Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

महा आराधना पर्व हैं चैत्री नवरात्रि

 महा आराधना पर्व हैं चैत्री नवरात्रि सनातन धर्म के मूल में दोनों का   –आस्था और अर्चना– अप्रतिम स्थान हैं।आराधना से …


 महा आराधना पर्व हैं चैत्री नवरात्रि

महा आराधना पर्व हैं चैत्री नवरात्रि
सनातन धर्म के मूल में दोनों का   –आस्था और अर्चना– अप्रतिम स्थान हैं।आराधना से ही दैवीय गुणों का प्रत्यार्पण होता हैं। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा कर इन दिनों उन्हे प्रसन्न किया जाता हैं।वैसे साल में चार बार ये नौ रातों का त्यौहार आता हैं जिसमे शारदीय नौ रातों का महत्व कुछ खास ही हैं।

प्रथमम शैलपुत्री च द्वितियम ब्रह्मचारिणी।

तृतियम चंद्रघंटेति कूषमंडेति चतुर्थकम।।

पंचमम स्कंधमयेति शष्टम कात्यायनीति च।

सप्तमम कालरात्रि महागौरी चष्टमं।।

नवमम् सिद्धिदात्री नवदुर्गा प्रकीर्तिता।

उक्तान्येतानि नमामि ब्राह्मणऐव महात्मन।।

इन दिनों मातारानी की उपासना,आराधना का खास महत्व होता हैं।कुछ भक्त तो अनुष्ठान करके उपवास और आराधना का समन्वय कर भक्ति में लीन रहते हैं।चैत्रि नौरात्रि नवसवंस्तर का प्रथम पर्व होने से उसका धार्मिक महत्व कुछ बढ़ जाता हैं।ब्रह्म पुराण के कहे अनुसार नौरात्री के पहले दिन आदिशक्ति प्रगट हुई थी।माना जाता हैं कि देवी के आदेश से ब्रह्मा जी ने चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन ही विश्व रचना की शुरुआत की थी।मत्स्य पुराण के अनुसार चैती नौरत्र के तीसरे दिन प्रभु ने मत्स्य अवतार धारण कर मानवों को प्रलय से बचाया था। चैत्री नवरातों में ही रामावतार में प्रभु प्रगट हुए थे तो इनका महत्व और भी बढ़ जाता हैं।हमारे नौरात्रों का धार्मिक महत्व

 भक्ति और आराधना की वजह से ही हैं।नौ देवियों की पूजा अलग अलग तरीकों से की जाती हैं उनके वाहन भी अलग अलग हैं जिन्हे भी पूजा जाता हैं।वैसे ही उनके आयुध भी अलग अलग हैं जिन्हे भी पूजा जाता हैं।

नौरात्रियों  में भक्त जब मातारानी की आराधना करते हैं तो भावों से भरपूर भेंटे गा के मां के स्वरूप का साक्षात्कार करते हो वैसा भाव आ जाता हैं।लगता हैं मातारानी साक्षात सामने प्रगट हो गई हो!अपनी ही भाषा में माता रानी का स्वागत कर,उन्हे स्थान दिला ने ,प्रसाद में भांति भांति के पकवान धराने से ले कर विदा करने तक के भावों को भजन माला में पिरोते हैं।

   सामान्यत: माता रानी की भक्ति में श्री सप्तश्लोकी दुर्गा,दुर्गाष्टोत्तरशतनामस्त्रोत्रम,दुर्गा स्तुति,दुर्गा कवच, अर्गलास्त्रोत्रम, अथ कीलकम स्त्रोत्रम ,दुर्गा चालीसा,विंध्याचल चालीसा  और चंडी पाठ आदि का स्तवन किया जाता हैं।धूप–दीप और प्रसाद आदि  से मातारानी को प्रसन्न किया जाता हैं।इन्ही दिनों मां गायत्री का भी अनुष्ठान किया जाता हैं।वेदमाता गायत्री धर्म एवम संस्कृति के बीज समान हैं।इन वेदों में गायत्री मंत्र का ही वर्णन हुआ हैं।हिंदुत्व के सूत्र ग्रहण(जनेऊ) और शिखा  प्रमुख संस्कार हैं।गायत्री मंत्र को गुरु मंत्र भी कहा जाता हैं ,जिसके जाप से बुद्धि को सन्मार्ग प्राप्त होता हैं। सन्मार्ग पर चलने वाले  मनुष्यको भौतिक और आध्यात्मिक  दोनों प्रकार के लाभ होते हैं।सुख को संभाल ने की और दुःख  सहन कर मार्ग निकलने की शक्ति  मां गायत्री की आराधना से ही मिलती हैं।गायत्री मंत्र वेदों का सार हैं जिसे ऋषियों ने त्रिपदा कहा हैं जो मंत्र के तीनों आधार श्रद्धा,चरित्र और उद्देश्य हैं।इस मंत्र के जाप से ऋषि मुनियों को भी चमत्कारिक रूप से ज्ञान प्राप्त हुआ था।इन तीनों तत्वों का जीवन में समावेश जरूरी हैं।         श्रद्धा ,जिसका अर्थ हैं श्रेष्ठता से,आदर्शों से असीम प्यार होने से एक संतृप्ति की भावना पैदा होती हैं जिससे असंतुष्ट रहने से मनुष्य बच जाता हैं।जीवन में सादगी आती हैं और लाभ– हानि,सफलता– असफलता के प्रत्याघातो से बचा जा सकता हैं।श्रद्धा एक ऐसी शक्ति हैं जो मानव मन को मजबूत बनाती हैं।

चरित्र  एक महत्वपूर्ण गुण हैं मानवजीवन के लिए।कहते हैं ने अगर चरित्र गया तो सब कुछ गया।चरित्रवान मनुष्य एक स्वस्थ समाज की रचना करता हैं और स्वस्थ समाज के निर्माण से देश और नागरिकों दोनों ही विकास के पंथ पर जाते हैं। मैला ,दुष्ट और कलुषित मन स्वार्थ का उद्भव करता हैं और स्वार्थी मनुष्य पूरे समाज को गलत संदेश देता हैं।अगर चरित्र ठीक नहीं तो भगवान भी रूठे रहते हैं।दुराचारी और दुष्ट मनुष्यों से भगवान भी दूरी बनाएं रखते हैं।पूजा पाठ और यात्रा आदि कर मन पवित्र रखने से भगवान भी प्रसन्न रहते हैं,उनकी कृपा के हाथ सदा हमारे उपर बने रहते हैं।

उद्देश, गायत्री मंत्र से संलग्न तीसरी बात हैं। भगवत कृपा से प्राप्त हुई सिद्धियों का उद्देश भी पवित्र और सरल होना चाहिए।गलत कामों में उपयोग से ईश्वर नाराज हो जातें हैं इसलिए पवित्र प्राप्ति का उपयोग भी पवित्र कामों में ही होना चाहिए।

ऐसे दैवीय शक्तियों की आराधना पर्व नौरतों की सभी भारत वासियों को जय माता रानी दी।

जयश्री बिरमी

अहमदाबाद


Related Posts

प्रकृति और वायु प्रदूषण/Nature and air pollution

November 8, 2022

प्रकृति और वायु प्रदूषण/Nature and air pollution वायु की गुणवत्ता एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन गई है क्योंकि प्रदूषक फेफड़ों

वैश्विक नेतृत्व/Global leadership

November 8, 2022

वैश्विक नेतृत्व/Global leadership  भारत के वैश्विक मंचों पर नेतृत्व की भूमिका निभाने कदम बढ़े भारत 1 दिसंबर 2022 से जी-20

सकारात्मकता/positivity

November 8, 2022

सकारात्मकता /Positivity एक कौआ था बहुत ही खुश मिजाज था।जब देखो कांव कांव कर के उड़ता था और अपनी खुशी

गुरु नानक देव का 553 वां जयंती महोत्सव 8 नवंबर 2022 पर विशेष

November 8, 2022

गुरु नानक देव का 553 वां जयंती महोत्सव 8 नवंबर 2022 पर विशेष जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल

Story-बदसूरती/badsurati

November 5, 2022

Story-बदसूरती गांव भले छोटा था किंतु आप में मेल मिलाप बहुत था।सुख दुःख के समय सब एकदूरें के काम आते

Story-संसार के सुख दुःख / sansaar ke dukh

November 5, 2022

 संसार के सुख दुःख  यूं तो शिखा इनकी बहन हैं लेकिन कॉलेज में मेरे साथ पढ़ती थी तो हम भी

Leave a Comment