Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jitendra_Kabir, poem

मन के हारे हार- जितेन्द्र ‘कबीर’-

मन के हारे हार हार भले ही कर ले इंसान कोकुछ समय के लिए निराशलेकिन वो मुहैया करवाती है उसकोअपने …


मन के हारे हार

मन के हारे हार- जितेन्द्र 'कबीर'-

हार भले ही कर ले इंसान को
कुछ समय के लिए निराश
लेकिन वो मुहैया करवाती है उसको
अपने अंतर्मन में झांकने का
दुर्लभ अवसर,
संघर्ष की राह चल पाए वो अगर
अपनी कमियां सुधार कर
तो कामयाबी करती है
उसका वरण।
जीत भले ही कर ले इंसान को
कुछ समय के लिए खुश
लेकिन वो लाती है अपने साथ
जिम्मेदारी भी
उस कामयाबी को बरकरार रखने की,
और यकीन मानों!
कामयाबी बरकरार रखने का संघर्ष भी
चैन से बैठने नहीं देता
कभी इंसान को,
सच तो यह है कि खोने का डर
ज्यादा बेचैनी वाला अहसास है
पाने की उम्मीद के सामने
हर हाल में।

जितेन्द्र ‘कबीर’
यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति-अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


Related Posts

कविता-प्रशासनिक स्तरों पर जवाबदेही ज़रूरी

April 30, 2022

कविता-प्रशासनिक स्तरों पर जवाबदेही ज़रूरी हर प्रशासकीय पद की ज़वाबदेही व्यवहारिक रूप से ज़रूरी है कागजों में दर्ज ज़वाबदेही को

प्रेम की महक आ गई-कविता

April 30, 2022

नन्हीं कड़ी में…. आज की बात प्रेम की महक आ गई महफिलों की चाहत थी,तन्हाई वो निभा गई, साथ था

जीवन तथ्य!

April 27, 2022

जीवन तथ्य! बिखरने के बाद भीनिखरना एक अदा है,बिछड़ने के बाद भी,हम स्वयं के सदा हैं! खुशी हो या गम,जीना

वाह क्या किस्मत पाई है!

April 27, 2022

 वाह क्या किस्मत पाई है! रात रात भर जाग के, की उसने मेहनत ,  जीते बहुत से पुरस्कार और परिश्रम

कविता आज़ाद

April 27, 2022

 आजाद! आजाद विचार, आजाद ख्याल, आजादी से जी ले हर एक साल, आजाद सी दुनिया, आजाद सी ढाल, आजाद हो

पीछे छूटा! -कविता

April 27, 2022

पीछे छूटा! -कविता मुड़ कर ना देखो, जो पीछे छूट गया,आगे बढ़कर लिखो,अपना भविष्य नया! कुछ छुटने का क्या पछतावा,सब

PreviousNext

Leave a Comment