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poem, Rakesh madhur

मधुकवि का भारत और राष्ट्र को समर्पित गीत

मधुकवि का भारत और राष्ट्र को समर्पित गीत अपने भारत सा दुनिया में कोई नहीं||भारतीयता जो गर तूने खोई नहीं|| …


मधुकवि का भारत और राष्ट्र को समर्पित गीत

अपने भारत सा दुनिया में कोई नहीं||
भारतीयता जो गर तूने खोई नहीं||

देखले मुल्क दुनिया में जितने भी हैं||
वो सभी एक दूजे को डसने को हैं||
प्यार और प्रीत जीवन में बोई नहीं||
अपने भारत सा दुनिया में कोई नहीं||

झूठे मजहब हैं सब भाव हिंसक भरे||
बोलो फिर कैसे कोई मुहब्बत करे||
देख दुनिया के दुख रूह सोई नहीं||
अपने भारत सा दुनिया दुनिया में कोई नहीं||

आज मानव ही मानव का दुश्मन हुआ||
भोगवादी हुआ स्वार्थ अन्धा हुआ||
जिंदगी भक्ति भावों से धोई नहीं||
अपने भारत सा दुनिया में कोई नहीं||

रूस यूक्रेन को है लड़ाता जहां||
देखता हर कोई पर बचाता कहां||
लोग कैसे जो उर करुणा रोई नहीं||
अपने भारत सा दुनिया में कोई नहीं||

About author 

Madhukavi Rakesh madhur

मधुकवि राकेश मधुर

गांव-चाबरखास
तहसील–तिलहर
जनपद-शाहजहांपुर यू पी

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