Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

मानव तन – डॉ इंदु कुमारी

 मानव तन अनमोल  यह तन पानी का बुलबुलामाया नगरी यह है संसारतारण हार प्रभु संग हैखोज लो बारम्बार बीता हुआ …


 मानव तन अनमोल 

यह तन पानी का बुलबुला
माया नगरी यह है संसार
तारण हार प्रभु संग है
खोज लो बारम्बार

बीता हुआ अनमोल
समय वापस न होगा
बचा का कर उपयोग
मानव तन ना मिलेगा

यही है मंदिर मस्जिद
गिरजाघर व गुरुद्वारा
साईं तो उर में विराजैं
लख ले जो लख पावै

नौ द्वार की सीढ़ी लगी
दसम द्वार टप जाना है
हमारे प्रिय वहीं मिलेंगे
आपस में क्यों लड़ेंगे ।

यहाँ धर्म ना संप्रदाय
सच्चे मार्ग पर चल के
खोले प्रभु के द्वार
हमें मिले स्थाई प्यार ।

डॉ. इन्दु कुमारी
मधेपुरा बिहार


Related Posts

सुनियोजित अभियान- जितेंद्र कबीर

November 23, 2021

 सुनियोजित अभियान एक आठवीं फेल नौजवान  इतिहास के एक अध्यापक से बहस के दौरान देकर पूरे इतिहास को झूठा और

बड़े चालाक हो मेरे प्रभु – सिद्धार्थ गोरखपुरी

November 23, 2021

 बड़े चालाक हो मेरे प्रभु  बड़े चालाक हो मेरे प्रभु हर गुत्थी सुलझाए रखते हो। बस हमे ही जीवन मृत्यु

मिलन – अनीता शर्मा

November 23, 2021

 मिलन हो रहा है मधुर मिलनसुदूर गगन धरा का यूँगोधूली की क्षितिज बेला में। गवाह चाँद सितारे हैंगगन ने झुक

कविता- माई से- सिद्धार्थ गोरखपुरी

November 23, 2021

 कविता- माई से हम कितने क़ाबिल है ये कमाई तय करती है। हम हमेशा से क़ाबिल हैं ये बस माई

सफर – अनीता शर्मा

November 23, 2021

 सफर जिंदगी में चुनौतियां बहुत है मगर….. डगर मुश्किल भरी है। सफर तो चुनौतियों भरा है मगर…… बढ़ते जाना बाधाओं

प्रेम हमेशा रहेगा- जितेन्द्र ‘कबीर’

November 23, 2021

 प्रेम हमेशा रहेगा मजबूरियां सांसारिक हैं हमारीख़त्म हो जाएंगी देह के साथ ही,लेकिन प्रेम अमर है आत्मा की तरहरहेगा तब

Leave a Comment