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माँ ही पहली शिक्षिका, पहला स्कूल

‘‘माँ ही पहली शिक्षिका, पहला स्कूल” यह एक सर्वविदित तथ्य है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चे के …


‘‘माँ ही पहली शिक्षिका, पहला स्कूल”

Mothers day special (मातृत्व दिवस विशेष)

यह एक सर्वविदित तथ्य है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चे के लिए ये सबसे अच्छी उम्र होती है, क्योंकि वह इस उम्र में सबसे ज़्यादा सीखता है। एक बच्चा पांच साल से कम उम्र के घर पर ज़्यादातर समय बिताता है और इसलिए वह घर पर जो देखता है, उससे बहुत कुछ सीखता है। छत्रपति शिवाजी को उनकी माँ ने बचपन में नायकों की कई कहानियां सुनाईं और वो बड़े होकर कई लोगों के लिए नायक बने।

बच्चों का पहला स्कूल घर

Mothers day special (मातृत्व दिवस विशेष)

घर पर ही एक बच्चा सबसे पहले समाजीकरण सीखता है। एक बच्चा पहले घर पर बहुत कुछ सीखता है। लेकिन आज, चूंकि अधिकांश माता-पिता कमाने वाले हैं, इसलिए वे अपने बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय नहीं बिता पाते हैं। बच्चों को प्ले स्कूलों में भेजा जाता है और अक्सर उनके दादा-दादी द्वारा उनका पालन-पोषण किया जाता है। ये बच्चे उन लोगों की तुलना में नुकसान में हैं जो अपने माता-पिता के साथ क्वालिटी टाइम बिता सकते हैं।

ऐसा इसलिए है, क्योंकि एक बच्चा सीखता है कि क्या स्वीकार किया जाता है और क्या स्वीकार नहीं किया जाता है, क्या सही है और क्या नहीं? वो अपने परिवार के साथ पर्याप्त समय बिता सकते है, जिससे उनकी बॉन्डिंग मज़बूत होती है और वो बड़ा होकर एक आत्मविश्वासी व्यक्ति बनता है।

ऐसी कई कहानियां

हमारे रिश्तेदार के एक बच्चे को उसके दादा-दादी ने पाला है, क्योंकि उसके माता-पिता अमेरिका में अपनी नौकरी में व्यस्त हैं। वह बड़ा होकर एक जिद्दी, हीन भावना वाला बच्चा बन गया। आज भी घर प्रथम पाठशाला है और माँ प्रथम शिक्षिका। यहां तक कि एक बच्चे को अपने परिवार और विशेष रूप से माँ के साथ बिताने के लिए थोड़ा सा समय भी उसके प्रभावशाली दिमाग पर बहुत प्रभाव डालता है।

Mothers day special (मातृत्व दिवस विशेष)
किसी ने ठीक ही कहा है कि “भगवान हर जगह नहीं हो सकते इसलिए उन्होंने माँ बनाई” तो जो व्यक्ति बच्चे को सबसे ज़्यादा प्यार करता है, वो हमेशा एक माँ होती है। बच्चे के लिए माँ का सबसे ज़्यादा स्नेह होता है। वो केवल माँ ही नहीं बल्कि बच्चे की पहली शिक्षिका भी होती है। वो बच्चे को जन्म से ही पढ़ाकर स्थायी प्रभाव डालती है। माँ की शिक्षा ईश्वरीय शिक्षा है।

ऐसी कई माताएं हैं, जिन्होंने अपने बच्चों के प्रति अपने निराले प्यार से अपने बच्चों को हीरो बना दिया है। हाल ही में खबर आई थी कि एक माँ ने अपनी बेटी को घर पर पढ़ाया और वह कभी स्कूल नहीं गई और अब उसे आईआईटी में एडमिशन के लिए बुलाया है।

माँ: फिर समाज में इतने मुद्दे क्यों?

पहले दिन से शुरू हुई माँ की शिक्षा और जीवन में माँ का आशीर्वाद होने तक चलते रहें, इसकी ज़रूरत नहीं है। माँ को शिक्षा प्रदान करने के लिए उच्च शिक्षित होना चाहिए। माताओं द्वारा प्रदान की जाने वाली मूल्य शिक्षा की कहीं भी बराबरी नहीं की जा सकती। अब सवाल यह उठता है कि अगर हर माँ अपने बच्चों को मूल्य आधारित शिक्षा प्रदान कर रही है तो समाज में इतने मुद्दे क्यों हैं? इसका उत्तर यह है कि और भी कई कारक हैं, जो किसी व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करते हैं और माँ की शिक्षा कभी भी बच्चे को गलत रास्ते पर नहीं लाती

Mothers day special (मातृत्व दिवस विशेष)
मैं यहां, यह कहना चाहूंगी कि एक माँ अपने बच्चे के चेहरे पर पहली मुस्कान देखती है और अपनी शिक्षा और आशीर्वाद से उसे स्थायी बना देती है। मातृत्व की कला बच्चों को जीने की कला सिखाना है। घर बच्चे के समग्र विकास के लिए पहला बिल्डिंग ब्लॉक है और माँ वास्तव में सबसे अद्भुत शिक्षक है।

आज बच्चों में दृष्टिकोण का अभाव

घर पर, शिक्षाविदों के अलावा, बच्चा अपनी माँ से प्यार, देखभाल, करुणा, सहानुभूति आदि जैसे नैतिक मूल्यों को सीखता है, जो स्वयं निस्वार्थ प्रेम और बलिदान की अवतार है। अपने माता-पिता के साथ बातचीत करके बच्चे के दैनिक अवलोकन के माध्यम से, वह एक दृष्टिकोण / व्यवहार विकसित करता है, जो जीवन के महत्वपूर्ण चरणों में उसकी सोच, जीने का तरीका, समझ और निर्णय लेने में मदद करता है।

आज फास्ट लाइफ के साथ तालमेल बिठाने के लिए माँ-बाप दोनों घर से बाहर काम करने में लगे हुए हैं। माताएं अपने बच्चों को सही समय नहीं दे पाती हैं। पहले तो यह बच्चों की रुचि की उपेक्षा करता हुआ प्रतीत होता है, लेकिन साथ ही यह अनुशासन सिखाता है, आत्म-प्रेरणा उत्पन्न करता है। बच्चों में लंबे समय तक उनके चरित्र निर्माण में मदद करता है। बच्चा पहले के चरण से बदलते परिवेश में समायोजन करना सीखता है। इससे बच्चे भी घर पर अकेले रहते हुए नवोन्मेषी गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं।

बच्चा माँ की शिक्षा को महत्व देता है, अपने चरित्र निर्माण, सम्मान, प्यार और देखभाल को घर पर आकार देता है। माँ दुख में बच्चे की सांत्वना, दुख में आशा और कमज़ोरी में ताकत और उसके जीवन को आकार देने में सबसे अच्छी शिक्षक है इसलिए आज भी, यह सच है कि घर पर माँ पहले स्थान पर है और बच्चे के पालन-पोषण में पहली शिक्षक भी।



-प्रियंका सौरभ
रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,
कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार,

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