Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr. Alpa. H. Amin, poem

मनमीत रे करनी हैं तुझ संग प्रीत रे | manmeet re karni hai tujh sang Preet re

 मनमीत रे करनी हैं तुझ संग प्रीत रे  मनमीत रे करनी हैं तुझ संग प्रीत रे  जाने है हम तू …


 मनमीत रे करनी हैं तुझ संग प्रीत रे 

मनमीत रे करनी हैं तुझ संग प्रीत रे | manmeet re karni hai tujh sang Preet re

मनमीत रे करनी हैं तुझ संग प्रीत रे 

जाने है हम तू चाहे हमें बेहद रे 

बिन तेरे हमें भी जीना न आये रे 

चाहत की बगियाँ चहके रे 

उसमें तेरी खुश्बू महके रे 

मुझे भाये मीत वो संगत रे 

मनमीत रे करनी हैं तुझ संग प्रीत रे 

हमदम, हमसफ़र, हमकदम तु रे 

तेरे साथ ही कटे सफ़र रे 

निगाहें भी सिर्फ देखे तुझे रे 

कोई और नज़ारा न उसको प्रेरे रे 

मनमीत रे करनी है तुझ संग प्रीत रे

बसा कर नैनो की गहराई में तुझे रे 

पार करना हैं जीवन सागर रे 

जन्म जन्म तक रहे मिलन रे 

न हो कोई दुसरा संसय रे 

मुझे पसंद वो संगम रे 

मनमीत रे करनी है तुझ संग प्रीत रे

मुस्कान चेहरे पे बिखरे रे  

जब हो तुम मेरे करीब रे 

हर भाव वो करता बयां रे 

उसी कारण वो निखर जाता रे  

प्रगट करे हर उमंग रे 

मनमीत रे करनी है तुझ संग प्रीत रे

धड़कने दिल की धड़के रे 

हर सांस पे तेरा राज रे 

आ जाता हैं लबों पे तेरा नाम रे 

तुझ बिन कहाँ जीवन रे 

तु ही मन मीत रे फैला तनमन में संगीत रे 

मनमीत रे करनी है तुझ संग प्रीत रे…….

करनी है तुझ संग प्रीत रे……

Dr. Alpa H Amin 

Ahmedabad 


Related Posts

गुरुनानक जी-सुधीर श्रीवास्तव

November 22, 2021

 गुरुनानक जी कार्तिक मास में संवत पन्द्रह सौ छब्बीस को माँ तृप्ता के गर्भ से कालू मेहता के आँगन  तलवंडी,

राजनीति की जीत-जितेंद्र कबीर

November 22, 2021

 राजनीति की जीत राजनीति की जीत है यह लोकतंत्र की जीत का मत दो इसे नाम, पहले-पहल जब उठी थी

बंदर और इंसान-जितेंद्र कबीर

November 22, 2021

 बंदर और इंसान एक दिन सारे बंदर अपने आपको इंसान घोषित कर देंगे इंसानों के ऊपर  इतिहास के साथ छेड़खानी

Swapn ujle hai by siddharth gorakhpuri

November 17, 2021

स्वप्न उजले हैं. स्वप्न उजले हैं ये कह रहा है कोई। उकेरना चाहता है हकीकत कोई। हकीकत को हकीकत होने

Manzil by Indu kumari

November 17, 2021

 मंजिल भूल जाना किसी तरह से जो  राह की  रूकावट  है सजा लेना माथे पे सदा ही जो जिन्दगी की

Peeda khone ki teri by Dr. H.K. Mishra

November 17, 2021

 पीड़ा खोने की तेरी तोड़ चली हर रस्मों को तेरा पथ ज्योतिर्मय है, मेरा क्या मैं रहा अकेला, कौन सुनेगा

Leave a Comment