Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

मन- डॉ.इन्दु कुमारी

 मन रे मन तू चंचल घोड़ासरपट दौड़ लगाता हैलगाम धरी नहीं कसकेत्राहि त्राहि मचाने वाली जीवन की जो हरियालीपैरों तले …


 मनमन- डॉ.इन्दु कुमारी

रे मन तू चंचल घोड़ा
सरपट दौड़ लगाता है
लगाम धरी नहीं कसके
त्राहि त्राहि मचाने वाली

जीवन की जो हरियाली
पैरों तले कुचल डाली
बेभट कर कहीं न छोड़ा
रे मन तू चंचल है घोड़ा।

मन के अंदर है मालिक
वही उनके है नाविक
छोड़ी पतवार ले डूबेगी
फजीहत करवा ही डाली

कहाँ जाएगा कोई न जाने
फुदक -फुदक कर तूने
हर सीमा लाँघ ही डाली
मन के साथ जो रे दौड़े

उनके भगवान है मालिक
नकेल कसनी है मन की
सद्गुण में इसको रमाओ
सदयुक्ति के वशीकरण से

संत शरण गली ले जाओ
रे मन इतना ना भरमाओ।

          डॉ.इन्दु कुमारी 
                मधेपुरा बिहार


Related Posts

कविता -गँवईयत अच्छी लगी

June 23, 2022

 कविता -गँवईयत अच्छी लगी सिद्धार्थ गोरखपुरी माँ को न शहर अच्छा लगा न न शहर की शहरियत अच्छी लगी वो

कविता – बचपन पुराना रे

June 23, 2022

 कविता – बचपन पुराना रे सिद्धार्थ गोरखपुरी ढूंढ़ के ला दो कोई बचपन पुराना रे पुराना जमाना हाँ पुराना जमाना

ये ख्वाब न होते तो क्या होता?

June 23, 2022

 कविता – ये ख्वाब न होते तो क्या होता? सिद्धार्थ गोरखपुरी झोपड़ी में रहने वाले लोग जब थोड़े व्यथित हो जाते

रक्त की बूँद!!!!

June 23, 2022

 रक्त की बूँद!!!! अनिता शर्मा रक्त की हर बूंद कीमती,रक्तदान जरूरी है।कीमती हर जान रक्त से,रक्त दान जरूरी है। समय-समय

“श्रृंगार रस”

June 22, 2022

 “श्रृंगार रस” वो लम्हा किसी नाज़नीन के शृंगार सा बेइन्तहाँ आकर्षक होता है, जब कोई सनम अपने महबूब की बाँहों

खालसा-हरविंदर सिंह ”ग़ुलाम”’

June 5, 2022

 खालसा अंतर्मन में नाद उठा है  कैसा ये विस्माद उठा है  हिरण्य कश्यप के घर देखो  हरी भक्त प्रह्लाद उठा

PreviousNext

Leave a Comment