Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Veerendra Jain

महावीर जन्म कल्याणक (महावीर जयंती)| mahavir jayanti

महावीर जन्म कल्याणक (महावीर जयंती) निरख निरख के रूप तुम्हारा “महावीर “दिल भरता ही नहीं, तेरे चरणों से उठकर जाने …


महावीर जन्म कल्याणक (महावीर जयंती)

महावीर जन्म कल्याणक (महावीर जयंती)| mahavir jayanti
निरख निरख के रूप तुम्हारा “महावीर “दिल भरता ही नहीं,

तेरे चरणों से उठकर जाने को मन करता ही नहीं !!
सफल हो गए नरभव सबके जो भी दर्शन को पाए,
बुला रहा सौभाग्य सभी को विघ्न कोई पड़ता ही नहीं ||

रवि सम आभा मुखमण्डल पर कामदेव सी काया है,
रूप अनंग तेरा प्रभुवर जो हर प्राणी को भाया है !
बाल ब्रम्हचारी तुम स्वामी “वर्द्धमान” चारित्री हो,
“सन्मति” के जुगल पद पर हर भक्त ने शीश नवाया है ।।

इंद्रधनुष भामण्डल तेरा चंवर हवाएं ढुराती हैं
शशि रवि सम दीपक ले प्रकृति आरती तेरी गाती है |
नभ बन जाता छत्र तुम्हारा ग्रह प्रदक्षिणा देते हैं
दशों दिशाएं यशोगाथा गा अपना मान बढ़ाती हैं |

पर इन सबसे निस्पृह हो तुम आत्म ध्यान किया करते,
निर्मोही हो “वीर” प्रभु ना तन पर ध्यान जरा धरते,
वीतरागी ये छवि तुम्हारी भक्तों को मन भाती है
कर्म शत्रु सब जीत लिए सो “अतिवीर” भी कहा करते |

अतुल तुम्हारा बाहुबल पर ये ना कोई बात बड़ी,
बारह वर्षों तक कर्म निर्जरा को घोर तपस्या करी कड़ी,
जैन धर्म के अंतिम तीर्थंकर बन सार्थक जन्म किया तुमने,
शल्य रखी न ह्रदय में कोई टूट पड़ी कर्मों की लड़ी ||

सिद्धांत अहिंसा,करूणा, दया का जीवों के प्रति, सिखलाया,
“जियो और जीने दो” का उपदेश जगत में फैलाया,
हिंसा और विध्वंस ने विश्व में जब जब पैर पसारा है
वर्तमान में “वर्द्धमान” को सारी धरा ने पुकारा है।।

शीश झुकाकर तुव चरणन में यही भावना हम भाएं,
“महावीर” सम हम भी मोक्षमार्ग में निराबाध चलते जाएं,
मोह कषाय की विषबेलों से अब तक तो हम जकड़े हैं,
बाहुबलि बन जाएं यहां सभी कर्म के बंधन कट पाएं |

About author 

Veerendra Jain, Nagpur
Veerendra Jain, Nagpur
Veerendra Jain, Nagpur
Instagram id : v_jain13

Related Posts

Vijay divash kavita by Sudhir Srivastava

July 31, 2021

 विजय दिवस बहुत गर्व है हमें अपने जाँबाजों,रणबांकुरों पर जिनके हृदय में हिंदुस्तान बसता है, जिनका हौसला चट्टान सा शरीर

Sawan aur shiv kavita by Dr Indu kumari

July 31, 2021

 सावन और शिव पहला सावन और सोमवार बरसती है शिव का प्यार रिमझिम- रिमझिम हो फुहार भक्ति की बहती बयार

Pyar tumse bahut chahti thi by antima singh

July 31, 2021

 शीर्षक- प्यार तुमसे बहुत चाहती थी। प्यार तुमसे तुम्हारा बहुत चाहती थी, बोलो ना..ये क्या मैं गलत चाहती थी……..? माना, खूबसूरत

mitti ka chulha by deepak sharma

July 31, 2021

 मिट्टी का चूल्हा         1 जब आया था मेरे घर में उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलेंडर

Aadhunik bhagwan kavita by Jitendra Kabir

July 31, 2021

 आधुनिक भगवान पौराणिक किस्से-कहानियों में पढ़ा-सुना था – भगवान सत्य बोलने वालों की परीक्षा कड़ी लिया करते थे, तो देखो

Satringi sapne kavita by indu kumari

July 31, 2021

 शीर्षक- सतरंगी सपने   सतरंगी सपने सजाओ मेरे लाल दिखा दुनिया को करके कमाल अनवरत रूप से करो प्रयास मंजिल

Leave a Comment