Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

भक्ति और कीर्तन का बाधक कॉविड 19

 भक्ति और कीर्तन का बाधक कॉविड 19 मार्च महीने ने में लॉक डाउन से पहले 20 मार्च 2020 के दिन  …


 भक्ति और कीर्तन का बाधक कॉविड 19

भक्ति और कीर्तन का बाधक कॉविड 19
मार्च महीने ने में लॉक डाउन से पहले 20 मार्च 2020 के दिन  हमारा अखिराला कीर्तन हुआ था जो हम हर महीने के पहले और तीसरे शनिवार के दिन आयोजन करते थे।अब दो सालों बाद सब से मिलना और मिलकर माता रानी को कीर्तन कर रिजते हुए शुकराना करना कि इतनी विपरीत परिस्थितियों के बाद भी हम सब सेहत मंद हैं और मिल भी रहे थे।पहले  कुछ भक्त मिलकर इन लाइन कीर्तन किया करते थे ,जहा ढोलक की ताल नहीं मिल रही थी और न ही छेने की जानकार फिर भी कीर्तन तो हो ही जाते थे। अब जब आभासी कीर्तन से रूबरू हुए कीर्तन का आनंद ही कुछ और था।लेकिन कुछ कीर्तन के बोल तो आते थे किंतु लय नहीं आ रही थी,ढोलक के tal के साथ गाना भी मुश्किल लग रहा था।और तो और आभासी कीर्तन में भोग नहीं लगता था और प्रत्यक्ष आरती भी नहीं होती थी तो उसका क्रम भी चूक रहे थे। आज दूसरे दिन भी अमृत वर्षा करवानी याद नहीं आ रही थी।पता नहीं क्या क्या चूक हो रही थी।

   जयकारे के बाद जो कीर्तन शुरू हुए वह  भक्ति भावों से भरपूर थे,सभी कीर्तन कारियों के मन के भाव  उभर उभर कर आते गए थे।कोई अपने शब्दों को माता रानी के सिंगार के लिए सजाते,तो कोई उन्हे खिलाने और बिठाने का इंतजाम करने के कीर्तन करते।बस हर तरफ माता रानी के बखान और उन की सुंदरता के ही बखान थे।लेकिन को प्रत्यक्ष कीर्तन करके आनंद आया उसका कोई जवाब ही नहीं हैं।सब ही ढोलक की ताल पर छैने और मंजीरे बजाते थे और मैं तो दोनों हाथों से करताल बजा रही थी और साथ में माता रानी की भेंटे गा रही थी।एक मीरा बाई  और नरसिंह मेहता का एहसास  आ जाता था।कीर्तन में भावपूर्ण शब्दों में डूब से गए थे सभी।एक के बाद एक कीर्तन शुरू हो राहें थे आज दूसरा दिन था तो सब को ही थोड़ा आत्मविश्वास बढ़ गया था पहले दिन की जीजक खत्म हो चुकी थी।ऐसे ही तीसरे दिन और खुलके मातारानी की पूजा अर्चना और कीर्तन किए ये माता रानी की ही कृपा थी।हमारी एक सत्संगी करोना का ग्रास  बन गई थी जिसे मौन धारण कर शांति प्रार्थना की गई ।

    फिर तो भोग लगा और आरती भी हो गई मतारानी का तीसरा नौराता पूरा किया–

जयकारा शेरावाली दा

सांचे दरबार की जय।

जयश्री बिरमी

अहमदाबाद


Related Posts

सुरक्षा के साथ मानवता का धर्म निभा रही कांस्टेबल सोनिया

October 19, 2022

फर्ज आखिर फर्ज ही होता है पुलिस की ड्यूटी हो या समाज में फैले तमाम बुराइयों को दूर करने का

दिल की बजाय दिमाग को शिक्षित करना शांतिपूर्ण समाज के लिए खतरा

October 19, 2022

मूल्य आधारित शिक्षाशास्त्र, अध्ययन सामग्री और कहानी सुनाने के विकास से बच्चों और समाज के दिमाग और दिल का समग्र

बहू को बेटी सा प्यार देकर बुढ़ापा सुरक्षित कर लीजिए

October 19, 2022

 बूढ़े माता-पिता के बुढ़ापे का सहारा बेटा नहीं…. एक अच्छी संस्कारी बहु होती है। हर माँ-बाप को बेटे की शादी

शमशान – शवदाह संस्कार /shamshan-shavdah sanskar

October 19, 2022

शमशान तेरा हिसाब बड़ा ही नेक है – तेरे यहां अमीर हो या गरीब सबका बिस्तर एक है  सामाजिक ढांचे

भ्रष्टाचार, रिटायरमेंट बाद जिंदगी लाचार

October 19, 2022

 भ्रष्टाचार, रिटायरमेंट बाद जिंदगी लाचार भ्रष्टाचारी लाख करे चतुराई, कर्म का लेख मिटे ना रे भाई  भ्रष्टाचारी कमाई का बीज़

इंटरपोल सम्मेलन 18 से 21 अक्टूबर 2022 पर विशेष

October 19, 2022

 इंटरपोल सम्मेलन 18 से 21 अक्टूबर 2022 पर विशेष आनो भद्रा क्रतवो यन्तु विश्वतः दुनियां को वैश्विक खतरों आतंकवाद, भ्रष्टाचार

Leave a Comment