Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, poem

मार्मिक कविता – कश्मीर में शहीदों की कुर्बानी कब तक़

मार्मिक कविता -कश्मीर में शहीदों की कुर्बानी कब तक कश्मीर में शहीदों की कुर्बानी से आंखें सभकी भर आई वो …


मार्मिक कविता -कश्मीर में शहीदों की कुर्बानी कब तक

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कश्मीर में शहीदों की कुर्बानी से
आंखें सभकी भर आई
वो कल भी थे आज भी हैं
अस्तित्व में चमक छाई

नमन: उनकी शहादत को
शरीर देख आंखें भर आई
जज्बा मां का जब बोली
भारत की रक्षा में सौ बेटे लुटाई

भारत मां के लाल तूने
फ़र्ज़ अपना अदा किया
जान हथेली पर लेकर
एक झटके से दुश्मन को ढेर किया

देश की रक्षा करते तुम
गहरी नींद में सो गए
पूरा भारत परिवार तुमको याद किया
तुम शहीद हो गए

देश की रक्षा में तुम्हारा बलिदान
देश कभी ना भूल पाएगा
हर देशवासी याद रखेगा तुमको
वंदे मातरम गाएगा

अब हर परिवार से एक बच्चा
सेना में जाएगा
देश की रक्षा में
जी जान से लड़ जाएगा

देश सुरक्षित है तुम्हारी खातिर
अब सभको समझ आएगा
साथियों में उर्जा भर गए
दुश्मन अब भारत से थार्रराएगा

तुम जैसे बहादुरों का नाम सुन
दुश्मन सीमा से भाग जाएगा
हर सीमा पर हमेशा
भारत का झंडा लहराएगा-3

लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार कानूनी लेखक चिंतक कवि एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

इंसान और शैतान- जितेन्द्र ‘कबीर’

February 14, 2022

इंसान और शैतान शरीर एक सा ही है,सत्य, स्नेह, शांति और भाईचारे मेंविश्वास रखने वाला‘इंसान’ हो जाता हैऔरझूठ, घृणा, कलह

दोमुंहे सांप- जितेन्द्र ‘कबीर’

February 14, 2022

दोमुंहे सांप वो लोगजो जहर उगलते हैंसार्वजनिक मंचों पर हर समयदूसरों के लिए,होते होंगे क्या इतने ही जहरीलेअपनी निजी जिंदगी

कितना मुश्किल है गांधी बनना- जितेन्द्र ‘कबीर

February 14, 2022

कितना मुश्किल है गांधी बनना कितना आसान है!किसी से नाराज होने परउसके अहित की कामना करना,किसी से अपना मत भिन्न

गणतंत्र मनाओ – गणतंत्र बचाओ-जितेन्द्र ‘कबीर’

February 14, 2022

गणतंत्र मनाओ – गणतंत्र बचाओ गौरवशाली दिन है यहबड़ी धूमधाम से इसे मनाओ,मायने इसके सही समझकरखत्म होने से इसे बचाओ।लूटतंत्र

आसान रास्ता- जितेन्द्र ‘कबीर’

February 14, 2022

आसान रास्ता वक्त ज्यादा लगता है,जुनून ज्यादा लगता है,प्रतिभा ज्यादा लगती है,साल दर साल मेहनत करकेएक नया एवं बेहतर इतिहास

वो तैयार बैठी हैं अब- जितेन्द्र ‘कबीर

February 14, 2022

वो तैयार बैठी हैं अब लोकतंत्र में…चुनी गईं सरकारेंजनता की आवाज उठाने के लिए,निरंकुश हो,तैयार बैठी हैं अबजनता की ही

Leave a Comment