Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

भान दक्षिणायन भए- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

भान दक्षिणायन भए…!!! भान दक्षिणायन भए, शिशिर सरकारी।पछुआ बयार मोहे ,तीर सम लाग्यो है ।। बिकल बौराई मैं,थर-थर बदन काँप्यो।ऐसे …


भान दक्षिणायन भए…!!!

भान दक्षिणायन भए- विजय लक्ष्मी पाण्डेय
भान दक्षिणायन भए,

शिशिर सरकारी।
पछुआ बयार मोहे ,
तीर सम लाग्यो है ।।

बिकल बौराई मैं,
थर-थर बदन काँप्यो।
ऐसे में पी की ,
हजूरी सतावे है।।

जुड़ी में जोड़े -जोड़े,
पपीहा न बोली बोले।
अँधेरी रैन, जिया,
चैन नहीं पायो है ।।

पाती पर पाती,
पठावन लागी मैं।
पूस की भयावह रैन,
डरावन लाग्यो है।।

कंटक सी रूखी सूखी,
अंखियों नें काजर धुली।
अब तो प्रिय जाड़,
सतावन लाग्यो है।।

तकरार सैन की,
परदेशी बैन की।
पीपर की पाती पर,
सन्देशा एक आयो है।।

रीत गए माघ रैन,
फागुन गुलाल बिन।
चैत्र सखा संग,
होरी पठायो है।।

“विजय” के निहोरे,
आयो ना चकोरे।
माहुर की गाँछ में,
प्रान ढुकायो है।।

विजय लक्ष्मी पाण्डेय
एम. ए., बी.एड.(हिन्दी)
स्वरचित मौलिक रचना
आजमगढ़ ,उत्तर प्रदेश


Related Posts

हर चेहरा कुछ कहता है-भावना ठाकर

May 24, 2022

 “हर चेहरा कुछ कहता है” हर इंसान के मन में उठते तरंगों को प्रतिबिंबित करता आईना है चेहरा, अपनों की

परम शक्ति!

May 17, 2022

परम शक्ति! किस बात का गुरूर है तुझे इंसान,तू इतना भी हे नहीं महान,करने वाला वह, कराने वाला वह,वही चला

सुरम्य एवं सहज जीवन!

May 17, 2022

सुरम्य एवं सहज जीवन! गुरुर में रास्ते धुंधले पड़ जाएंगे,खुद के अलावा किसी को कैसे देख पाएंगे,प्रेम और जुनून के

मार्मिक कविता – कश्मीर में शहीदों की कुर्बानी कब तक़

May 17, 2022

मार्मिक कविता -कश्मीर में शहीदों की कुर्बानी कब तक कश्मीर में शहीदों की कुर्बानी से आंखें सभकी भर आई वो

धूप छांव

May 15, 2022

धूप छांव जिंदगी के रूप कई कहीं मिले धूप छांव आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार

माँ-हरविंदर सिंह ‘ग़ुलाम’

May 14, 2022

माँ सुना देवताओं के बारे में अक्सरमगर देव कोई कभी भी न आया लगी ठोकरें जब ज़माने की मुझको हर

PreviousNext

Leave a Comment