Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh, Parenting, sneha Singh

मां-बाप को बच्चे से प्यार करना चाहिए उसके रिजल्ट से नहीं

 मां-बाप को बच्चे से प्यार करना चाहिए उसके रिजल्ट से नहीं ‘करन क्या रहे हो? परीक्षा से एक दिन पहले …


 मां-बाप को बच्चे से प्यार करना चाहिए उसके रिजल्ट से नहीं

मां-बाप को बच्चे से प्यार करना चाहिए उसके रिजल्ट से नहीं
‘करन क्या रहे हो? परीक्षा से एक दिन पहले पढ़ाई करना चाहिए कि तुम फोटोस्टेट कराने जा रहे हो? और हां, अगर इस बार पास नहीं हुए तो ठीक नहीं होगा। दुकान पर बैठना पड़ेगा… चलो बैठ कर पढ़ाई करो।”
करन अपने पिता केशवलाल से बहुत डरता था। पहले क्लास से ही करन अपने पापा और परीक्षा दोनों से बहुत डरता रहा था। परीक्षा में पास होने पर ही पापा प्यार करते थे। प्यार यानी दुलार नहीं, मारते नहीं थे और पाकेटमनी देते थे। एकाध नया पेन और कपड़ा दिला देते थे। करन के लिए यही पापा का प्यार था। मम्मी दुलारती, पर पढ़ाई के लिए कहती, “बेटा मेहनत कर के पढ़ो तो।”
करन की समझ में नहीं आता था कि पास होने से क्या होता है? पंछी को पंख मिले? कोयल को आवाज? या पापा के बढ़ई के काम करने वाले औजार काम करने के लिए मिलें? करन को पढ़ाई के अलावा बाकी के सारे काम अच्छे लगते थे। वह पापा के औजार पा जाता तो लकड़ी के टुकड़े को बढ़िया कलाकृति में ढ़ाल देता। उसे पापा की तरह बढ़ई बनना अच्छा लगता था। पर पापा बिलकुल नहीं चाहते थे। वह तो करन को साहब बनाना चाहते थे। दुकान पर बैठ कर सोफा या टेबल बनाने वाला अपनी तरह साधारण मिस्त्री नहीं। भले ही कमाई अच्छी हो, पर समाज में इज्जत नहीं थी। कोई इज्जत से नहीं देखता था। सभी काम में गलतियां देखते थे।
जबकि करन को अपने पिता के बढ़ई के काम में एक अलग ही छटा नजर आती थी। उसकी फिनिशिंग बहुत अच्छी थी। उसके पापा कोई लकड़ी का टुकड़ा बेकार समझ कर फेंक देते तो वह उस टुकड़े से कुछ बना कर अपने किसी दोस्त को उपहार में देता तो उसका वह दोस्त ही नहीं, दोस्त के मां-बाप भी खुश हो जाते। यह कला करन के खून में थी। छोटी बहन के लिए गाड़ी और गुड़िया बनाता तो बहन के साथ वह भी उतना ही खुश होता।
पर करन आजकल दुखी था। बोर्ड  की परीक्षा नजदीक थी, जिसमें वह पास होगा या नहीं, इस बात की उसे बड़ी चिंता थी। कुछ याद भी नहीं हो रहा था और जो याद होता था, वह याद ही नहीं रह पाता था। वह मम्मी से भी कुछ नहीं कह सकता था। क्योंकि मम्मी भी करन पास हो जाए, इसके लिए उपवास के साथ मानता मानने में लगी थी। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे?
करन ने फोटोस्टेट कराने की बात की तो पापा गुस्सा हो गए। फिर भी करन फोटोस्टेट कराने गया। अगले दिन मम्मी ने दही खिला कर परीक्षा देने के लिए भेजा। दो घंटे बाद स्कूल से फोन आया कि करन नकल करते हुए पकड़ा गया है। पूरी माइक्रो फोटोस्टेट ले कर आया था। घर वालों को उसे ले जाने के लिए बुलाया गया था। क्योंकि उसे परीक्षा कक्ष से बाहर किया गया तो उसने तीसरे महले से कूद कर आत्महत्या करने की कोशिश की थी।
“करन फोटोस्टेट करा कर साथ ले गया? कब उसने यह सब सोचा और किया? मां हो कर तुम जान नहीं सकी?” करन के पिता केशव ने करन की मम्मी को टोंका तो वह बेचारी रोने लगी। पति-पत्नी स्कूल पहुंचे। स्कूल के प्रिंसिपल रघुनाथजी ने उन्हें प्यार से बैठा कर कहा, “करन होशियार लड़का है। उसे लकड़ी की बहुत अच्छी कारीगरी आती है, यह तो मुझे आज पता चला।”
“कारीगर बनाने के लिए के लिए इतने महंगे स्कूल में पढ़ने के लिए नहीं एडमिशन कराया साहब।” केशव ने कहा।
रघुनाथजी ने पानी का गिलास उनकी ओर बढ़ाते हुए शांति से कहा, “आप का करन चोर नहीं है। बस, थोड़ा घबराया हुआ है परीक्षा से। वह आप से डरा हुआ है फेल हो जाने के लिए।”
“मेरा? मेरा डर होता तो वह इस तरह का गलत काम…” केशव का गुस्सा बढ़ता ही जा रहा था। यह देख कर रघुनाथजी ने करन से कहा, “बेटा, तुम बाहर मीना टीचर के पास बैठ कर कल की परीक्षा के बारे में समझ लो।”
इसके बाद रघुनाथजी ने केशव से कहा, “करन तो नादान है, पर आप तो नादान नहीं हैं।”
केशव ने आश्चर्य से रघुनाथजी को देखते हुए कहा, “आप को करन को सजा देनी चाहिए। इसके लिए मैं आप से कुछ नहीं कहूंगा।”
रघुनाथजी ने कहा, “सजा तो मिलेगी, पर पहले यह तो तय करो कि अपराधी कौन है?”
केशव हैरान हुआ, “साहब, मेरा बेटा बेवकूफ है। गधे ने पर्ची ला कर मेरा नाम डुबोया है। अब आप मुझे घुमा रहे हो। आप को जो करना है, कीजिए। अब मैं घर जाऊंगा।”
“घर जा कर आप क्या करेंगे?”
प्रिंसिपल अपना सवाल पूरा करते, उसके पहले ही केशव बोल पड़ा, “इसे ऐसा सबक सिखाऊंगा कि वह फिर कभी इस तरह की चोरी करने की हिम्मत नहीं करेगा। पढ़ने के अलावा दूसरी कोई बात नहीं करेगा।”
अब प्रिंसिपल खड़े हो गए, “तुम्हारी समझ को क्या हुआ है भाई? बेटा आत्महत्या करने की कोशिश कर रहा है और तुम उसे मारने की बात कर रहे हो? वह एक सुंदर कलाकार बन सकता है, यह तुम्हें दिखाई नहीं देता। यह तुम्हारी दबंगई से पास होने के लिए चोरी करने के लिए मजबूर हो सकता है, यह तुम्हें दिखाई नहीं देता? उसे पढ़ने में रुचि कम है और उसका कलाकार जीव कुछ नया करने के लिए बेचैन हो रहा है, वह छटपटा रहा है। उसे इसकी मरजी से जीने दो। उसे थोड़ा समय दो, वह पढ़ेगा। वह भले ही डाक्टर न बने, पर एक अच्छा कलाकार बन कर तुम्हारा नाम रोशन करेगा।”
“पर मैं तो इसके अच्छे के लिए…।” केशव की बात पूरी होती, उसके पहले ही उसकी पत्नी ने उसे रोक कर कहा, “साहब, ठीक कह रहे हैं। आप बेटे को बहुत दबाव में रखते हैं। वह आप को देख कर कांपने लगता है। बोल नहीं पाता आप के सामने।”
“यही तो मैं भी कह रहा हूं।” प्रिंसिपल ने समझाया, “बेटे को प्यार से समझाओ कि पढ़ाई महत्वपूर्ण है। पर तुम्हें जो करना हो, वह पास हो कर करना। मेरे लिए तुम प्यारे हो, मार्क्स नहीं।”
थोड़ा समझाने पर सारी बात केशव की समझ में आ गई। चलते समय उसने जिस तरह करन के कंधे पर हाथ रखा, यह देख कर लगा कि अब करन का भविष्य उज्जवल है। परीक्षा नजदीक हो तो बच्चों पर दबाव नहीं बनाना चाहिए। बस, स्नेह से साथ रह कर विश्वास दिलाएं कि ‘हम तुम्हें प्यार करते हैं, तुम्हारे रिजल्ट से नहीं। मेहनत करनी चाहिए, चिंता नहीं। अगर ऐसा हो जाए तो हजारों आत्महत्याएं होने से रुक सकती हैं।

About author

Sneha Singh
स्नेहा सिंह

जेड-436ए, सेक्टर-12
नोएडा-201301 (उ.प्र.)



Related Posts

मनुष्य में अनमोल गुणों का भंडार

September 13, 2022

मनुष्य में अनमोल गुणों का भंडार चुप रहना और माफ करना दो अनमोल हीरे – चुप रहने से बड़ा कोई

जीते जी कद्र कर लो श्राद्धकर्म की जरूरत नहीं

September 13, 2022

“जीते जी कद्र कर लो श्राद्धकर्म की जरूरत नहीं” Pic credit freepik.com सर्वतीर्थमयी माता सर्वदेवमयः पिता मातरं पितरं तस्मात् सर्वयत्नेन

हर महिला को आज़ाद ज़िंदगी जीने का पूरा अधिकार है

September 13, 2022

“हर महिला को आज़ाद ज़िंदगी जीने का पूरा अधिकार है” Pic credit freepik.com “मत सहो बेवजह प्रताड़ना की जलन जागो

अखंड भारत को जोड़ने का नाटक क्यूँ

September 13, 2022

“अखंड भारत को जोड़ने का नाटक क्यूँ” कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के भारत जोड़ो पदयात्रा का मतलब समझ नहीं आ

विश्व डेयरी शिखर सम्मेलन 12 से 15 सितंबर 2022

September 13, 2022

विश्व डेयरी शिखर सम्मेलन 12 से 15 सितंबर 2022 सफेद क्रांति का आगाज़ भारतीय डेयरी उद्योग के विकास और उपलब्धियों

पितृ पक्ष – श्राद्ध 2022

September 13, 2022

 पितृ पक्ष – श्राद्ध 2022  श्रद्धया इदं श्राद्धम्‌ मान्यता है पितृपक्ष में यमराज पितरों को अपने परिजनों से मिलने 15

Leave a Comment