको-व्यवस्था स्थापित करना है जिसमें उनका पूर्ण विकास हो। 

साथियों इसके साथ ही राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को किशोर न्याय कानून 2015 के अनुरूप सुविधाएं मुहैया कराने तथा सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करना था। मिशन वात्सल्य अंतिम उपाय के रूप में बच्चों के संस्थागतकरण के सिद्धांत के आधार पर कठिन परिस्थितियों में बच्चों की परिवार आधारित गैर-संस्थागत देखभाल को बढ़ावा देता है। पिछले साल स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा मिशन वात्सल्य शुरू किया गया था। मिशन वात्सल्य को वात्सल्य मैत्री अमृत कोष के नाम से भी जाना जाता है। जैसा कि इस मिशन का नाम दर्शाता है,ये एक दूरदर्शी प्रयास है जिसके माध्यम से स्तनपान को बढ़ावा देने और शिशु मृत्यु दर को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। इस साल हुई बजट घोषणा में ये साझा हुआ था कि केंद्र सरकार मिशन वात्सल्य को आगे ले जाएगी और शिशुओं और माताओं के लाभ में प्रयत्नशील रहेगी। महिला और बाल विकास मंत्रालय ने भी अपनी मुख्य योजनाओं को तीन पार्ट में बांटा है। इसमें उन्होंने सभी महत्वपूर्ण योजनाओं को मिशन पोषण 2.0, मिशन शक्ति और मिशन वात्सल्य नामक तीन वर्गों में विभाजित किया है। इसका तात्पर्य ये है कि महिला और बाल विकास मंत्रालय की तीन अंब्रेला स्कीम्स में से मिशन वात्सल्य भी एक स्कीम है। 

मिशन वात्सल्य के मुख्य कार्यों में संवैधानिक निकायों के कामकाज में सुधार लाना, सेवा प्रदान करने के ढांचे को मजबूत बनाना, संस्थागत देखभाल और सेवाओं के स्तरमें वृद्धि करना,गैरसंस्थागत समुदाय आधारित देखभाल को प्रोत्साहित करना, आपात स्थिति में पहुंच उपलब्ध कराना,प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण शामिल हैं। मंत्रालयने मिशन वात्सल्य योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं और राज्यों तथा केन्द्रशासित प्रदेशों के प्रशासनों से वर्ष 2022-23 के लिए इस संबंध में वित्तीय नियम दिशा-निर्देश के आधार पर अपने वित्तीय प्रस्ताव और योजनाएं तैयार करने को कहा है। मिशन वात्सल्य योजना के नियम एक अप्रैल 2022 से लागू होंगे। 

सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों ने अपने यहां इस योजना को लागू करने के लिए मंत्रालय के साथ समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। मिशन वात्सल्य को केन्द्र द्वारा प्रायोजित योजना के तौर पर केन्द्र तथा राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों की सरकारों के बीच निर्धारित लागत बंटवारा अनुपात के अनुरूप लागू किया जाएगा। 

साथियों बात अगर हम भारत में बच्चों संबंधी कानूनों नियमों अन्तर्राष्ट्रीय संधियों की करें तो बच्चों के कल्याण में इसे कानून, नीति एवं कानून द्वारा पूरा किया जाने की परिकल्पना की गई है। अन्य मंत्रालयों के साथ समन्वय के साथ योजनाबद्ध हस्तक्षेप औरसंगठन। राष्ट्रीय बाल नीति, (2013 में संशोधित) और राष्ट्रीय बच्चों के लिए कार्रवाई की योजना, 2016 ने बाल कल्याण के लिए नीति ढांचा निर्धारित किया और सुरक्षा। भारतीय संसद ने इसके पक्षमें अनेक ऐतिहासिक कानून पारित किए हैं। बच्चों की तरह किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम 2015,यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा अधिनियम 2012 सुरक्षा आयोग। बाल अधिकार अधिनियम, 2005, बाल विवाह अधिनियम, 2006 का निषेध और अधिकार शिक्षा अधिनियम 2009भारतमहत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संधियों का एक हस्ताक्षरकर्ता भी है।संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकारसम्मेलन और गोद लेने पर हेग सम्मेलन। बच्चों का प्रणालीगत विकास और बाल न्याय को मजबूत बनाना आवश्यक है। 

साथियों बात अगर हम मिशन वात्सल्य के उद्देश्यों की करें तो, मिशन वत्सल्य के प्रमुख उद्देश्य हैं,केंद्रीयता रखते हुए प्रशासन की योजना में बच्चों को प्राथमिकता देना।मिशन के तहत किए गए सभी गतिविधियों और कार्यों के दौरान परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार करते अथवा सुपुर्दगी देते समय बच्चे का सर्वोत्तम हित।कार्यक्रम और सकारात्मक कार्रवाई करने के लिए खुश होने का अधिकार सुनिश्चित करना।परिवारों का समर्थन करने के लिए मजबूत सामाजिक सुरक्षा के साथ परिवार के वातावरण बच्चों के जीवित रहने, विकास, संरक्षण और अधिकार सुनिश्चित करना।सहभागिता। आवश्यक सेवाएं स्थापित करना और आपातकालीन सेवाओं की आपूर्ति न करना।परिवार और समुदाय के भीतर संस्थागत देखभाल, और संस्थागत देखभाल राष्ट्रीय, क्षेत्रीय, राज्य और जिले में परामर्श और सहायता सेवाएं। सभी स्तरों पर उचित अंत सीमलेस के लिए अभिसरण प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए सभी संबद्ध प्रणालियों के साथ नेटवर्क बच्चों को सेवा वितरण परिवार और सामुदायिक स्तर पर बाल संरक्षण को मजबूत करने के लिए, परिवारों से लैस करना, और समुदायों को बच्चों को प्रभावित करने वाले जोखिमों और कमजोरियों को पहचानने के लिए, पैदा करते हैं। बच्चों को स्थितियों से बचाने के लिए निवारक उपायों को बढ़ावा देना।भेद्यता, जोखिम और दुरुपयोग बच्चों की सहायता के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी और हस्तक्षेपों को प्रोत्साहित करना।जो कानून के दायरे में हो। 

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि मिशन वात्सल्य भारत के हर बच्चे के लिए हमें स्वस्थ खुशहाल बचपन सुनिश्चित करना, संवेदनशील समर्थनकारी और समकालीन इको व्यवस्था स्थापित करना होगा। बच्चे ईश्वर अल्लाह का रूप हैं, बच्चों संबंधी कानूनों नीतियों संस्थागत गैरसंस्थागत सेवाओं में योजनाबद्ध तरीके से समन्वय स्थापित करना समय की मांग है। 

संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


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