Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

माँ-हरविंदर सिंह ‘ग़ुलाम’

माँ सुना देवताओं के बारे में अक्सरमगर देव कोई कभी भी न आया लगी ठोकरें जब ज़माने की मुझको हर …


माँ

हरविंदर सिंह 'ग़ुलाम'

सुना देवताओं के बारे में अक्सर
मगर देव कोई कभी भी न आया
लगी ठोकरें जब ज़माने की मुझको
हर बार माँ ने गले से लगाया

कभी भूखे रहकर कभी प्यासे रहकर
करती रही वो दुआऐं हमेशा
मेरे ही उज्ज्वल भविष्य की कामना से
हर इक दर पर जा माथा निवाया

लड़ी वो हर इक से मेरे लिए ही
मैं नादान था और समझ कुछ न पाया
नज़रें लगे न कहीं ज़माने की मुझको
लौ से दिए की काला टीका लगाया

मासूम थी वो बड़ी नासमझ थी
ममता ने था उसको पागल बनाया
अपने ही लल्ला में देखे कैन्हया
माखन तभी तो चोरी चोरी खिलाया

भगवान का रूप कहती है दुनियाँ
मगर मैंने भगवान देखा नहीं है
आकर साकार क्या मैं क्या जानूँ
माँ में ही मैंने तो भगवान पाया

कहती है सारी ही दुनियाँ ‘ग़ुलाम’
मगर एक इकलौती माँ ही है यारों
जिसने इस सिरफिरे दिलजले को
हर बार सरताज कह कर बुलाया

हरविंदर सिंह ‘ग़ुलाम’
पटियाला, पंजाब


Related Posts

कविता-वो पंछियों के घरौंदे

May 2, 2022

वो पंछियों के घरौंदे आज भी उसी पेड़ की शाख पर वही पंछियों के घरौंदे हम पाए थे।।जो कभी हमनें

कविता -गर्मी

May 1, 2022

गर्मी बेवफाई की चांद नेचांद को तो कुछ कह नहीं पाए लेकिन मोहब्बत इतनी थीको उसे भूला भी न पाए

मैं महाराष्ट्र निवासी -कविता

April 30, 2022

कविता -मैं महाराष्ट्र निवासी आज अपने महाराष्ट्र राज्य कि गाथा गाके मैं सुनाती हूं।।मैं महाराष्ट्र कि निवासी गर्व सेभर सीना

बनाओ एकता की चैन

April 30, 2022

बनाओ एकता की  चैन शहीदों कि अरमानों की  सूली परदेखो चढ़ रहा मेरा वतन ।। शहीदों के बलिदानों से मिली

पड़ाव

April 30, 2022

पड़ाव ढल रही थी सांझ सी उम्र की लाली भीगहरी होती जा रही थी समझदारी की लकीरेंबालों में भी शुरू

स्वतंत्रता दिवस की 75 वीं अमृत जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में कविता

April 30, 2022

स्वतंत्रता दिवस की 75 वीं अमृत जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में कविता स्वतंत्रता दिवस की अमृत जयंती स्वतंत्रता दिवस की

PreviousNext

Leave a Comment