Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

भारत छोड़ो आंदोलन दिवस 8 अगस्त 2022 पर विशेष

भारत छोड़ो आंदोलन दिवस 8 अगस्त 2022 पर विशेष  आओ भारत छोड़ो आंदोलन से प्रेरणा लेकर, खाओगे तो जाओगे जन …


भारत छोड़ो आंदोलन दिवस 8 अगस्त 2022 पर विशेष 

आओ भारत छोड़ो आंदोलन से प्रेरणा लेकर, खाओगे तो जाओगे जन जागरण अभियान चलाएं 

75 वें अमृत जयंती महोत्सव में आजादी से जुड़े हर आंदोलनों से प्रेरणा लेकर भ्रष्टाचार, अत्याचार से जांबाज़ी और जज्बे से मुकाबला करना समय की मांग – एडवोकेट किशन भावनानी 

गोंदिया – भारत में पिछले एक वर्ष से जोश और उमंग के साथ शासन प्रशासन और निजी स्तरपर हर क्षेत्र में आजादी का 75 वां अमृत जयंती महोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। अभी सोने पर सुहागा घर-घर तिरंगा, बढ़े चलो सहित अनेक प्रेरणादायक कार्यक्रमों का आयोजन 15 अगस्त 2022 तक करने से हर भारतीय के हृदय में राष्ट्रहित देशभक्ति की भावना परवाना चढ़ जोश खरोश के साथ चल रहा है, जो मेरा मानना है भारतीय इतिहास में कभी नहीं हुआ!! ऐसा है मेरा भारत!!इस अवसर पर मेरा सुझाव है कि भारत की स्वतंत्रता के लिए चलाए गए सभी आंदोलनों से हमें प्रेरणा लेकर वर्तमान में भारत विरोधी ताकतों, भ्रष्टाचारियों, अपराधियों, जनता का हक मारने वालों, अज्ञात स्त्रोतोंसे धन कमाने वालों, मानव तस्करी सभी प्रकार के अवैध नशे व्यापारियों सहित भारत के सोने की चिड़िया बनने में खलल डालने वालों के खिलाफ वैसे ही रणनीतिक रोडमैप से मुकाबला करने का संकल्प लेना चाहिए, क्योंकि हम 8 अगस्त 2022 का भारत छोड़ो आंदोलन की 80 वीं वर्षगांठ मना रहे हैं इसलिए इस आर्टिकल के माध्यम से हम अंग्रेजों के भारत छोड़ो आंदोलन, करो या मरो नारे और इन से प्रेरणा लेकर ना खाऊंगा ना खाने दूंगा और खाओगे तो जाओगे पर चर्चा करेंगे। 

साथियों बात अगर हम 8 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन की करें तो, सन् 1857 के पश्चात देश की आजादी के लिए चलाए जाने वाले सभी आंदोलनों में सन् 1942 का ‘भारत छोड़ो आंदेालन’ सबसे विशाल और सबसे तीव्र आंदोलन साबित हुआ। जिसके कारण भारत में ब्रिटिश राज की नींव पूरी तरह से हिल गई थी। आंदोलन का ऐलान करते वक़्त गांधी जी ने कहा था मैंने कांग्रेस को बाजी पर लगा दिया। यह जो लड़ाई छिड़ रही है वह एक सामूहिक लड़ाई है। सन् 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन भारत के इतिहास में अगस्त क्रांति के नाम से भी जाना जाता रहा।साथियों भारत छोड़ो आंदोलन द्वितीय विश्वयुद्ध के समय 8 अगस्त 1942 को आरम्भ किया गया था, जिसका मकसद भारत मां को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराना था। ये आंदोलन देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की ओर से चलाया गया था। बापू ने इस आंदोलन की शुरूआत अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के मुम्बई अधिवेशन से की थी।भारत छोड़ो आंदोलन दिवस: ‘करो या मरो’ का आह्वान8 अगस्त 1942 को, महात्मा गांधी ने मुंबई के गोवालिया टैंक मैदान में भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत करते हुए राष्ट्र को अपना भाषण दिया, जिसे अगस्त क्रांति मैदान भी कहा जाता है। महात्मा गांधी ने अपने भाषण में लोगों से राष्ट्र के लिए करो या मरो का आह्वान किया था। इसका मतलब था कि हम या तो भारत को अंग्रेजों से मुक्त कराएंगे या राष्ट्र की रक्षा करते हुए मर जाएंगे, हम अब अंग्रेजों के गुलाम नहीं रहेंगे।

साथियों भारत छोड़ो आंदोलन को अपने उद्देश्य में आशिंक सफलता ही मिली थी लेकिन इस आंदोलन ने 1943 के अंत तक भारत को संगठित कर दिया। युद्ध के अंत में, ब्रिटिश सरकार ने संकेत दे दिया था कि संत्ता का हस्तांतरण कर उसे भारतीयों के हाथ में सौंप दिया जाएगा। इस समय गांधी जी ने आंदोलन को बंद कर दिया जिससे कांग्रेसी नेताओं सहित लगभग एक लाख राजनैतिक बंदियों को रिहा कर दिया गया। भारत छोड़ो आंदोलन को अगस्त क्रांति के नाम से भी जाना जाता है। 8 अगस्त को क्विट इंडिया मूवमेंट डे 2022 का 80 वां वर्षगांठ मनाया जा रहा है। भारत की आजादी के कई आंदोलन चलाए गए, जिसमें भारत छोड़ो आंदोलन ने सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

साथियों लोग ब्रिटिश शासन के प्रतीकों के खिलाफ प्रदर्शन करने सड़कों पर निकल पड़े और उन्‍होंने सरकारी इमारतों पर कांग्रेस के झंडे फहराने शुरू कर दिये। लोगों ने गिरफ्तारियां देना और सामान्‍य सरकारी कामकाज में व्‍यवधान उत्‍पन्‍न करना शुरू कर दिया। विद्यार्थी और कामगार हड़ताल पर चले गये। बंगाल के किसानों ने करों में बढ़ोतरी के खिलाफ संघर्ष छेड़ दिया। सरकारी कर्मचारियों ने भी काम करना बंद कर दिया, यह एक ऐतिहासिक क्षण था। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ही डॉ. राम मनोहर लोहिया, जय प्रकाश नारायण और अरुणा आसफ अली जैसे नेता उभर कर सामने आये। भारत छोड़ो आंदोलन के कारण और परिणाम का फल ही है कि भारतीय नागरिक आज खुली हवा में सांस ले रहे हैं। भारत छोड़ो आंदोलन का नेतृत्व महात्मा गांधी ने किया था।

साथियों बात अगर हम आजादी की 75 वीं अमृत महोत्सव जयंती वर्ष में अज्ञात स्त्रोतों से आए और भ्रष्टाचार पर ईडी के शिकंजे की करें तो मीडिया के माध्यम से हमने पढ़ा सुना कि कई बड़े बड़े अधिकारियों नेताओं व्यापारियों उद्योगपतियों व्यवसायियों पर शिकंजा कसकर ईडी ने जांबाज़ी से मामलों को उजगार किया और नोटों के पहाड़ों की जब्ती की!! परंतु मेरा मानना है कि हम आजादी के आंदोलनों से प्रेरणा लेकर ऐसे अधिकारियों नेताओं उद्योगपतियों जो संविधान अधिनियम नियमों को ताक पर रखकर अपनी कैपिटल बिल्डिंग में बेतहाशा वृद्धि कर रहे हैं, हर नागरिक को उनके खिलाफ जनजागरण करना होगा कि खाओगे तो जाओगे!! और हर शासकीय प्रशासकीय व्यक्ति को ना खाऊंगा ना खाने दूंगा का मंत्र जो पीएम द्वारा दिया गया है इसे अपने हृदय में गांठ बांध लेना चाहिए क्योंकि यदि 8 अगस्त 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन जो देशभक्तों का सबसे बड़ा आंदोलन था जिसने अंग्रेजों के भारत छोड़ने के बीज बोए!! जबकि उस समय उतनी तकनीकी का विकास नहीं था जबकि आज भारत एक डिजिटल इंडिया का साकार रूप है तो हमदेश को सोने की चिड़िया बनाने में खलल डालने वालों के खिलाफ जन जागरण अभियान का संकल्प लेने की बात को रेखांकित कर सकते हैं!! बस जरूरत है आजादी से जुड़े अहिंसात्मक आंदोलनों से प्रेरणा लेने की। 

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि भारत छोड़ो आंदोलन दिवस 8 अगस्त 2022 पर विशेष है।आओ भारत छोड़ो आंदोलन से प्रेरणा लेकर खाओगे तो जाओगे जनजागरण अभियान चलाएं। 75 वें अमृत जयंती महोत्सव में आजादी से जुड़े हर आंदोलनों से प्रेरणा लेकर भ्रष्टाचार अत्याचार से जांबाज़ी और जज्बे से अनुशासनात्मक मुकाबला करना समय की मांग है। 

About author

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

गुरु नानक देव का 553 वां जयंती महोत्सव 8 नवंबर 2022 पर विशेष

November 8, 2022

गुरु नानक देव का 553 वां जयंती महोत्सव 8 नवंबर 2022 पर विशेष जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल

विवाह/mariage

November 5, 2022

विवाह बहुत दिनों बाद अपनी सखी के घर गई थी मैं,बेटी की शादी की बधाई भी देनी थी और मौसीजी

कविता-मानगढ़ धाम की गौरव गाथा/mangarh dham ki Gaurav yatra

November 5, 2022

आजादी का अमृत महोत्सव के हिस्से के रूप में, सरकार ने स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम जनजातीय नायकों को याद करने

शासकीय कार्यों में लापरवाही के विरुद्ध सख़्त कार्रवाई में तेजी लाना समय की मांग

November 5, 2022

लापरवाही शासकीय कार्यों में लापरवाही के विरुद्ध सख़्त कार्रवाई में तेजी लाना समय की मांग स्थाई सुशासन लाने का मूलमंत्र

भारत में मुद्रा का डिजिटलीकरण/bharat me mudra ka digitalikaran

November 5, 2022

भारत में मुद्रा का डिजिटलीकरण भारतीय मुद्रा का आना से लेकर ई-रुपया तक का दिलचस्प सफ़र डिजिटल रुपया (ई-रुपया) प्रणाली

कविता-विकास के नाम से सुना था/vikas ke nam se soona tha

November 5, 2022

कविता-विकास के नाम से सुना था विकास के नाम से सुना था पर उसका भी दामन खाली हैकिसे सुनाऊं अपनी

Leave a Comment