Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr-indu-kumari, poem

माँ- डॉ. इन्दु कुमारी

माँ मां देती आंचल की छायाप्रेम की मूरत सी सुंदर कायाअगाध प्रेम की द्योतक रही वात्सल्य ह्रदय शोभनीय रही रब …


माँ

माँ-  डॉ. इन्दु कुमारी

मां देती आंचल की छाया
प्रेम की मूरत सी सुंदर काया
अगाध प्रेम की द्योतक रही
वात्सल्य ह्रदय शोभनीय रही
रब अपने समतुल्य बनाया
मां नाम संदेशा भेजवाया
अपना सदृश्य रहने वाले
सदृश्य में माँ रुपी भगवती
डाल दिया जीवन के जंग में
शोभती है बच्चों के संग में
भूखी रह जाती खुद तो भी
मुख मलीन होने ना देती
अपने हिस्से की खिलाकर
सुख पाती सदा सदा ही
बच्चे भी मां के पल्लू में
छिपकर जन्नत के सुख पाते
मां की आंचल में कटी रातें
स्वर्ग भी फीके पड़ जाते
सिर पर जिनके आँचल आते
बच्चों !मां को तुम क्यों ठुकराते।

डॉ. इन्दु कुमारी
मधेपुरा बिहार


Related Posts

एक बात सुनो -चन्दानीता रावत

February 3, 2022

एक बात सुनो  सुनो सुनो एक बात सुनो अन्धेर नगरी चौपट राजा की बहरे राज्य सरकार कीदिन रात एक कर

यादों का सिलसिला- डॉ इंदु कुमारी

February 3, 2022

यादों का सिलसिला तेरी हसीन यादों का सिलसिला अमिट है धूमिल नहीं होने वाली प्रेम पौधे उगाने वालीदमकती चेहरे की

नी बखत री बात-मईनुदीन कोहरी”नाचीज़ “

February 3, 2022

नी बखत री बात धोरां री आ ” धरती , धीरज री धरा सांतरी । सोनै सी गोरी बाळू रेत

तू ही तू है- नाचीज़ बीकानेरी “

February 3, 2022

तू ही -तू है जमीं से फलक तक तू ही -तू है । दिल की धड़कनों में तू ही –

सूरज दादा- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

February 3, 2022

सूरज दादा सूरज दादा उठा के गठरी, चले कुम्भ के मेला में।बसन्त पंचमी नहा केआउँ,दिन बीता बहुत झमेला में।।लुका छिपी

ऊँचा हो गया कद लोगों का जमींन से-विजय लक्ष्मी पाण्डेय

February 3, 2022

ऊँचा हो गया कद लोगों का जमींन से ऊँचा हो गया कद लोगों का जमीन सेसुना है जमीनें बंजर पड़ी

Leave a Comment