Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh, Tamanna_Matlani

महिला दिवस पर विशेष….हम हिन्द की हैं नारियां….

नन्हीं कड़ी में….  आज की बात  हम हिन्द की हैं नारियां..महिला दिवस पर विशेष…. हमारे भारत देश में आज के आधुनिक युग …


नन्हीं कड़ी में…. 
 आज की बात 
 हम हिन्द की हैं नारियां..
महिला दिवस पर विशेष….

महिला दिवस पर विशेष....हम हिन्द की हैं नारियां....
हमारे भारत देश में आज के आधुनिक युग में महिलाओं को पुरुषों के बराबरी का स्थान हासिल है। स्त्री पुरुष समानता का भाव भी अब लोगों के दिलों में गहरा होता जा रहा है।एक समय ऐसा था जब स्त्रियों को केवल शोभा की वस्तु समझा जाता था , लेकिन स्त्रियों ने भी दिखा दिया है कि वह पुरुषों के मुकाबले में किसी भी क्षेत्र में उन्नीस नहीं है।
आज के आधुनिक युग में हम अगर स्त्रियों के स्थान की व्याख्या करना चाहें तो हमें शब्द कम पड़ जाएंगे। पश्चिमी देशों के साथ ही आज हमारे भारत देश में भी स्त्रियों ने दिखा दिया है कि वह हर वो कार्य कर सकती है जिसमें केवल पुरुषों का ही एकाधिकार समझा जाता था । आज महिलाओं ने बड़ी-बड़ी कंपनियों , बैंको तथा उद्योगों में सी.ई.ओ. का पद हासिल कर लिया है ।
रक्षा क्षेत्र में जहां स्त्रियों का जाना असंभव सा माना जाता था वहां पर भी स्त्रियों ने अपना दम-खम दिखा दिया है ।भारत की जल सेना, थल सेना तथा वायु सेना इन तीनों सेनाओं में स्त्रियों ने न केवल उच्च पद हासिल कर लिया है बल्कि उन्होंने अपने कौशल्य और बहादुरी के दम पर अपना एक विशेष स्थान भी बना लिया है।
आज हम देख सकते हैं कि महिलाएं शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी अपना एक अलग स्थान बना रही है। हम देख सकते हैं कि बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा (KG Clases) देने में पुरुषों के मुकाबले में एक महिला शिक्षिका अपना दायित्व ज्यादा जिम्मेदारी पूर्वक निभा रही है, क्योंकि यह शिक्षा वह *मां* बन कर देती है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी हम देखते हैं कि एक पुरुष डॉक्टर के साथ-साथ एक महिला परिचारिका की भी ख्याति होती रही है ।
यह सब मैं एक महिला होने के नाते नहीं कह रही हूं बल्कि आप स्वयं अनुभव कर सकते हैं । आज हमारे देश की लगभग आधी आबादी महिलाओं की है। आप स्वयं कल्पना कीजिए कि अगर महिलाओं को सिर्फ घर कार्य करने हेतु छोड़ दिया जाता तो हमारे देश की हालत महिला शक्ति के बिना क्या होती ? मैं अपनी बातों से पुरुषों की अहमियत को कम नहीं करना चाहती , मैं तो बस इतना ही कहना चाहती हूं कि ,देश की आधी आबादी अगर निष्क्रिय होकर केवल घर की शोभा बढ़ा रही होती तो हमारा भारत देश वह मुकाम शायद इतने थोड़े से वक्त में हासिल नहीं कर सकता था, जिस मुकाम पर आज हमारा देश खड़ा है।
हमारे देश की आर्थिक उन्नति में महिलाओं का भी योगदान उतना ही है जितना कि एक पुरुष का है । देश के विकास में इतना अधिक योगदान होते हुए भी महिलाओं के लिए क्यों यह पंक्तियां सच साबित होती रहती हैं कि ……

क्यों है इसके जीवन में इतना हाहाकार?
क्यों नहीं इसे स्वतंत्रता का अधिकार?
क्यों बढ़ता जाए इस पर परिस्थितियों का अत्याचार?
क्यों होता रहे इसके मान-सम्मान का पल-पल बलात्कार?
है तमन्ना मिलकर करें सब महिलाओं का सत्कार।

मैं यह भी नहीं कहना चाहती कि सभी महिलाओं ने घर से बाहर जाकर हर क्षेत्र में अपना नाम ऊंचा किया है ।मैं तो सिर्फ इतना ही कहूंगी कि अगर पुरुषों ने अपने सामाजिक दायरे को बढ़ाया है तो उसके पीछे भी एक स्त्री का मजबूत और भावनात्मक सहयोग छुपा हुआ है । क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि अगर गृहणी अपने परिवार को पूरा सम्मान नहीं देती , बच्चों की पढ़ाई की ओर ध्यान नहीं देती , सास-ससुर को माता पिता का दर्जा ना देती , देवर-ननद को भाई-बहन जैसा प्यार ना देती तो क्या पुरुष निश्चित होकर इन सब दायित्वों का निर्वाह करते हुए अकेला ही सब कार्य कर सकता था ? जी नहीं बिल्कुल नहीं ,क्योंकि आज का पुरुष भी नारी के सहयोग के बिना अधूरा ही है।
सच पूछो तो नारी को हम सर्वगुण संपन्न होने का दर्जा दे सकते हैं क्योंकि वह अपने सामाजिक दायित्व का निर्वाह करते हुए, घर परिवार का पूरा ख्याल रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों में अपना एक महत्वपूर्ण योगदान दे रही है ।अगर नारी कहीं नौकरी भी करती है तो वह अपने घर के दायित्वों का पूर्ण रूप से निर्वाह करते हुए अपने कर्म क्षेत्र को भी अपनाती है। गृहस्थ जीवन के दो पहिये माने गये है, एक पहिया पुरुष है तो दूसरे पहिये का स्थान नारी को हासिल है क्योंकि उसके बिना गृहस्थ जीवन अथवा परिवार की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।
उन बच्चों से पूछिए जिनके सर पर मां का हाथ नहीं है , उन पुरुषों से पूछिए जिनकी जीवन-संगिनी का अकस्मात निधन हो गया है , वे आप सभी को भली-भांति समझा सकते हैं कि जीवन में स्त्री का महत्व हर एक रिश्ते में कितना जरूरी है। मैं भी एक नारी हूं इसलिए नारी के रूप में निर्वाह किए गए अपने कर्तव्यों का मुझे पूर्ण ज्ञान है। मैं यह नहीं कह सकती कि नारी में कोई कमी नहीं होती पर अगर उसमें कोई कमी रह जाती है , तो वह उस कमी की पूर्ति अपनी दूसरी खूबी से कर लेती है।
एक नारी पुरुष के सहयोग के बिना भी अपना जीवन, अपना परिवार कुशल तरीके से चला सकती है यही उसकी पहचान है ।
भारतीय इतिहास से लेकर आज के वर्तमान युग तक हम नारी द्वारा किए गए कार्यों को भली-भांति देख सकते हैं…
क्या हम झांसी की रानी के कौशल्य और वीरता को भुला सकते हैं ?
क्या हम इंदिरा गांधी द्वारा पाकिस्तान के दो टुकड़े करने वाले साहसिक कार्य को विसरा सकते हैं ?
क्या हम हमारे देश की पूर्व रक्षा मंत्री और वर्तमान में वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण की देश को मजबूती देने और उनके बुलन्द इरादों को हम अनदेखा कर सकते है?
मैं अगर नारी शक्ति की व्याख्या करने बैठूंगी तो शायद कागज भी कम पड़ जाएंगे । कहने का एक छोटा सा अर्थ यह है कि , आज महिला दिवस के उपलक्ष में नारी के छोटे से योगदान को भी हमें याद रखना चाहिए ।
सभी स्त्रियों को महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं….
आज के दिन नारी शक्ति से बस इतनी सी गुजारिश है कि वे अपने परिवार , समाज और देश के लिए अपने अंदर का बेहतर अर्पण करें और स्वयं को अबला न समझें क्योंकि अबला नहीं सबल है हम….

मैं भी एक नारी………
 तमन्ना मतलानी
गोंदिया -४४१६०१
महाराष्ट्र

Related Posts

विश्व के हालात -कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी

January 24, 2022

 विश्व के हालात  विश्व आर्थिक मंच 2022 – भारत ने दुनिया को लोगों के लिए आशा से भरा हुआ बुके

सनातन धर्म और प्रकृति- जयश्री बिरमी

January 17, 2022

 सनातन धर्म और प्रकृति अगर हम कोई तेहवार मना रहें हैं तो पक्की बात हैं कि हम प्रकृति के साथ

कामयाबी की मंजिल , आखिर क्यों है दूर…?

January 16, 2022

नन्हीं कड़ी में….    आज की बात     कामयाबी की मंजिल , आखिर क्यों है दूर…? आज का आधुनिक समाज

कोरोना पीक़ – ईसीआई की बंदिशें बिल्कुल ठीक

January 16, 2022

 कोरोना पीक़ – ईसीआई की बंदिशें बिल्कुल ठीक  आदर्श आचार संहिता, कोविड के समग्र दिशानिर्देशों के पालन में सभी राजनीतिक

उठाओ सुदर्शन मत बनो कृष्ण-जयश्री बिरमी

January 16, 2022

 उठाओ सुदर्शन मत बनो कृष्ण क्यों देखनी हैं सो गलतियों की राह अब?   हद हो गई हैं अपने आत्मसम्मान

पढ़े भारत अभियान

January 16, 2022

पढ़े भारत अभियान बच्चों को वास्तविक जीवन से जोड़ने, शिक्षा में रचनात्मकता, चिंतन, अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित करना ज़रूरी पढ़े

Leave a Comment