Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

मानवता पर लेख| manavta

मानवता पर लेख कईं रसों से हमारा ह्रदय समृद्ध है।सब रस बहुत ही आवकारदायक है।जैसे प्रेम,जिससे मानव सहृदय बनता है, …


मानवता पर लेख

मानवता पर लेख| manavta

कईं रसों से हमारा ह्रदय समृद्ध है।सब रस बहुत ही आवकारदायक है।जैसे प्रेम,जिससे मानव सहृदय बनता है, करूणा की भावना से मन भर जाता है। श्रृंगार रस तो जिंदगी की मिठास है जिससे जीवन मधुबन सा महक उठता है।इतने उत्तम रसों के मध्य क्रोध और स्वार्थ की भावनाएं जीवन की महत्ता के दायरों को सीमित कर देती है।क्रोध बुद्धि के उपर हावी हो जाता है सोचने समझ ने की मति हर लेता है।जिससे क्रूरता का जन्म होता है और मानवता को छोड़ स्वार्थ वश अमानवीय बन जाता है।जिससे मनुष्य की मनुष्य या प्राणियों के प्रति संवेदनाएं नष्ट हो जाती है।भावशुन्य बनके मानव कैसे जिएं ये तो वोही जानें जो जीते है किंतु जिसके प्रति ये भावशून्यता की जाती है उनका मानवता की ओर से विश्वास उठ जाता है।
इन्ही अमानवीय कर्मों से दूर होने के लिए ईश्वर शरण में जा लोग लाखों रुपए खर्च कर अपने पापों को धोने की कोशिश करते है लेकिन पाप तो पाप है कपडें थोड़े ही है जो धूल जाएं?दान धर्म से ज्यादा तो जीवन में करूणा के मूल्यों को समझना जरूरी है,मन,कर्म और वचन से किसीको भी प्रताड़ित करने के बजाय विपरीत परिस्थितियों में भी सौम्यता धारण करना आवश्यक बन जाता है।जिससे अपना मन और दिमाग भी शांत रहेगा जो सेहत के लिए भी लाभप्रद है।जितने उद्वागों को हम पालते है उनकी प्रतिक्रिया रूप शरीर के रासायनिक बदलाव आतें हैं जिससे शरीर में विविध व्याधियों का उद्धव होता है।आजकल के तनावग्रस्त वातावरण में जो नई नई शारीरिक विपत्तियां देखने मिल रही है उससे बचाव के लिए प्रेम और करूणा रस का जीवन में आना आवश्यक है।
सिशियल मीडिया में देखे जाने वाले प्रोग्राम और masg से भी अपनी विचारसरणी प्रभावित होती है।अगर कोई मारधाड़,दगाबाजी आदि के बारे में कुछ देखते है तो उसका असर हमारे जीवन पर पड़ता ही है।कई बार गुनहगारों ने कबूल किया है कि किसी चित्रपट या सीरियल से प्रेरित हो उन्हों गुनाह का आचरण किया है।सौम्य भावों वाले चित्रपट और सीरियल्स को पसंद करें और अपने आपको उन गलत भावों के प्रभाव से बचाएं।कई बार अति रुक्ष वलणो की वजह से परपीड़न की वृत्ति दिमाग में घर कर जाती है।जिससे किसी को दुख दे आनंद की अनुभूति करने लग जातें है लोग जो बिल्कुल ही अमानवीय है।
जीवन देने वालें दाता ने इतना सुंदर जीवन दिया है जिसे हम सुंदर तरीके से संभालना है।अपना पृथ्वी पर आने का ध्येय साकार करना है।अच्छे वर्तन से उस दाता का शुक्र मनाना है।मानव है तो मानवीयता का फर्ज निभाना है।

About author  

Jayshree birimi
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद (गुजरात)


Related Posts

आंतरिक सौंदर्यता एवं प्रतिभा हे मनुष्य की सच्ची पहचान

आंतरिक सौंदर्यता एवं प्रतिभा हे मनुष्य की सच्ची पहचान

July 24, 2025

आंतरिक सौंदर्यता एवं प्रतिभा हे मनुष्य की सच्ची पहचान एक ऐसी दुनिया में जहां शारीरिक रूप अक्सर केंद्र बिंदु होता

 ऐसे थे जननायक प्रधानमंत्री चंद्रशेखर

 ऐसे थे जननायक प्रधानमंत्री चंद्रशेखर

July 7, 2025

“चाह गई चिंता मिटी मनुआ बेपरवाह जाको कछु ना चाहिए वो शाहन के शाह” कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्रद्धेय द्वारिका

साहित्य, टेक्नोलाॅजी और हम

साहित्य, टेक्नोलाॅजी और हम

June 10, 2025

साहित्य की रचना में टेक्नोलाॅजी की बात अब जरा भी नई नहीं है। भविष्य में अनेक मोर्चे पर टेक्नोलाॅजी और

सावधानी से चुने माहौल, मित्र एवं जीवनसाथी

सावधानी से चुने माहौल, मित्र एवं जीवनसाथी

May 26, 2024

सावधानी से चुने माहौल, मित्र एवं जीवनसाथी अगर आप विजेता बनना चाहते हैं, तो विजेताओं के साथ रहें। अगर आप

विचारों की भी होती है मौत

विचारों की भी होती है मौत

May 26, 2024

प्रत्येक दिन दिमाग में 6,000 विचार आते हैं, इनमें 80% नकारात्मक होते हैं। इन नकारात्मक विचारों से दूर रहने के

स्पष्ट लक्ष्य, सफलता की राह

स्पष्ट लक्ष्य, सफलता की राह

May 26, 2024

स्पष्ट लक्ष्य, सफलता की राह तीरंदाज एक बार में एक ही लक्ष्य पर निशाना साधता है। गोली चलाने वाला एक

Leave a Comment