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Jitendra_Kabir, poem

मन के हारे हार- जितेन्द्र ‘कबीर’-

मन के हारे हार हार भले ही कर ले इंसान कोकुछ समय के लिए निराशलेकिन वो मुहैया करवाती है उसकोअपने …


मन के हारे हार

मन के हारे हार- जितेन्द्र 'कबीर'-

हार भले ही कर ले इंसान को
कुछ समय के लिए निराश
लेकिन वो मुहैया करवाती है उसको
अपने अंतर्मन में झांकने का
दुर्लभ अवसर,
संघर्ष की राह चल पाए वो अगर
अपनी कमियां सुधार कर
तो कामयाबी करती है
उसका वरण।
जीत भले ही कर ले इंसान को
कुछ समय के लिए खुश
लेकिन वो लाती है अपने साथ
जिम्मेदारी भी
उस कामयाबी को बरकरार रखने की,
और यकीन मानों!
कामयाबी बरकरार रखने का संघर्ष भी
चैन से बैठने नहीं देता
कभी इंसान को,
सच तो यह है कि खोने का डर
ज्यादा बेचैनी वाला अहसास है
पाने की उम्मीद के सामने
हर हाल में।

जितेन्द्र ‘कबीर’
यह कविता सर्वथा मौलिक अप्रकाशित एवं स्वरचित है।
साहित्यिक नाम – जितेन्द्र ‘कबीर’
संप्रति-अध्यापक
पता – जितेन्द्र कुमार गांव नगोड़ी डाक घर साच तहसील व जिला चम्बा हिमाचल प्रदेश
संपर्क सूत्र – 7018558314


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