Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

भारतीय भाषाएं अनमोल रत्न

भारतीय भाषाएं अनमोल रत्न!! डिजिटल प्रौद्योगिकियों के विकास ने हमें अपनी भाषाओं और संस्कृति विरासत को संरक्षण और विकास के …


भारतीय भाषाएं अनमोल रत्न!!

भारतीय भाषाएं अनमोल रत्न

डिजिटल प्रौद्योगिकियों के विकास ने हमें अपनी भाषाओं और संस्कृति विरासत को संरक्षण और विकास के नए अवसर प्रदान किए है

आधुनिक युग में डिजिटल प्रौद्योगिकियों का दोहन स्वस्थ, साफ़गोई और सकारात्मक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रभावी उपयोग करना ज़रूरी – एड किशन भावनानी

गोंदिया – भारत सॉफ्टवेयर की एक महाशक्ति के रूप में जाना जाता है। अगर हम वैश्विक विकसित देशों की सॉफ्टवेयर कंपनियों के कर्मचारियों पर अनुमान लगाएं तो मेरा मानना है कि हमें कई भारतीय मूल के डेवलपर, प्रोग्रामर सॉफ्टवेयर, विशेषज्ञ मिलेंगे जो बड़े-बड़े पैकेजों से अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। परंतु अगर हम कृषि और गांव प्रधान देश में जीरो ग्राउंड पर जाकर विश्लेषण करेंगे तो अभी भी डिजिटल विकास का जनसैलाब हमारे ग्रामीण व कृषि भाइयों तक अपेक्षाकृत कम पहुंचा है। हालांकि केंद्र और राज्य सरकारें भरपूर प्रयत्न कर रहे हैं कि कृषि और ग्रामीण इलाकों में डिजिटलाइजेशन की क्रांति तेजी से पहुंचे हालांकि अनेक शासकीय कार्य आसानी से शीघ्र हो सके तथा उनको मिलने वाली सहायता राशि, पैकेज, उनके मेहनत और कृषि वस्तुओं का पैसा, उनके अकाउंट में सीधे ट्रांसफर हो सके ताकि बिचौलिए, रिश्वतखोरी और अवैध वसूली करने वालों का आंकड़ा जीरो हो जाए और ग्रामीण किसानों के जीवन समृद्धि में वृद्धि हो सके।
साथियों बात अगर हम विभिन्न डिजिटल प्रौद्योगिकियों से हमारे जीवन, जीवनस्तर, हमारी विरासत के संरक्षण, विकास के अवसर की करें तो हमारी डिजिटल प्रौद्योगिकी ने हमारी जीवनशैली ही बदल कर रख दी है। अधिकतम सकारात्मक दिशा में तो कुछ हद तक नकारात्मक दिशा में भी हुई है जिस तरह सिक्के के दो पहलू होते हैं उसी तरह हर आयाम के भी कुछ नकारात्मक पहलू होते हैं। पर हमें कोशिश करके नकारात्मक पहलू छोड़कर सकारात्मकता की ओर बढ़ कर डिजिटल प्रौद्योगिकी के विभिन्न सुविधाओं का लाभ उठाने की ज़रूरत है।
साथियों बात अगर हम अपनी भाषा और संस्कृति विरासत हजारों वर्ष पूर्व इतिहास के उन संदर्भित पन्नों की बात करें तो उन्हें संजोकर रखने का महत्वपूर्ण और काम इस डिजिटल प्रौद्योगिकी की तकनीकी के कारण हो सकता है। आज हजारों लाखों पृष्ठों की हमारी विरासत, संस्कृति, भाषाओं नीतियों का संरक्षण हम डिजिटल प्रौद्योगिकी की विभिन्न तकनीकों से करने में सफल हुए हैं। नहीं तो आगे चलकर हमारी अगली पीढ़ियों तक यह स्वर्ण पन्नों की लिखित विरासत पहुंचती या नहीं इसका जवाब समय के गर्भ में छिपा था। परंतु अभी हम डिजिटल प्रौद्योगिकी के ऐप के भरोसे कह सकते हैं कि यह विरासत मानव प्रजाति होने तक सुरक्षित रहेगी, यह उसका सकारात्मक उपयोग और संरक्षण योग्य और सुरक्षित हाथों में रहने पर निर्भर है। साथियों हमारी भाषाओं संस्कृति और विरासत को संरक्षित करने और बढ़ावा देने की करें तो इसके लिए सुरक्षित प्रौद्योगिकी कीशक्ति का दोहन स्वस्थ साफगोई और सकारात्मक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए करना है, सदा ही होगा क्योंकि यह हमें विकास के नए अवसर प्रदान करते हैं। राज्य शासन को बड़े पैमाने पर स्थानीय भाषाओं का उपयोग करना चाहिए भाषाएं जीवित रहेगी तो हमारे अनेकता में एकता की भारतीय खूबसूरती, संस्कृति जीवित रहेगी साथियों बात अगर हम माननीय उपराष्ट्रपति द्वारा एक अमेरिकी फाउंडेशन पुस्तक के वर्चुअल विमोचन पर टिप्पणी की करें तो उन्होंने भी कहा,यह देखते हुए कि इंटरनेट और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के विकास ने हमें अपनी भाषाओं के संरक्षण और विकास के नए अवसर प्रदान किए हैं, उन्होंने इन प्रौद्योगिकियों का प्रभावी उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिस दिन हमारी भाषा को भुला दिया जाएगा, हमारी संस्कृति भी विलुप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि हमारे प्राचीन साहित्य को युवाओं के निकट लाया जाना चाहिए। उन्होंने तेलुगु भाषा के लिए काम करने वाले संगठनों से तेलुगु की समृद्ध साहित्यिक संपदा को सभी के लिए उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी लेने का आग्रह किया। पारंपरिक शब्दावली को सभी के लिए सुलभ बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए, उन्होंने कहा कि मौजूदा शब्दों का प्रभावी ढंग से उपयोग करना और बदलते रुझानों के अनुरूप नए शब्दोंका निर्माण करना आवश्यक है। उन्होंने अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और भाषाई विरासत को संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
उन्होंने सभी से व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से इसके लिए प्रयास करने का आग्रह किया। इसके पूर्व भी उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा था, यह उल्लेख करते हुए कि भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना उनका प्रिय विषय रहा है, उन्होंने कहा कि भाषा किसी संस्कृति की जीवन रेखा है। हमें भाषाओं के संरक्षण, प्रचार और प्रसार के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब कोई भाषा समाप्त हो जाती है, तो उस भाषा से जुड़ी सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और रीति-रिवाजों का क्षय होगा। यह उल्लेख करते कि हुए कि भाषा के संरक्षण और विकास के लिए एक बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है, उन्होंने लोगों की हर समय अपनी मातृभाषा में बोलने की आवश्यकता का समर्थन किया, सिवाय इसके कि जहां किसी अन्य भाषा में संवाद करना आवश्यक हो। उन्होंने कहा कि प्राथमिक विद्यालय स्तर पर मातृभाषा को बढ़ावा देना प्रारम्भ करना चाहिए। उन्होंने सभी राज्य सरकारों को प्राथमिक शिक्षा के दौरान मातृभाषा को अनिवार्य बनाने की सलाह दी।
उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि देश भर में राज्य प्रशासन द्वारा दक्षता और सेवाओं के परिदान में सुधार के लिए संबंधित स्थानीयभाषाओं का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, किसी भी भाषा को संरक्षित करने या उसे बढ़ावा देने का सबसे अच्छा तरीका है कि इसका उपयोग दैनिक जीवन में बड़े पैमाने पर किया जाए।क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए संसद की पहल का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि राज्यसभा सदस्य अब संसद में 22 अधिसूचित भाषाओं में से किसी भाषा में भी बात कर सकते हैं और अपनी बातों को रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि इन भाषाओं में युगपत अनुवाद प्रदान किया जाता है और सदस्य इनमें से किसी भी भाषा में अपने विचारों को प्रभावी ढंग से रख सकते हैं। उन्होंने हमारी भाषाओं और संस्कृति को संरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए प्रौद्योगिकी की शक्ति का उपयोग करने का सुझाव दिया। उन्होंने सभी भारतीय भाषाओं में अधिक से अधिक ऑनलाइन शब्दकोश, विश्वकोश, शब्दावलियों, शोध लेखों और खोज योग्य डेटाबेस के निर्माण का आह्वान किया। उन्होंने कहा, ‘पुरानी पांडुलिपियों की सुकर पुनर्प्राप्ति के लिए उन्हें इलेक्ट्रॉनिक रूप से संगृहीत किया जाना चाहिए।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे के डिजिटल प्रौद्योगिकियों के विकास ने हमें अपनी भाषाओं और संस्कृति विरासत को संरक्षण और विकास के नए अवसर प्रदान किए हैं तथा आधुनिक युग में डिजिटल प्रौद्योगिकियों का दोहन स्वस्थ साफ़गोई और सकारात्मक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रभावी उपयोग करना ज़रूरी है।

-संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ, स्तंभकार, 

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

स्वयं के जीवन के निर्णय स्वयं से लीजिए!/swayam ke jeevan ke nirnay swayam se lijiye

July 23, 2022

 स्वयं के जीवन के निर्णय स्वयं से लीजिए!/swayam ke jeevan ke nirnay swayam se lijiye  हम सभी को आम तौर

Draupadi murmu ka mayurganj se rastrpati bhawan tak ka safar

July 22, 2022

द्रौपदी मुरमू का मयूर गंज से राष्ट्रपति भवन तक का सफर यशवंत सिन्हा का एक टीवी चैनल पर साक्षात्कार सुना

हार न मानने की जिद ने पैदा किया कवि और पायी परिस्थितियों पर जीत।

July 21, 2022

हार न मानने की जिद ने पैदा किया कवि और पायी परिस्थितियों पर जीत। ‘तितली है खामोश’ से सत्यवान ‘सौरभ’

एक मजबूत, शक्तिशाली और विकासशील भारत।/ek majboot shaktishali aur vikassheel bharat

July 19, 2022

 एक मजबूत, शक्तिशाली और विकासशील भारत। (उदीयमान प्रबल शक्ति के बावजूद भारत अक्सर वैचारिक ऊहापोह में घिरा रहता है. यही

अत्यधिक ऑनलाइन गेमिंग बच्चों की शिक्षा और सोच पर डाल रही हानिकारक प्रभाव।

July 18, 2022

 अत्यधिक ऑनलाइन गेमिंग बच्चों की शिक्षा और सोच पर डाल रही हानिकारक प्रभाव। सरकार बच्चों के लिए ऑनलाइन गेमिंग घंटे

क्यों वेतनभोगी दुधारू गाय कर के लिए बार-बार दूध दुही जाती है?

July 16, 2022

  क्यों वेतनभोगी दुधारू गाय कर के लिए बार-बार दूध दुही जाती है? प्रियंका ‘सौरभ’ (आखिर एक तनख्वाह से, कितनी

Leave a Comment