Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jitendra_Kabir, poem

महापुरुषों का नाम भुना लिया हैै-जितेन्द्र ‘कबीर’

महापुरुषों का नाम भुना लिया है वक्त गुजरने के साथसच्ची, सरल शिक्षाओं कोरूढ़ करके सदियों के लिएजटिल हमनें बना लिया …


महापुरुषों का नाम भुना लिया है

महापुरुषों का नाम भुना लिया हैै-जितेन्द्र 'कबीर'

वक्त गुजरने के साथ
सच्ची, सरल शिक्षाओं को
रूढ़ करके सदियों के लिए
जटिल हमनें बना लिया है,
महापुरुषों के
सच्चे उपदेशों को
अपने स्वार्थ में अंधे हो कर
अब हमनें भुला दिया है,
याद करते हैं सब उन्हें
चतुर बनकर
लोगों को अपने पक्ष में
गोलबंद करने के लिए केवल,
जनहित का उनका आह्वान
किनारे हमने लगा दिया है,
सब महापुरुषों ने उपदेश दिए
प्रेम, शांति और भाईचारे के,
उनको अघोषित तौर पर हमने
गुनाह एक ठहरा दिया है,
विरोध मूर्ति पूजा का किया
जिन महापुरुषों ने,
मूर्तियां उनकी ही बनाकर
भगवान उन्हें बना दिया है,
जाति-धर्म का खंडन करने
वालों पर भी
किसी विशेष जाति-धर्म का
लेबल हमने चिपका दिया है,
अपनी जिंदगी में उनके
अच्छे विचारों पर चलते नहीं,
बस अपने स्वार्थ के लिए
जहां जहां हो सकता है वहां
उनका नाम हमने भुना लिया है।
लड़ते हैं अब अपनी जाति और
धर्म के महापुरुष के नाम पर
आपस में सब,
इंसानियत बचाने वालों को ही
इंसानियत खत्म करने का
हथियार हमने बना लिया है।
जितेन्द्र ‘कबीर
यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति-अध्यापक

पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

Kavita :बेशुमार इश्क | Beshumar ishq

October 8, 2023

बेशुमार इश्क सुनो दिकु…… मेरी यह बेकरारी, मेरा ये जुनूनवो मेरी तड़पन, बन्द आखों में  तुम्हारी गोद में सर रखने

करवा चौथ पर कविता

October 6, 2023

करवा चौथ भूख नहीं लगती है स्त्री को, करवाचौथ निभाने में,चाहे कितनी देर लगा ले चाँद आज नज़र आने में,उम्र

कविता –रौंद मुझे हंसने वाले

October 6, 2023

रौंद मुझे हंसने वाले मेरे लबों कि मुस्कुराहट लगता अब तो जैसे कहीं खो गई।यूं लगे मुझको की मेरी कलम

कविता -मेरी आवाज़ | meri aawaz kavita

October 4, 2023

कविता -मेरी आवाज़ | meri awaz kavita सुनो दिकु…. एक दिन वह सवेरा ज़रूर आएगाजो तुम तक मेरी आवाज़ पहुंचाएगा

कविता –उम्मीद | kavita -ummid

September 26, 2023

उम्मीद  जीवन की राह मेंएक युद्ध सा लड़ता जाता हूं उम्मीद बहुत ज्यादा की मुझे हाथ में कुछ नही पाता

कविता – नारी | kavita Naari| naari par kavita

September 23, 2023

कविता – नारी | kavita Naari| Naari par kavita  जिम्मेदारियों का बोझ जिसके सरहोता हैवही जानता है कैसे गुजर –

PreviousNext

Leave a Comment