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माँ- R.S.meena Indian

कविता माँ मैं व्रत नहीं करता ,कहीं माँ जैसी सूरत नहीं । माँ बाप को भूल जाऊ,ऐसा कभी मुहूर्त नहीं …


कविता माँ

माँ- R.S.meena Indian
मैं व्रत नहीं करता ,कहीं माँ जैसी सूरत नहीं ।

माँ बाप को भूल जाऊ,ऐसा कभी मुहूर्त नहीं ।।
मेरे सर पर हैं,माँ बाप की दुआओं का असर ।
ताउम्र मुझको ताबीज़ की कभी जुर्रत नहीं ।।

माँ शब्द में तो ,ये पूरी क़ायनात समाई है ।
सत्य पथ पे चलना,पिता ने राह यही बताई हैं ।।
सुख हो या दुख हो, कभी भूल मत जाना ।
माँ बाप की सेवा करना,सबसे बड़ी कमाई हैं ।।

माँ जैसी मोहब्बत, कहीं और नहीं मिलती ।
माँ के बिना सृष्टि में,खुशियां नहीं मिलती ।।
माँ की नजरों में तो ,आज भी हम बच्चे हैं ।
बदक़िस्मत होते हैं ,जिन्हें माँ नही मिलती ।।

“स्वरूप” जानता हैं,इतना तो अनजान नहीं ।
उनके बिना किसी की,कोई पहचान नहीं ।।
किसे ढूँढते-फ़िरते हो तुम ,मंदिर-मस्जिदों में ।
माँ बाप से बड़ा जग में,कोई भगवान नहीं ।।

R.S.meena Indian


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