Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

मदर अर्थ, पृथ्वी!

 मदर अर्थ, पृथ्वी! मैं हूं सौरमंडल की सबसे सुंदर ग्रह,जहां जीव जंतु का जीवन है संभव,निवास करती है मुझ में …


 मदर अर्थ, पृथ्वी!

डॉ. माध्वी बोरसे!

मैं हूं सौरमंडल की सबसे सुंदर ग्रह,
जहां जीव जंतु का जीवन है संभव,
निवास करती है मुझ में अनगिनत प्रजातियां,
करती हूं मैं सभी प्रकार की पोषण की उपलब्धियां!

29 प्रतिशत भाग हे मेरा भूमि,
71 प्रतिशत भाग हे मेरा पानी,
हरे भरे मैदान, जंगल और पर्वत मालाएं,
नदिया, समुंदर, बर्फ की चट्टाने मुझ में समाए,!

दिया तुमको जल, हवा और अन्न,
यह शुद्ध पवन और स्वच्छ वातावरण,
सौंदर्य से भरा हुआ अनुकूल पर्यावरण,
इसके बदले तुम क्यों फैला रहे मुझ में प्रदूषण?

मुझे कहते हो धरती मां और मदर अर्थ,
हर समय मुझ में असंतुलन बना कर, कर रहे हो अनर्थ,
मुझसे ही तो होता है तुम्हारा लालन पोषण,
तो फिर क्यों नहीं करते हो मेरा संरक्षण?

मुझ में है तुम सब का निवास,
स्वयं को और मुझे बचाने का करो प्रयास,
मुझे फिर से स्वच्छ और हरी भरी बनाओ,
जिम्मेदारी और जागरूकता को बढ़ाते जाओ!!

डॉ. माध्वी बोरसे!
(स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा
)


Related Posts

पधारो म्हारो राजस्थान-डॉ. माध्वी बोरसे!

January 7, 2022

पधारो म्हारो राजस्थान! जीवंत संस्कृति, रेतीली मरुस्थलीय भूमि,  ऊंट पर बैठकर सवारी,  जब ये यादे मानस पटल पर आती,रखता है

मसूरी-जन्नत सा शहर-डॉ. माध्वी बोरसे!

January 7, 2022

मसूरी-जन्नत सा शहर! मसूरी भारत देश के उत्तराखंड राज्य का एक पर्वतीय नगर, बहुत सुहावने मौसम का अनुभव देती है

चाह-तेज देवांगन

January 7, 2022

शीर्षक – चाह हम जीत की चाह लिए,गिरते, उठते पनाह लिए,निकल पड़े है, जीत की राह में,चाहे कंटक, सूल, खार

हे नववर्ष!-आशीष तिवारी निर्मल

January 6, 2022

हे नववर्ष! तुम भी दगा न करना आओ हे नववर्ष!तुम हमसे कोई दग़ा न करना बीते जैसे साल पुराने वैसी

लाऊं तो कैसे और कहां से-जयश्री बिरमी

January 6, 2022

लाऊं तो कैसे और कहां से कहां से लाऊ वो उत्साह जो हर साल आता थाकहां से लाऊं वह जोश

बहरूपिया-जयश्री बिरमी

January 6, 2022

बहरूपिया जब हम छोटे थे तो याद आता हैं कि एक व्यक्ति आता था जो रोज ही नया रूप बना

Leave a Comment