Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

मां का असीम प्रेम

 मां का असीम प्रेम! सबसे भोली , प्यारी हे मां, है यह तो प्रेम की प्रतिमा, इसकी गोदी में बसा …


 मां का असीम प्रेम!

मां का असीम प्रेम!

सबसे भोली , प्यारी हे मां,

है यह तो प्रेम की प्रतिमा,

इसकी गोदी में बसा है सारा जहां,

इससे प्यारा एहसास है कहां!

मिश्री है इसकी वाणी में,

दर्द है इसकी कहानी में,

अनगिनत इसकी कुर्बानी है,

इसके होने से ही, हम बच्चों की जिंदगी सुहानी है!

प्रार्थना में ले सबसे पहले बच्चों का नाम,

दिन रात करती है हमारे लिए काम,

इसके प्यार से उतरे हम बच्चों थकान,

बच्चे ही है इसकी जान और शान!

मां जब तक हे हमारे पास,

हमारा हर दिन है खास,

चलो पूरी करें इनकी भी आस,

अब नहीं और वनवास!

सबसे भोली सी, प्यारी सी मां,

है यह तो प्रेम की प्रतिमा,

इसकी गोदी में बसा है सारा जहां,

इससे प्यारा एहसास है कहां!!


डॉ. माध्वी बोरसे!

(स्वरचित व मौलिक रचना)

राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

नववर्ष का आगाज़- अनिता शर्मा

January 6, 2022

दिसम्बर की बिदाई और नववर्ष का आगाज़” लो दिसम्बर जाने को तैयार नववर्ष आने को उत्सुक हैं।सारे रंजो गम भुला

सफर ए इश्क़- R.S.meena Indian

January 6, 2022

कविता – सफर ए इश्क़ जिस दिन होगी अपने प्यार की शुरुआत । उस दिन तुमसे,हम अपनी वफ़ा जता देंगे

कैलेण्डर बदल जाएगा- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

कैलेण्डर बदल जाएगा बदलता आ रहा है जैसेसैंकड़ों सालों सेवैसे ही यह साल भी बदल जाएगा,कुछ यादें खट्टी – मीठीदर्ज

आम जनता का नसीब- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

आम जनता का नसीब आम जनता के लिएधर्मस्थलों पर ईश्वर के दर्शन हेतूप्रक्रिया अलग हैऔर ‘वी.आई.पी.’ के लिए अलग, जनता

सोचो जरा उनके बारे में भी- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

सोचो जरा उनके बारे में भी तुम दुखी होकि इन सर्दियों में महंगीब्रांडेड रजाई नहीं खरीद पाए,जिन्हें मयस्सर नहींकड़कती सर्दी

इंसानियत को बचाओ- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 6, 2022

इंसानियत को बचाओ दुनिया मेंकहीं भी हो रहा हो अन्यायतो उसके खिलाफ आवाज उठाओ,रोकने की उसे करो पुरजोर कोशिशेंविरुद्ध उसके

Leave a Comment