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मतदाताओं ने पारदर्शी राजनीति पर मोहर लगाई!!!

मतदाताओं ने पारदर्शी राजनीति पर मोहर लगाई!!! उम्मीदवारों के साथ उनके नेतृत्व चेहरे की घोषणा मतदाताओं को प्रभावित करने में …


मतदाताओं ने पारदर्शी राजनीति पर मोहर लगाई!!!

मतदाताओं ने पारदर्शी राजनीति पर मोहर लगाई!!!
उम्मीदवारों के साथ उनके नेतृत्व चेहरे की घोषणा मतदाताओं को प्रभावित करने में सक्षम!!

नए भारत की नई राजनीति की शुरुआत – ग्राम पंचायत से लेकर संसद चुनाव में उम्मीदवारों का नेतृत्व का चेहरा घोषित करना समय की मांग – एड किशन भावनानी

गोंदिया – दुनिया का सबसे बड़ा और मज़बूत लोकतंत्र भारत विश्व के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी आस्था रखने का जीता जागता उदाहरण है!! जो 135 करोड़ जनसंख्या वाला देश वैश्विक स्तरपर सबसे युवा देश है। जहां पीएम को भी लोकतंत्र के इस मंदिर की सीढ़ियों पर माथा टेकते हुए सारे विश्व में देखा था! यह है हमारा लोकतंत्र!!!
साथियों बात अगर हम इस लोकतंत्र में चुनावी प्रथा, उम्मीदवारों, छोटी से लेकर बड़ी राजनीतिक पार्टियों द्वारा चुनावी रणनीतियों, राजनीति की करे तो बदलते परिपेक्ष में समय के साथ-साथ चुनावी नियमों, विनियमों में संशोधन तो होते ही हैं परंतु परिस्थितियों के अनुसार राजनीतिक पार्टियों द्वारा भी बदलते राजनीतिक, रणनीतिक और मतदाताओं के मूड पर नज़र रखकर अपनी चुनावी नीतियों रणनीतियों में बदलाव कर अपनी जीत सुनिश्चित करने की कोशिश करते हैं।
साथियों बात अगर हम वर्तमान परिपेक्ष में 10 मार्च 2022 को आए चुनाव परिणामों की करे तो इन परिणामों में सबसे महत्वपूर्ण बात यह देखने को यह मिली कि उम्मीदवारों के साथ-साथ उनके नेतृत्व चेहरे याने भावी मुख्यमंत्री की घोषणा मतदाताओं को प्रभावित करने में सक्षम हुई!!! क्योंकि मतदाताओं ने पारदर्शी राजनीति पर मोहर लगाई और हमें यह देखने को मिला कि शायद पहली बार मुख्य पार्टियों ने अपनें मुख्यमंत्री पदके उम्मीदवार की घोषणा पारदर्शिता से सार्वजनिक तौर पर की जिसपर जनता ने खुशी जाहिर कर अपने मतदान रूपी आहुति को चुनाव रूपी यज्ञ में अर्पित किया।
साथियों बात अगर हम ग्राम पंचायत अध्यक्ष से लेकर विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री, संसद चुनाव में प्रधानमंत्री के नामों की घोषणा पार्टियों द्वारा स्वस्थ प्रथा से हर बार अनिवार्य करने की करे तो यह पारदर्शिता रूपी अस्त्र में तेज़ धार करने के तुल्य होगा!मेरा मानना है कि इससे महत्वपूर्ण भावी सरकार की छवि का बोध मतदाताओं को होता है क्योंकि इससे मतदाता की सोच का दायरा बढ़ता है उसे उम्मीदवार के साथ-साथ भावी सीएम, पीएम को भी देखना होता हैं।
हालांकि भावी मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री की घोषणा का दाव हर राजनीतिक पार्टी के लिए लाभकारी नहीं भी हो सकता है! परंतु स्वस्थ, पारदर्शिता और सफल चुनावी रणनीति का वर्तमान परिपेक्ष में यह हिस्सा हो गया है!!
साथियों इस पारदर्शी राजनीति का वर्तमान पांच राज्यों के चुनाव पर प्रभाव की हम विस्तृत चर्चा प्रत्येक राज्यवार इस तरह करेंगे।
साथियों सबसे पहले बात हम पंजाब चुनाव की करें तो, विधानसभा चुनावों को लेकर सभी पार्टियों द्वारा अपनी -अपनी रणनीतियां बनाईं थीं। एक पार्टी ने अपनी पार्टी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार का नाम बताने ऑनलाइन पोल लांच किया था। इस पोल के नतीजों का एलान किया गया। इस पोल में करीब 22 लाख वोट मिले ऐसा बताया गया, जिसमें वॉइस मैसेज और एसएमएस के जरिए अपनी पसंद बतानी थी। व्हाट्सऐप और कॉल के जरिए राय बताने की सुविधा दी गई थी। उस पार्टी को उस उम्मीदवार व्यक्ति को मुख्यमंत्री घोषित करने के बाद 117 में से 92 सीटें प्राप्तहुई जो अप्रत्याशित जीत है जीवन में पहली बार उसकी उस राज्य में इतने भारी अंतरराल से जीत दर्ज करवा कर सरकार बनी जो हम कह सकते हैं कि मतदाताओं ने पारदर्शी राजनीति पर मुहर लगाई तथा उम्मीदवारों के साथ उसके नेतृत्व चेहरे की घोषणा मतदाताओं को प्रभावित करने में सक्षम हुई।हालांकि दूसरी पार्टियों ने भी सीएम पद उम्मीदवार की घोषणा की थी इससे जनता को विकल्प कर लाभ मिला।
साथियों बात अगर हम यूपी चुनाव की करें तो यहां भी मुख्यमंत्री के दावेदार की घोषणा की गई थी जहां 50 वर्षों के बाद किसी वर्तमान सरकार ने अपने पहले कार्यकाल के बाद दूसरे कार्यकाल के लिए प्रचंड बहुमतों के साथ जीत दर्ज़ करवाकर अपनी सरकार बना रहे हैं। हालांकि यहां भी दूसरी पार्टियों ने भी अपने मुख्यमंत्रियों के पद की दावेदारी को बताया था परंतु मतदाताओं ने अपने विकल्प पर मोहर लगाई और हमने देखे कि उम्मीदवारों के साथ उनके नेतृत्व चेहरे की घोषणा मतदाताओं को प्रभावित करने में सक्षम साबित हुई!!!
साथियों बात अगर हम गोवा की करें तो यहां भी पार्टियों ने अपने सीएम चेहरा घोषित किया था और मतदाताओं में इसका सकारात्मक परिणाम देखने को मिला परंतु उत्तराखंड और मणिपुर में यह अवसर मतदाताओं को नहीं मिला परिणामों को हमने देखे कि वहां इतने भारी अंतर से किसी को जीत नहीं मिली। मेरा मानना है कि यदि सीएम का चेहरा चिन्हित होता तो बहुमत का अंतर काफी बढ़ सकता था!!!
साथियों हमने देखे कि लोकतंत्र में सरकार वैचारिक संघर्ष के समाधान का उत्पाद होता है। परंतु मेरा मानना है कि वर्तमान बदलते परिपेक्ष में अब मतदाता पारदर्शी व्यक्ति और उसके मॉडल को देखने, उसकी कार्यशैली, कार्यकुशलता पर अधिक विश्वास करने लगे हैं जो हमने वर्तमान में पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ, सीएम अरविंद केजरीवाल, सीएम ममता बनर्जी, नवीन पटनायक, जगन मोहन रेड्डी, एमके स्टालिन, चंद्रशेखर राव जैसे व्यक्तित्व का वर्चस्व ऐसे नेताओं के रूप को इंगित कर रहा है इसलिए ही वर्तमान चुनाव में मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किए गए और मतदाताओं ने इस पारदर्शी राजनीति पर मोहर लगाई!!! अब उम्मीद है आगे चुनाव में मुख्यमंत्री उम्मीदवार की घोषणा को राजनीति में रणनीतिक रूप से अपनाया जाएगा। मामला यह नहीं है कि कौनसी पार्टी जीतेगी परंतु सीएम उम्मीदवार की घोषणा मतदाताओं को प्रभावित करती है जिसके सटीक उदाहरण पंजाब यूपी हैं।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि मतदाताओं ने पारदर्शी राजनीति पर मोहर लगाई!!!उम्मीदवारों के साथ उनके नेतृत्व चेहरे की घोषणा मतदाताओं को प्रभावित करने में सक्षम साबित हुई!!नए भारत की नई राजनीति की शुरुआत ग्राम पंचायत से लेकर संसद चुनाव में उम्मीदवार के साथ उनके नेतृत्व का चेहरा घोषित करना समय की मांग है।

-संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


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