Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr-indu-kumari, poem

भारत माता – डॉ. इन्दु कुमारी

भारत माता भारत जननी तू हो महानतूने जने हो वीर संतानसिर हिमालय की पायीचरणों को धोता सागर हैशेरों की है …


भारत माता

भारत माता -  डॉ. इन्दु कुमारी

भारत जननी तू हो महान
तूने जने हो वीर संतान
सिर हिमालय की पायी
चरणों को धोता सागर है
शेरों की है सवारी करती
उर्वरा वसुन्धरा तेरी शान
कश्मीर से कन्याकुमारी
राष्ट्र हमारी केसर क्यारी
माते तेरी अंदाज अलग है
भारत भूमि तूझे नमन है
अठखेलियाँ करती नदियाँ
गंगा यमुना सरस्वती की
संगम महासंगम की धारा
धरा की अद्भुत नजारा है
नीली धरती नीला अम्बर
सहिष्णुता में अब्बल है
धर्मसुता हो जननी जग की
जियो और जीने दो कहती

प्रेम की सदा पाठ पढ़ाती

मिलजुलकर रहना सिखाती
ऋषि मुनियों का देश है ये
आत्मा गाँवों में बसती है रे
इन पर कोई आँख दिखाए
वो नादान मुँह की खाए
तिरंगा माते, हाथों शोभती
प्रेम परमाणु चादर ओढ़ती
ये सारे है जननी के म्यान
भारत जननी तू हो महान।

डॉ. इन्दु कुमारी
मधेपुरा बिहार


Related Posts

मसूरी-जन्नत सा शहर-डॉ. माध्वी बोरसे!

January 7, 2022

मसूरी-जन्नत सा शहर! मसूरी भारत देश के उत्तराखंड राज्य का एक पर्वतीय नगर, बहुत सुहावने मौसम का अनुभव देती है

चाह-तेज देवांगन

January 7, 2022

शीर्षक – चाह हम जीत की चाह लिए,गिरते, उठते पनाह लिए,निकल पड़े है, जीत की राह में,चाहे कंटक, सूल, खार

हे नववर्ष!-आशीष तिवारी निर्मल

January 6, 2022

हे नववर्ष! तुम भी दगा न करना आओ हे नववर्ष!तुम हमसे कोई दग़ा न करना बीते जैसे साल पुराने वैसी

लाऊं तो कैसे और कहां से-जयश्री बिरमी

January 6, 2022

लाऊं तो कैसे और कहां से कहां से लाऊ वो उत्साह जो हर साल आता थाकहां से लाऊं वह जोश

बहरूपिया-जयश्री बिरमी

January 6, 2022

बहरूपिया जब हम छोटे थे तो याद आता हैं कि एक व्यक्ति आता था जो रोज ही नया रूप बना

लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत गया- तमन्ना मतलानी

January 6, 2022

नन्हीं कड़ी में…. आज की बात  लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत गया… कविता लो जिंदगी का एक और वर्ष बीत

Leave a Comment