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Narayan-Lal, poem

मणिपुर की अमानवीय कुकृत्य पर कविता

मणिपुर की अमानवीय कुकृत्य ने जन मानस को झकझोर कर रख दिया है। इसकी जितनी निंदा कठोर से कठोरतम शब्दों …


मणिपुर की अमानवीय कुकृत्य ने जन मानस को झकझोर कर रख दिया है। इसकी जितनी निंदा कठोर से कठोरतम शब्दों में की जाय, कम है।

मणिपुर की अमानवीय कुकृत्य पर कविता

मात्र एक कुर्सी की चाहत,
चाहे आए कोई आफत।
धधक रहा है एक इलाका,
सबके सब बैठे बन काका।
लंबे समय तक मुंह ना खोला,
अपने को जो कहते आका।
मणिपुर में हो रहा दंगा,
घुमा रहा औरत को नंगा।
बर्बरता की ऐसी घटना,
देख के मानवता शर्मिन्दा।
बर्बरता की पराकाष्ठा,
नहीं रही सत्ता में आस्था।
गुस्सा से भर जाने से,
मात्र क्रोध जताने से।
नेता की लफ्फाजी से,
पीड़ा नहीं मिटेगी जन की।
तेरे मात्र बयानों से,
लोग ना हो पाएंगे चंगा।
भारत के जन जन की चाहत,
दोषी को आ जाए सांसत।
ऐसी वहशी दरिंदे को,
फांसी से कम पर ना राहत।
मणिपुर के कुकृत्यों से,
शर्मसार आज देश हुआ है।
शासक और प्रशासक की,
बात जुड़ी कुर्सी के बाबत।
देकर सियासी बयानों से,
आंक रहे वो अपनी ताकत।
अपने हित के खातिर ये,
करते हैं उपयोग जनों का।
सत्ता के मद में हो अंधे,
सुनते नहीं वो आम जनों का।
उनके चाल चरित्र पर ,
आती है सबको अब लानत।
मात्र एक कुर्सी की चाहत,
चाहे आए कोई आफत।

About author 

@नारायण लाल 
सर्वाधिकार सुरक्षित
नई दिल्ली


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