Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

भारत-डॉ. माध्वी बोरसे!

भारत! दक्षिणी एशिया का सबसे बड़ा देश है भारत, कृषि प्रधान देश है भारत,विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है भारत,एक …


भारत!

भारत-डॉ. माध्वी बोरसे!
दक्षिणी एशिया का सबसे बड़ा देश है भारत,

कृषि प्रधान देश है भारत,
विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है भारत,
एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतान्त्रिक गणराज्य सविधान घोषित करता है भारत!

वर्तमान में 28 राज्यों तथा 8 केन्द्रशासित प्रदेशों में बँटा हुआ है भारत,
भाषाओं में विश्व के समृद्धतम देशों में से एक है भारत,
भारतीय आस्ट्रेलियाई प्लेट का उपखण्ड के ऊपर स्थित है भारत,
मुद्रा स्थानांतरण की दर से, अर्थव्यवस्था विश्व में दसवें और क्रयशक्ति के अनुसार तीसरे स्थान पर हे भारत!

चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है भारत,
फिल्म उद्योग, दुनिया की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली सिनेमा का उत्पादन करता है भारत,
भौगोलिक रूप से एशिया महाद्वीप के दक्षिण में स्थित है भारत,
कई भाषाएं, कई धर्म, कई त्यौहार, कई ऋतु और कई रंग से भरा है भारत!
कई भाषाएं, कई धर्म, कई त्यौहार, कई ऋतु और कई रंग से भरा है भारत!

डॉ. माध्वी बोरसे!
रावतभाटा (कोटा) राजस्थान !
( स्वरचित व मौलिक रचना)


Related Posts

vyakul dhara by Dr. Hare krishna Mishra

October 22, 2021

 व्याकुल धरा आज व्याकुल क्यों धरा आकाश भी बेचैन है, जलमग्न होती जा रही कैसी विवशता है धरा  ? हम

Vijaydashmi aur Neelkanth by Sudhir Srivastava

October 15, 2021

विजयदशमी और नीलकंठ हमारे बाबा महाबीर प्रसाद  हमें अपने साथ ले जाकर विजय दशमी पर हमें बताया करते थे नीलकंठ

Kash aisa ho jaye by Jitendra Kabir

October 13, 2021

 काश ऐसा हो जाए मैं सोचता हूं कि काश इस बार नवरात्रि में देवी दुर्गा जब अपने मायके  ( धरती

Jay mata di by Jay shree birmi

October 12, 2021

 जय माता दी आए हैं मेरी मां के नौरते आओ मैया के दर्शन पाए माता रानी आई हैं भक्तों ने

Maa skandmata by Sudhir Srivastava

October 12, 2021

 माँ स्कंदमाता स्कंदकुमार कार्तिकेय की माता जगत जननी का पंचम स्वरूप माँ स्कंदमाता कहलाती,  चतुर्भुजी, कमल पुष्प धारिणी वरद मुद्रा,

Gandhi ek soch by mahesh ojha

October 12, 2021

गांधी : एक सोच अटल विश्वास शान्ति प्रेम क्षमा और सत्य के मूरत, कहा सुभाष ने बापू जिन्हें अपने सम्बोधन

Leave a Comment