Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

भारतीय संस्कृति के विविध रंगों और आध्यात्मिक शक्ति का आकर्षण

हमारे देश में कला की सबसे प्राचीन और सबसे श्रेष्ठ परिभाषाएं व परंपराएं विकसित हुई हैं वैश्विक स्तरपर भारतीय संस्कृति …


हमारे देश में कला की सबसे प्राचीन और सबसे श्रेष्ठ परिभाषाएं व परंपराएं विकसित हुई हैं

वैश्विक स्तरपर भारतीय संस्कृति के विविध रंगों और आध्यात्मिक शक्ति ने आकर्षित किया है

भारतीय संस्कृति के विविध रंगों और आध्यात्मिक शक्ति का आकर्षण

भारतीय संस्कृति, कला, साहित्य, संगीत ने संपूर्ण विश्व में अपनी एक अलग पहचान, प्रतिष्ठा बनाई है जिस पर हमें गर्व है- एडवोकेट किशन भावनानी

भारत हज़ारों वर्षों से संस्कृति, साहित्य, कला और संगीत के विविध रंगों और आध्यात्मिक शक्ति से भरपूर एक अणखुट खज़ाने का धनी रहा है जिसे विश्व के हर देश ने बड़ी जिज्ञासा के साथ महसूस किया है और यह जानने की कोशिश की है कि आखिर कोई देश इस अलौकिक सृष्टि में इतना कुदरती खज़ाने से भरपूर कैसे हो सकता है।

साथियों बात अगर हम इस वैश्विक सोच की करें तो हमारी जीत इस सोच के साथ ही हो जाती है कि हमारे देश के बारे में विश्व इतना सकारात्मक और जिज्ञासा से भरी बौद्धिक क्षमता से देख वह सोच रहा है। फिर सोने पर सुहागा है कि आज जिस तेजी के साथ हमारा देश प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, परिवहन, शिक्षा, कौशलता विकास, नवाचार, नवोन्मेष सहित अनेक क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है और वैश्विक स्तरपर उपलब्धियों की झड़ी लगा रहा है उसे देखकर पूर्ण विकसित देश भी हैरान हैं।
साथियों बात अगर हम वर्तमान में भारतीय संस्कृति, कला, साहित्य, संगीत को प्रोत्साहन देने और शासकीय स्तरपर लोगों को आगे आने की अपील करने की करें तो हम रोज़ प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में देखते सुनते पढ़ते हैं कि माननीय उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित अनेक बुद्धिजीवियों कला प्रेमियों द्वारा अपने अनेक संबोधनों में भारतीय कला, संस्कृति, साहित्य, भाषा, मातृभाषाओंं को प्रोत्साहन देने और विलुप्तता से बचाने पर जोर दिया है हमारी भारतीय सभ्यता, परंपराओं, संस्कृति के विविध रंगों को सुरक्षित और कायम रखने के लिए उत्साहवर्धक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है जो काबिले तारीफ है। साथियों बात अगर हम इस डिजिटल इंडिया में भारतीय संस्कृति, सभ्यता, परंपराओं के विभिन्न रंगों के संरक्षण और सुरक्षा की करें तो इसके हर रंग को जो मानवीय हस्तकला से संजोयित हैं, उन्हें इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि सदियों तक हमारी अगली पीढ़ी भी इसके महत्व का मूल्यांकन कर सके और जब तक यह सृष्टि रहे तब तक हमारी भारतीय संस्कृति, कला, साहित्य, संगीत सुरक्षित रहे जो हमारा अनमोल खज़ाना और धरोहर है उसे हम यूं विलुप्त होने नहीं देंगे यह सोच आज हर भारतीय नागरिक के हृदय में समाना अत्यंत ज़रूरी है, खास करके हमारे युवा साथियों को इस परंपरा को आगे संरक्षित करना है क्योंकि आज भारत की 65 फ़ीसदी जनसंख्या युवा है।
 
साथियों बात अगर हम 23 फरवरी 2023 को माननीया राष्ट्रपति द्वारा संगीत नाटक अकादमी के पुरस्कार वितरण समारोह में संबोधन की करें तो पीआईबी के अनुसार उन्होंने नई दिल्ली में साल 2019, 2020 और 2021 के लिए संगीत नाटक अकादमी की फैलोशिप (अकादमी रत्न) और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (अकादमी पुरस्कार) प्रदान किए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सभ्यता किसी राष्ट्र की भौतिक उपलब्धियों को प्रदर्शित करती है, लेकिन अमूर्त विरासत उसकी संस्कृति के माध्यम से सामने आती हैं। संस्कृति ही देश की वास्तविक पहचान होती है। भारत की अद्वितीय प्रदर्शन कलाओं ने सदियों से हमारी अतुल्य संस्कृति को जीवंत बनाए रखा है। हमारी कलाएं और कलाकार हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संवाहक हैं। ‘विविधता में एकता’ हमारी सांस्कृतिक परम्पराओं की सबसे बड़ी विशेषता है। उन्होंने कहा कि हमारी परंपरा में कला एक साधना है, सत्य की खोज का माध्यम है, प्रार्थना व पूजा का माध्यम है, लोक कल्याण का माध्यम है। सामूहिक उल्लास और एकता भी नृत्य व संगीत के माध्यम से अभिव्यक्त होती है। कला भाषाई विविधता और क्षेत्रीय विशेषताओं को एक सूत्र में बांधती है। उन्होंने कहा कि हमें इस बात पर गर्व होना चाहिए कि हमारे देश में कला की सबसे प्राचीन और सबसे श्रेष्ठ परिभाषाएं व परंपराएं विकसित हुई हैं। आधुनिक युग में हमारे सांस्कृतिक मूल्य और अधिक उपयोगी हो गए हैं। आज के तनाव और संघर्ष से भरे युग में, भारतीय कलाओं द्वारा शांति और सौहार्द का प्रसार किया जा सकता है। इसके अलावा भारतीय कलाएं भी भारत की सॉफ्ट पावर का बेहतरीन उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह हवा और पानी जैसे प्राकृतिक उपहार मानवीय सीमाओं को नहीं मानते, उसी तरह कला की विधाएं भी भाषा और भौगोलिक सीमाओं से ऊपर होती हैं। एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी, पंडित रविशंकर, उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, लता मंगेशकर, पंडित भीमसेन जोशी और भूपेन हजारिका का संगीत भाषा या भूगोल से बाधित नहीं होते थे। उन्होंने अपने अमर संगीत से केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में संगीत प्रेमियों के लिए एक अमूल्य विरासत छोड़ी है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि हमारे देश में कला की सबसे प्राचीन और सबसे श्रेष्ठ परिभाषाएं व परंपराएं विकसित हुई हैं।वैश्विक स्तरपर भारतीय संस्कृति के विभिन्न रंगों और आध्यात्मिक शक्ति ने सारे विश्व को आकर्षित किया है तथा भारतीय संस्कृति, कला, साहित्य, संगीत ने संपूर्ण विश्व में अपनी एक अलग पहचान, प्रतिष्ठा बनाई है जिस पर हमें गर्व है।

About author

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट 

किशन सनमुख़दास भावनानी 
 गोंदिया महाराष्ट्र

Related Posts

Bhrastachar par kavita

February 1, 2023

भावनानी के भाव भ्रष्टाचार की काट सख़्त जवाबदेही हर प्रशासकीय पद की सख़्त ज़वाबदेही व्यवहारिक रूप से ज़रूरी है कागजों

RRR movie : Golden globe se Oscar tak

February 1, 2023

 आरआरआर : गोल्डन ग्लोब से ऑस्कर तक ए.आर.रहमान को जब गोल्डन ग्लोब अवार्ड मिला था, पूरे भारत के लोगों ने

Imandari par lekh

February 1, 2023

आओ ईमानदारी को व्यक्तित्व रूपी आभूषण बनाएं ईमानदारी और आत्म सम्मान मानवीय जीवन के दो अनमोल हीरे मोती भ्रष्टाचार, फरेब,

Budget 2023 par lekh| बजट पर लेख

February 1, 2023

 देश में अमृतकाल, बजट से मालामाल या बुरे होंगे हाल Budget 2023 अगले वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव

1994 से बाबा रामदेव मेला समिति बड़वा कर रही खेलों का आयोजन

January 30, 2023

 1994 से बाबा रामदेव मेला समिति बड़वा कर रही खेलों का आयोजन बूढा और ऊंटों की दौड़ बनती है आकर्षण

बच्चे अपंग (आलसी) हो जाएं, इतनी भी सुविधा न दें

January 30, 2023

 बच्चे अपंग (आलसी) हो जाएं, इतनी भी सुविधा न दें  pic credit -freepik सुबह-सुबह स्कूल जाने का समय होते ही

PreviousNext

Leave a Comment