Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

माशूका धरती- डॉ इंदु कुमारी

माशूका धरती मुहब्बत क्या होती हैपूछो वीर जवानों से कुर्वानियों की निशानेपूछो ये जमाने से बलिदानों की महकफिजाओं में फैल …


माशूका धरती

माशूका धरती- डॉ इंदु कुमारी

मुहब्बत क्या होती है
पूछो वीर जवानों से

कुर्वानियों की निशाने
पूछो ये जमाने से

बलिदानों की महक
फिजाओं में फैल रही

रक्त की कण -कण बूंदें
समर लहर में तैर रही

क्या मजाल आँख कोई
दिखाए महबूबा तरफ

बाजियाँ लगाते जान की
खिंच लेते हैं प्राण भी

बेइन्तहा प्यार करते हैं
दिलो जां न्योछावर है

शौर्य वीरता के द्योतक
आशिक है प्यारी धरा की

दिल।आश आशिकाना है
मातृभूमि जिनकी माशूका

मौत को ठिकाने लगाना है
चलें तिरंगा फहराना है
तेरी आशिकी को सलाम ।

डॉ. इन्दु कुमारी
मधेपुरा बिहार


Related Posts

दोनों बातें खतरनाक हैं- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 8, 2021

 दोनों बातें खतरनाक हैं किसी परिवार का मुखियापरिवार के किसी सदस्य कीनाराजगी के डर सेचुप्पी साध लेता है जबअपने परिवार

सूनापन अखरता”- अनीता शर्मा

December 8, 2021

सूनापन अखरता अकेले चुपचाप खड़ी हो ,देख रही थी,जहाँ दुनिया बसती थी । सूनापन पसरा था कमरे में,जहाँ रौनक रहती

मंथरा- सुधीर श्रीवास्तव

December 8, 2021

 मंथरा आज ही नहीं आदि से हम भले ही मंथरा को दोषी ठहराते, पापी मानते हैं पर जरा सोचिये कि

मन- डॉ.इन्दु कुमारी

December 8, 2021

 मन रे मन तू चंचल घोड़ासरपट दौड़ लगाता हैलगाम धरी नहीं कसकेत्राहि त्राहि मचाने वाली जीवन की जो हरियालीपैरों तले

मेरा एक सवाल- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

December 8, 2021

मेरा एक सवाल…!!! पढ़े लिखे काका भैया से,मेरा एक सवाल।माँ -बहनों की गाली से ,कब होगा देश आजाद.?? अरे !

उलझे-बिखरे सब”- अनीता शर्मा

December 8, 2021

उलझे-बिखरे सब” कितने उलझे-उलझे हुए सब , कितने बिखरे-बिखरे हुए सब। बनावटी दुनिया में उलझे हुए सब, दिखावटी सब सज-धज

Leave a Comment