Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Mohit Tripathi, poem

मनोविकार | manovikar

 मनोविकार उठता जब शत्रु मनोविकार फ़ैल भयंकर दावानल-सा।  काम, क्रोध, लोभ, मोह से संचित पुण्यों को झुलसा। मन से उपजा …


 मनोविकार

उठता जब शत्रु मनोविकार
फ़ैल भयंकर दावानल-सा। 
काम, क्रोध, लोभ, मोह से
संचित पुण्यों को झुलसा।
मन से उपजा वाणी में उतरा 
करता दूषित आचार-विचार।
व्यक्तित्व, चरित्र पतन-कारक
करता जन-मानस को दो चार 
उठता जब शत्रु मनोविकार।

About author

मोहित त्रिपाठी
संक्षिप्त परिचय: कवि, लेखक, शिक्षक एवं समाजसेवी इंजी. मोहित त्रिपाठी। 27 फरवरी 1995 को वाराणसी में जन्म। बी.टेक एवं एम. टेक. की उपाधि प्राप्त की। मोहित त्रिपाठी वाराणसी में एक शिक्षण एवं समाज सेवी संस्था विज़डम इंस्टिट्यूट ऑफ़ एक्सीलेंस के संस्थापक और निदेशक हैं मोहित अध्ययन-अध्यापन के साथ साहित्यिक एवं सम-सामयिक लेखन में भी सक्रिय हैं। हिंदी साहित्य में गहरी रूचि। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में 100 से अधिक रचनाएँ प्रकाशित। सम्प्रति: वाराणसी में निवास। कई अंतरराष्ट्रीय शोध-पत्र प्रकाशित। अनेक संस्थाओं एवं संगठनों से जुड़े रहे हैं।
 संपर्क सूत्र–mohittripathivashisth27@gmail.com
पता: सरोज भवन डी 36/123 अगस्त्यकुंड, दशाश्वमेध, वाराणसी, उत्तर प्रदेश-221001

Related Posts

बलात्कार

June 24, 2022

 बलात्कार डॉ. इन्दु कुमारी  दरिंदगी की पहचान है  समाज का अभिशाप है  गंदगी की अंबार है  संकुचित विचारों का  गंदी

पृथ्वी दिवस

June 24, 2022

 पृथ्वी दिवस डॉ. इन्दु कुमारी  वसुंधरा को आइए  पेड़ों से सजाइए  वन बागों से इस धरा पर  जीवन की फसलें

प्रकृति के आंचल

June 24, 2022

 प्रकृति के आंचल डॉ. इन्दु कुमारी  प्रकृति हमारी हम प्रकृति के  सजाएंगे हम तो पाएंगे हम  लगाएंगे हम खाएंगे हम 

बुढ़ापे की मुंडेर

June 24, 2022

 बुढ़ापे की मुंडेर डॉ. इन्दु कुमारी  जन्म लिए बचपन बीते  खुशियों के होंठ खिले  बचपन के छोटे पौधे  फूल रूप

बेटी हुई

June 24, 2022

 बेटी हुई  डॉ. इन्दु कुमारी धीमी आवाज में  कहते बेटी हुई।  पापा देखो तेरी बेटी  आईपीएस की  टॉपर हुई। जिसका

मेघा रे

June 24, 2022

 मेघा रे डॉ. इन्दु कुमारी  मेघा रे कहां तक तुझे जाना रे  मेरे संदेश को ले जाना रे   जिन राहों

PreviousNext

Leave a Comment