Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Veerendra Jain

भांग के साइड इफेक्ट्स

भांग के साइड इफेक्ट्स आंखें बंद करता हूं तो अंधेरा डराता है,आंखें खुली रखता हूं तो उजाला सताता है,मुझे नींद …


भांग के साइड इफेक्ट्स

आंखें बंद करता हूं तो अंधेरा डराता है,
आंखें खुली रखता हूं तो उजाला सताता है,
मुझे नींद नहीं आती,
मुझे नींद नहीं आती….!!

पैर जो पानी में डालूं तो दिल कांप सा जाता है,
रंग बदल नीला पड़ जाये सुन्न सा ये हो जाता है,
दिल पे बोझ रखा है कोई, पैर उठा नहीं पाता है ।
आंखें बंद करता हूं तो अंधेरा डराता है,
आंखें खुली रखता हूं तो उजाला सताता है…

आसमान सिर पर खड़ा है ज़िद कोई लगाए रखा है,
त्यौहार है शायद कोई सबने घर सजाए रखा है,
गरम जलेबी मुंह में लूं तो आंख से पानी आता है,
आंखें बंद करता हूं तो अंधेरा डराता है,
आंखें खुली रखता हूं तो उजाला सताता है…!!

बिखर गए हैं ख़्वाब सारे अस्त व्यस्त सब लगता है,
नीला लाल कोई भी पहने रंग चांद पर फबता है,
काली होती रात सबेरा लाल मग़र बन जाता है,
आंखें बंद करता हूं तो अंधेरा डराता है,
आंखें खुली रखता हूं तो उजाला सताता है…!!

About author 

Veerendra Jain, Nagpur
Veerendra Jain, Nagpur
Veerendra Jain, Nagpur
Instagram id : v_jain13

Related Posts

आह्वान- डॉ.इन्दु कुमारी

December 3, 2021

आह्वान मद्यपान निषेध मेरे देश के नौजवानोंतू है मौजों की रवानीहै भारत माँ के लाल वेशकीमती तेरी जवानीमद्यपान नहीं जिन्दगानीबीड़ी

देशरत्न डॉ.राजेन्द्र प्रसाद- डॉ.इन्दु कुमारी

December 3, 2021

 देशरत्न डॉ.राजेन्द्र प्रसाद विभूति सादगी के किया सुशोभित देशऱत्न प्रथम राष्ट्रपति के ऊँचे पद मुस्कान भरी मुखमंडल परअंकुरित न हो सके

बच्चन जी- सुधीर श्रीवास्तव

December 3, 2021

बच्चन जी सत्ताइस नवंबर उन्नीस सौ सात कोकायस्थ कुल में पैदापिता प्रताप नारायण के घरमां सरस्वती देवी की कोख सेप्रतापगढ़

मुर्दा कौन- R.S.meena Indian

December 3, 2021

 कविता   “मुर्दा कौन” मुर्दा वो नहीं जिसे दिखता नहीं। मुर्दा वो हैं जो देख पाता नहीं।। मुर्दा वो नहीं जो

आज फिर देखा चांद- जयश्री बिरमी

December 3, 2021

आज फिर देखा चांद सुबह से भूखी प्यासी सीडोल रही थी गली गली कोई भी न था राजी देने को

तुम हमारी कामना – डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 3, 2021

तुम हमारी कामना संभावना से कौन करता ,कब कहां इनकार है ,प्रेम का परिणाम होगा ,दर्द का अभिशाप अपना।। शालीन

Leave a Comment