Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

मन स्वस्थ्य है तो तन स्वस्थ है

 मन स्वस्थ्य है तो तन स्वस्थ है!!  मनुष्य के पास मन की संकल्प शक्ति यह एक महत्वपूर्ण अस्त्र है, जिसके …


 मन स्वस्थ्य है तो तन स्वस्थ है!! 

मन स्वस्थ्य है तो तन स्वस्थ है
मनुष्य के पास मन की संकल्प शक्ति यह एक महत्वपूर्ण अस्त्र है, जिसके दम पर स्वास्थ्य सहित हर क्षेत्र में बड़ी जीत हासिल की जा सकती है!! 

तन और मन दोनों की स्वस्थ्यता, जीवन में सफलता के साथ आनंदमय जीवन जीने का भी सूत्र है – एड किशन भावनानी

गोंदिया – सृष्टि के अनमोल हीरे मानव प्रजाति में उसकी रचना करने वाले ने अदभुत गुणों की खान सृजित की है बस!! हमें अपनीं अनमोल कुशाग्र बुद्धि से उसे पहचान कर अपने जीवन में ढालना है, तो फिर हर कोई कहेगा देखो क्या खूबसूरत सुखी जिंदगी है!! अपने आप में, परिवार, मोहल्ले, समाज में ही हम सतयुग का माहौल बना कर अति सुख चैन से अपने जीवन के अनमोल क्षणों को बिता सकते हैं साथियों, अनेक गुणोंमें से एक गुण संकल्प शक्ति जिसका मन और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा हम आर्टिकल के माध्यम से करेंगे 

साथियों बात अगर हम अपने इस मानव शरीर की करें तो मन स्वस्थ है तो तन स्वस्थ है मन का संकल्प मनुष्य की आंतरिक शक्ति है। मानव शरीर यदि रथ के समान है तो यह मन उसका चालक है। मनुष्य के शरीर की असली शक्ति उसका मन है। मन के अभाव में शरीर का कोई मूल्य ही नहीं है। मन ही वह प्रेरक शक्ति है जो मनुष्य से बड़े-बड़े काम करवा लेती है। यदि मन में दुर्बलता का भाव आ जाए तो शक्तिशाली शरीर और विभिन्न प्रकार के साधन भी व्यर्थ हो जाते हैं। मन बहुत बलवान है। शरीर की सब क्रियाएं मन पर निर्भर करती है । यदि मन में शक्ति, उत्साह और उमंग है तो शरीर भी तेजी से कार्य करता है। अतः व्यक्ति की हार जीत उसके मन की दुर्बलता सबलता पर निर्भर है। 

साथियों शारीरिक दृष्टि से दुर्बल एवं हीन होते हुए भी दृढ़ निश्चयी व्यक्ति ऐसे-ऐसे कार्य कर जाया करते हैं कि उनकी असाधारणता पर विस्मय-विभोर होकर रह जाना पड़ता है!! सामान्यतः साधारण प्रतीत होने वाले व्यक्ति भी अपनी संकल्प शक्ति के बल से भयावह तूफानों तक का मुँह मोड़ देने में सफल हो जाया करते हैं। मनोविज्ञान का मानना है कि वनस्पति जाग्रत रहती है पशु सोते है पत्थर में भी चेतना सोती है और मनुष्य विचार चिन्तन करता है इसलिए यह इन अन्य सजीवों तथा निर्जीवों से भिन्न हैं। चिन्तन एवं मनन करना इन्सान की विशेषता है जिनका सीधा सम्बन्ध मन से होता है।

साथियों संकल्प शक्ति का प्रयोग किए बिना व्यक्ति कोशिश किए बिना ही पहले ही हार स्वीकार कर लेते हैं । धीरे-धीरे उनमें यह भावना बैठ जाती है कि वे कभी भी जीत नहीं सकते हैं । वहीं दूसरी ओर सफल व्यक्ति हमेशा आशावादी व कर्मवीर होते हैं । वे जीत के लिए हमेशा प्रयास करते हैं ।जब तक हमारा मन शिथिल है तब तक हम कुछ भी नहीं कर सकते। मनुष्य का जीवन खेल के मैदान के समान है। यहाँ हर व्यक्ति खिलाड़ी है। खेल में विजय प्राप्त करने के लिए खिलाड़ी को चुस्त और तंदुरुस्त होने के साथ-साथ अपने-आप पर भरोसा भी होना चाहिए। जिसका मन मजबूत होता है, वही सच्चे अर्थों में तंदुरुस्त और अपने-आप पर भरोसा रखनेवाला होता है।

साथियों बात अगर हम मन के बारे में ऐतिहासिक कबीर श्लोकों की करें तो 

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। 

कहे कबीर हरि पाइए मन ही की परतीत।। 

अर्थात- जीवन में जय और पराजय केवल मन के भाव हैं। यानी जब हम किसी कार्य के शुरू में ही हार मान लेते हैं कि हम सचमुच में ही हार जाते हैं। लेकिन अपनी मंजिल के लिए जब जूझते हैं, बार-बार गिर कर खड़े होते हैं तो हमारा आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है। इसके बाद जब मंजिल मिलती है, तो उसकी खुशी कई गुना होती है। इसलिए आपकी जीत या हार को कोई और तय नहीं कर सकता है। यह खुद आपके ऊपर निर्भर करता है। यही बात इस कहानी में भी बताई गई है। यह कहावत किसी व्यक्ति के जीवन की तरह किसी देश या राष्ट्र के बारे में भी सत्य सिद्ध होती है। किसी देश या राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत उस देश के निवासियों की प्रबल इच्छाशक्ति में रहती है। 

साथियों इसीलिए आत्मविश्वास की बात कही जाती है। अखबारों में हम अपनी क्रिकेट टीम की हार का कारण पढ़ते हैं, तो यही पढ़ते हैं कि खिलाड़ी अपना मनोबल बनाए नहीं रख सके। या तो वे अतिउत्साह में आ गए या फिर निराशा में। मन की इन दोनों स्थितियों का शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। शरीर को इस बात से कोई लेना-देना नहीं होता कि उसके अंदर उत्साह की तरंगें पैदा हो रही हैं या निराशा की। उसको तो तरंगों से मतलब है। निराशा की तरंगों से उसकी शक्ति विखंडित हो जाती है। इसका परिणाम पराजय में होता है। इसलिए बहुत जरूरी है कि हम संतुलित रहें। 

साथियों बात अगर हम मन स्वस्थ है तो तन स्वस्थ है की करें तो, स्वस्थ और तंदरुस्त रहना हमारे दैनिक कार्यों को पूरा करने में मदद करता है। स्वस्थ्य रहने का अर्थ रोग रहित तन का होना ही नहीं, बल्कि तनावमुक्त मन का होना भी है। यदि एक व्यक्ति अस्वस्थ मन रखता है, तो वह अपने शरीर को स्वस्थ नहीं रख सकता है। शरीर और मन दोनों की स्वस्थता जीवन में सफलता के साथ आनंदमय जीवन जीने का सूत्र है। हमें अपने शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने के लिए सभी बिन्दुओं के बारे में जागरुक होने की आवश्यकता है। 

कुछ लोग बहुत अच्छे से जानते हैं कि शरीर को साफ-सुथरा और स्वस्थ कैसे रखा जाता है, लेकिन मन में घूम रही परेशानियों की वजह से उन्हें स्वस्थ रहने के लाभ नहीं मिल पाते हैं। मानसिक तनाव धीरे-धीरे शारीरिक स्वास्थ्य को कमजोर कर देता है। ऐसे में जरूरी है हम कि शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी गंभीर रहें। इसके लिए आलस्य को त्यागकर ध्यान व व्यायाम दोनों का सहारा लिया जाना चाहिए। स्वस्थ मन से बनता है स्वस्थ तन, स्वस्थ तन से बनता है स्वस्थ जीवन और स्वस्थ जीवन से बनेगा स्वस्थ भारत!! 

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि मन स्वस्थ है तो तन स्वस्थ्य हैं!!मनुष्य के पास मन की संकल्प शक्ति यह एक महत्वपूर्ण अस्त्र है जिसके दम पर स्वास्थ्य सहित हर क्षेत्र से बढ़ी जीत हासिल की जा सकती है!!तन और मन दोनों की स्वस्थता जीवन में सफलता के साथ आनंदमय जीवन जीने का भी एक सूत्र है!! 

संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

हम और हमारी आजादी-जयश्री बिर्मी

November 22, 2021

हम और हमारी आजादी कंगना के बयान पर खूब चर्चे हो रहे हैं लेकिन उनके  बयान  के आगे सोचे तो

358 दिन के आंदोलन से हुई लोकतंत्र की जीत

November 22, 2021

 किसान एकता के आगे झुकी सरकार, हुई कृषि कानून की वापसी 358 दिन के आंदोलन से हुई लोकतंत्र की जीत

Kya sayana kauaa ….ja baitha by Jayshree birmi

November 17, 2021

 क्या सयाना कौआ………जा बैठा? हमे चीन को पहचान ने के लिए ज्यादा कोशिश नहीं करनी पड़ती।हम १९६२ से जानते है

Sanskritik dharohar ko videsho se vapas lane ki jarurat

November 13, 2021

 भारत की अनमोल, नायाब, प्राचीन कलाकृतियां, पुरावशेष और सांस्कृतिक धरोहरों को विदेशों से वापस लाने की जांबाज़ी हर शासनकाल में

Bal diwas he kyo? By Jayshree birmi

November 12, 2021

 बाल दिवस ही क्यों? कई सालों से हम बाल दिवस मनाते हैं वैसे तो दिवस मनाने से उस दिन की

Bharat me sahitya ka adbhud khajana by kishan bhavnani gondiya

November 12, 2021

भारत में साहित्य का अद्भुद ख़जाना –   साहित्य एक राष्ट्र की महानता और वैभवता दिखाने का एक माध्यम है 

Leave a Comment