Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Rakesh madhur

मधुकवि का भारत और राष्ट्र को समर्पित गीत

मधुकवि का भारत और राष्ट्र को समर्पित गीत अपने भारत सा दुनिया में कोई नहीं||भारतीयता जो गर तूने खोई नहीं|| …


मधुकवि का भारत और राष्ट्र को समर्पित गीत

अपने भारत सा दुनिया में कोई नहीं||
भारतीयता जो गर तूने खोई नहीं||

देखले मुल्क दुनिया में जितने भी हैं||
वो सभी एक दूजे को डसने को हैं||
प्यार और प्रीत जीवन में बोई नहीं||
अपने भारत सा दुनिया में कोई नहीं||

झूठे मजहब हैं सब भाव हिंसक भरे||
बोलो फिर कैसे कोई मुहब्बत करे||
देख दुनिया के दुख रूह सोई नहीं||
अपने भारत सा दुनिया दुनिया में कोई नहीं||

आज मानव ही मानव का दुश्मन हुआ||
भोगवादी हुआ स्वार्थ अन्धा हुआ||
जिंदगी भक्ति भावों से धोई नहीं||
अपने भारत सा दुनिया में कोई नहीं||

रूस यूक्रेन को है लड़ाता जहां||
देखता हर कोई पर बचाता कहां||
लोग कैसे जो उर करुणा रोई नहीं||
अपने भारत सा दुनिया में कोई नहीं||

About author 

Madhukavi Rakesh madhur

मधुकवि राकेश मधुर

गांव-चाबरखास
तहसील–तिलहर
जनपद-शाहजहांपुर यू पी

Related Posts

पहले जैसा नहीं रहा- अनिता शर्मा झाँसी

April 18, 2022

पहले जैसा नहीं रहा क्यों हर रिश्ता पहले जैसा नहीं रहा ?हाँ सोचती हूँ मैं अक्सर ही कि-क्यों हर रिश्ता

ढलता सूरज- जयश्री बिरमी

April 18, 2022

ढलता सूरज मां हूं उगते सूरज और ढलते सूरज सीउगी तो मां थी विरमी तब भी मां ही थीजब हौंसले

कविता -रश्क- सिद्धार्थ गोरखपुरी

April 13, 2022

कविता -रश्क रश्क अंतस में पाले हुए हो हजारोंचैन की अहमियत बस तुम्हें ही पता हैबेचैनी भरा दिन कैसे है

हाशिये पर इतिहास- शैलेंद्र श्रीवास्तव

March 26, 2022

हाशिये पर इतिहास ब्रह्म राक्षसबहुत छल प्रपंची होता हैवह कितनो का अंतरंग होता हैवह न किसी धर्म न पंथ न

अनेकता में एकता की नगर चौरासी-अक्षय भंडारी

March 26, 2022

अनेकता में एकता की नगर चौरासी अनेकता में एकता की नगर चौरासीहम सुनाते है एक ये प्यारी बात,ये है हमारी

रंगबिरंगा त्यौहार!-डॉ. माध्वी बोरसे

March 26, 2022

रंगबिरंगा त्यौहार! रंगो का त्योहर हे होली,खुशियों से भरदे सबकी झोली,पकवान या मिठाई के जेसे,मीठी हो जाए सब की बोली।

PreviousNext

Leave a Comment