Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

मां भारती का लाल-हेमलता दाहिया…

“मां भारती का लाल” था वीर पुत्र वो बलिदानी,देता दुश्मनों को ललकार.मुख मंडल में तेज सूर्य,आंखो में ज्वाला अंगार .रग-रग …


“मां भारती का लाल”

मां भारती का लाल-हेमलता दाहिया...
था वीर पुत्र वो बलिदानी,देता दुश्मनों को ललकार.
मुख मंडल में तेज सूर्य,आंखो में ज्वाला अंगार .
रग-रग जोश उत्साह लिए,करने भारत मां का श्रृंगार.
चला मां भारती का लाल.
चला मां भारती का लाल.

मां खातिर मां को छोड़,रण भूमि में भरता हुंकार.
प्राण फूकते शब्दों से,करता हज़ारों को तैयार,
साहस,ऊर्जा,अभिमान लिए,करने भारत मां का श्रृंगार.
चला मां भारती का लाल.
चला मां भारती का लाल.

भाल पे तिलक लहू धरके,मां भारती को पुकार.
खुली आंखों में भरे,सपने करता साकार.
खुद का रचा इतिहास लिए,करने भारत मां का श्रृंगार.
चला मां भारती का लाल.
चला मां भारती का लाल.

जुबां की कहानी बन,जांबाजों की निशानी बन.
देश पे हो फिदा, सो गया रख के सर.
वीर आखिरी पहचानी लिए,करने भारत मां का श्रृंगार.
चला मां भारती का लाल.
चला मां भारती का लाल.

विनम्र श्रद्धांजलि..💐🙏

हेमलता दाहिया…
सेमरिया,जिला रीवा,
मध्यप्रदेश


Related Posts

क्यों एक ही दिन मां के लिए

May 8, 2022

क्यों एक ही दिन मां के लिए मोहताज नहीं मां तुम एक खास दिन कीतुम इतनी खास हो कि शायद

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास

May 8, 2022

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास  मां शब्द का विश्लेषण शायद कोई कभी नहीं कर पाऐगा, यह दो

मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं

May 7, 2022

“मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं” जिस कोख में नौ महीने रेंगते मैं शून्य

माँ तेरे इस प्यार को

May 7, 2022

माँ तेरे इस प्यार को तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास ।सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो

बीते किस्से

May 7, 2022

बीते किस्से अपनी जिंदगी के कुछ नायाब किस्से मैं सुनाती हूंलोग कहते मुझे पागल , मैं तो कलम कि दीवानी

कविता-दर्द ने दस्तक दी

May 6, 2022

दर्द ने दस्तक दी आज फिर दर्द ने मेरे दिल पर दस्तक दे दी हमें यू ना रुलाओ… 2मैं इस

PreviousNext

Leave a Comment